ऑपरेशन सिंदूर: राजनाथ सिंह बोले — रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड पर, 2029 तक ₹3 लाख करोड़ का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की आधुनिक और सुदृढ़ सैन्य क्षमता का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में रक्षा क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों ने देश की सुरक्षा तैयारियों को एक नई धार दी है।
ऑपरेशन सिंदूर: शौर्य और संकल्प का प्रतीक
राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को भारतीय रक्षा बलों के अद्वितीय पराक्रम की याद दिलाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने आतंकवादियों और उनके संरक्षकों को मुंहतोड़ जवाब दिया और सरकार की 'शून्य सहिष्णुता' नीति को कार्रवाई में परिणत किया। उनके शब्दों में, 'आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता केवल एक बयान नहीं, बल्कि एक कार्य योजना है' — और भारत के पास अब आतंकियों के ठिकानों में घुसकर प्रहार करने की क्षमता है।
रक्षा मंत्री ने इस ऑपरेशन को तकनीकी युद्ध का उत्कृष्ट उदाहरण करार दिया। उन्होंने बताया कि इस दौरान आकाश तीर, आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस जैसी स्वदेशी उन्नत प्रणालियों सहित कई अत्याधुनिक उपकरणों का प्रभावी उपयोग किया गया — जो पिछले 12 वर्षों में रखी गई नींव का परिणाम है।
रक्षा उत्पादन में ऐतिहासिक उछाल
रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भरता के ठोस परिणाम गिनाए। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में वार्षिक रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है, जबकि 2014 के आसपास यह आँकड़ा मात्र ₹40,000 करोड़ था। यह वृद्धि एक दशक में चार गुने से अधिक है।
रक्षा निर्यात के मोर्चे पर भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है — वित्त वर्ष 2013-14 में ₹686 करोड़ का निर्यात अब बढ़कर ₹38,000 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच चुका है। राजनाथ सिंह ने घोषणा की कि इस वर्ष रक्षा उत्पादन का लक्ष्य ₹2 लाख करोड़ और 2029 तक ₹3 लाख करोड़ को पार करना है। साथ ही रक्षा निर्यात को 2029 तक ₹50,000 करोड़ तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है।
स्वदेशीकरण सूचियाँ और नीतिगत बदलाव
रक्षा बलों द्वारा अब तक 509 मदों वाली पाँच सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियाँ जारी की जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने 5,012 मदों वाली पाँच अलग सूचियाँ भी जारी की हैं। राजनाथ सिंह ने संकेत दिया कि इस लक्ष्य को और गति देने के लिए जल्द ही एक और सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची अधिसूचित की जाएगी।
गौरतलब है कि 2014 से पहले भारत की रक्षा खरीद नीति आयात-केंद्रित थी। राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार ने इस पुरानी सोच को पूरी तरह बदल दिया है और अब घरेलू रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया है — जो घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय, दोनों आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है।
आगे की राह
यह घोषणाएँ ऐसे समय में आई हैं जब ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की रक्षा नीति और स्वदेशी हथियार प्रणालियों पर वैश्विक ध्यान केंद्रित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी प्रणालियों के सफल परिचालन ने भारतीय रक्षा उद्योग के लिए निर्यात के नए द्वार खोले हैं। आने वाले महीनों में नई स्वदेशीकरण सूची और उत्पादन लक्ष्यों की दिशा में सरकार के कदम यह तय करेंगे कि यह गति टिकाऊ है या नहीं।