28 जुलाई 2026
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राजनाथ सिंह का हैदराबाद में ऐलान: आकाश-ब्रह्मोस ने ऑपरेशन सिंदूर में साबित की भारत की रक्षा ताकत

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राजनाथ सिंह का हैदराबाद में ऐलान: आकाश-ब्रह्मोस ने ऑपरेशन सिंदूर में साबित की भारत की रक्षा ताकत

सारांश

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO के मंच से खुलकर कहा — आकाश और ब्रह्मोस ने असली युद्ध में खुद को साबित किया। हैदराबाद में उन्नत हथियार परिसर के उद्घाटन पर उनका संदेश साफ था: भविष्य के युद्ध की तैयारी आज से शुरू होनी चाहिए।

मुख्य बातें

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 12 जून 2026 को हैदराबाद में DRDO (DRDL) के उन्नत हथियार प्रणाली परिसर का उद्घाटन किया।
आकाश और ब्रह्मोस मिसाइल प्रणालियों ने ऑपरेशन सिंदूर में वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
रक्षामंत्री ने कहा — युद्ध में सफलता के लिए तकनीकी श्रेष्ठता के साथ-साथ बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता भी अनिवार्य है।
DRDO का लक्ष्य: राष्ट्रीय क्षमता सुदृढ़ करना, प्रौद्योगिकीय निर्भरता घटाना और सशस्त्र सेनाओं की परिचालन प्रभावशीलता बढ़ाना।
MSS क्लस्टर को भारत की सामरिक शक्ति और आत्मनिर्भरता का केंद्र बताया गया।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार, 12 जून 2026 को हैदराबाद में डीआरडीएल (DRDO) के उन्नत हथियार प्रणाली परिसर के उद्घाटन समारोह में कहा कि आज की दुनिया उथल-पुथल और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है — कहीं संघर्ष है, कहीं अस्थिरता है, तो कहीं सीधे युद्ध की स्थिति सामने आ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को न केवल वर्तमान चुनौतियों का सामना करना है, बल्कि भविष्य के युद्ध की ज़रूरतों को आज ही ध्यान में रखकर काम करना होगा।

आकाश और ब्रह्मोस की ऑपरेशन सिंदूर में परीक्षा

राजनाथ सिंह ने कहा कि DRDO द्वारा विकसित आकाश और ब्रह्मोस मिसाइल प्रणालियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में अपनी उत्कृष्ट क्षमता का प्रदर्शन किया। उनके अनुसार इन प्रणालियों की सफलता ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत आज वैश्विक रक्षा प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम है।

आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति

रक्षामंत्री ने कहा कि दुनिया भर में युद्ध का स्वरूप तेज़ी से बदल रहा है। सटीक-प्रहार क्षमताएं, एकीकृत वायु रक्षा प्रणालियाँ, अतिध्वनिक हथियार, स्वायत्त प्लेटफॉर्म, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और उन्नत सेंसर प्रौद्योगिकियाँ आधुनिक संघर्ष को पुनर्परिभाषित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत इस बदलाव के लिए तैयार है और DRDO को भविष्य की रणनीतिक ज़रूरतों का पूर्वानुमान लगाते हुए काम करना होगा।

उत्पादन क्षमता उतनी ही ज़रूरी जितनी तकनीक

राजनाथ सिंह ने एक महत्त्वपूर्ण बात रेखांकित की — सशस्त्र सेनाओं को अत्याधुनिक उपकरणों की जितनी ज़रूरत है, उससे अधिक ज़रूरी यह है कि वे उपकरण सही समय पर पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हों। उनके अनुसार, युद्ध में सफलता केवल तकनीकी श्रेष्ठता से नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता से भी सुनिश्चित होती है। यह टिप्पणी ऐसे समय में महत्त्वपूर्ण है जब भारत अपनी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला को घरेलू स्तर पर मज़बूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

DRDO पर सरकार का अभूतपूर्व भरोसा

रक्षामंत्री ने कहा कि सरकार ने स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए DRDO पर अभूतपूर्व विश्वास व्यक्त किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि DRDO के प्रत्येक प्रोजेक्ट का उद्देश्य राष्ट्रीय क्षमता को सुदृढ़ करना, प्रौद्योगिकीय निर्भरता को कम करना और सशस्त्र सेनाओं की परिचालन प्रभावशीलता बढ़ाना होना चाहिए। उन्होंने मिसाइल एंड स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स (MSS) क्लस्टर की भूमिका को राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति में अत्यंत महत्त्वपूर्ण बताया।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह उद्घाटन समारोह ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता पर बढ़ते फोकस की पृष्ठभूमि में हुआ। राजनाथ सिंह ने विश्वास जताया कि MSS क्लस्टर भविष्य में भी नवाचार, उत्कृष्टता और सामरिक शक्ति का केंद्र बना रहेगा, तथा भारत की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की यात्रा को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

'बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता' पर ज़ोर यह भी उजागर करता है कि भारत की रक्षा विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला अभी भी दबाव में है — एक ऐसी कमज़ोरी जिसे सरकार स्वीकार तो कर रही है, पर जिसके समाधान की समयसीमा अभी अस्पष्ट है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजनाथ सिंह ने हैदराबाद में क्या उद्घाटन किया?
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 12 जून 2026 को हैदराबाद में DRDO की प्रयोगशाला DRDL के उन्नत हथियार प्रणाली परिसर का उद्घाटन किया। यह परिसर मिसाइल और सामरिक प्रणालियों के विकास से जुड़ा है।
ऑपरेशन सिंदूर में आकाश और ब्रह्मोस का प्रदर्शन कैसा रहा?
रक्षामंत्री के अनुसार DRDO द्वारा विकसित आकाश और ब्रह्मोस प्रणालियों ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में उत्कृष्ट क्षमता का प्रदर्शन किया। इससे यह सिद्ध हुआ कि भारत वैश्विक रक्षा प्रौद्योगिकी में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम है।
DRDO की आगे की प्राथमिकताएँ क्या हैं?
राजनाथ सिंह ने कहा कि DRDO को भविष्य की रणनीतिक ज़रूरतों का पूर्वानुमान लगाते हुए अतिध्वनिक हथियार, AI, स्वायत्त प्लेटफॉर्म और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों पर काम करना होगा। साथ ही उत्पादन क्षमता को भी तकनीकी विकास के साथ बढ़ाना होगा।
MSS क्लस्टर क्या है और यह क्यों महत्त्वपूर्ण है?
मिसाइल एंड स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स (MSS) क्लस्टर DRDO की वह इकाई है जो भारत की मिसाइल और सामरिक हथियार प्रणालियों के विकास के लिए जिम्मेदार है। रक्षामंत्री ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा लक्ष्यों की प्राप्ति में अत्यंत महत्त्वपूर्ण बताया।
भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की स्थिति क्या है?
राजनाथ सिंह के अनुसार भारत अपनी रक्षा आधुनिकीकरण यात्रा के एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण दौर में है। सरकार ने DRDO पर अभूतपूर्व भरोसा जताया है और लक्ष्य है कि प्रौद्योगिकीय निर्भरता घटे तथा स्वदेशी उत्पादन क्षमता बढ़े।
राष्ट्र प्रेस
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