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डीआरआई ने विशाखापत्तनम के पास ₹8.98 करोड़ का सोना जब्त किया, दो गिरफ्तार; बांग्लादेश तस्करी नेटवर्क का खुलासा

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डीआरआई ने विशाखापत्तनम के पास ₹8.98 करोड़ का सोना जब्त किया, दो गिरफ्तार; बांग्लादेश तस्करी नेटवर्क का खुलासा

सारांश

डीआरआई ने विशाखापत्तनम के पास हाई-स्पीड पीछा कर कार की छिपी जगह से ₹8.98 करोड़ का 24-कैरेट सोना बरामद किया — बांग्लादेश सीमा से कोलकाता होते हैदराबाद जा रहा था। एक ही रात के पूर्वी क्षेत्र अभियान में कुल ₹11.50 करोड़ से अधिक का सोना जब्त, छह गिरफ्तार।

मुख्य बातें

डीआरआई ने 8-9 अक्टूबर 2026 की रात विशाखापत्तनम के पास एक कार से ₹8.98 करोड़ मूल्य का 5,832.90 ग्राम (999 शुद्धता, 24-कैरेट) सोना जब्त किया।
सोना भारत-बांग्लादेश सीमा से तस्करी कर कोलकाता से हैदराबाद ले जाया जा रहा था; कार की सह-यात्री सीट के नीचे बनी छिपी जगह में रखा गया था।
दोनों आरोपी गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे गए; सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत मामला दर्ज।
उसी रात पूर्वी क्षेत्र के व्यापक अभियान में डंकुनी टोल प्लाजा पर ₹10 करोड़ की 50 सोने की ईंटें और मालदा टाउन व न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशनों पर ₹1.5 करोड़ का सोना जब्त।
पूर्वी क्षेत्र के अभियान में कुल लगभग 7.8 किलोग्राम सोना जब्त — बाज़ार मूल्य ₹11.50 करोड़ से अधिक ; कुल छह लोग गिरफ्तार।

राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने 8-9 अक्टूबर 2026 की रात विशाखापत्तनम के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर हाई-स्पीड पीछा करने के बाद एक कार से ₹8.98 करोड़ मूल्य का 5,832.90 ग्राम सोना जब्त किया और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। अधिकारियों के अनुसार, यह सोना भारत-बांग्लादेश सीमा से तस्करी कर कोलकाता से हैदराबाद ले जाया जा रहा था।

मुख्य घटनाक्रम

डीआरआई को खुफिया जानकारी मिली थी कि एक संदिग्ध वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोने की खेप लेकर जा रहा है। अधिकारियों ने कड़ी निगरानी के बाद काफी देर तक पीछा कर उस कार को रोका, जिसमें दो लोग सवार थे।

गहन पूछताछ और तलाशी के दौरान अधिकारियों को सामने वाली सह-यात्री सीट के पास पैरों की जगह के नीचे विशेष रूप से बनाई गई एक छिपी हुई जगह मिली। वहाँ से तीन पैकेट बरामद किए गए, जिनमें 999 शुद्धता वाला 24-कैरेट सोना था, जिसका कुल वजन 5,832.90 ग्राम और बाज़ार मूल्य ₹8.98 करोड़ आँका गया।

गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई

डीआरआई ने सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत बरामद सोने को जब्त कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। उन्हें संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जिन्होंने दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

अधिकारियों के अनुसार, तस्करी का यह सोना भारत-बांग्लादेश सीमा के रास्ते भारत में लाया गया था और इसे हैदराबाद पहुँचाने की योजना थी।

पूर्वी क्षेत्र में व्यापक अभियान

डीआरआई ने रविवार को जारी अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि 8-9 अक्टूबर को खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए पूर्वी क्षेत्र के व्यापक अभियान में कुल लगभग 7.8 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना जब्त किया गया, जिसकी कीमत ₹11.50 करोड़ से अधिक है।

इस अभियान में डंकुनी टोल प्लाजा पर एक चार पहिया वाहन से 50 सोने की ईंटें बरामद की गईं, जिनका वजन लगभग 6.8 किलोग्राम और अनुमानित मूल्य लगभग ₹10 करोड़ था। यह वाहन बनपुर — जो बांग्लादेश सीमा के निकट है — से कोलकाता की ओर जा रहा था और उसमें चार लोग सवार थे।

उसी दिन पश्चिम बंगाल में डीआरआई की टीमों ने मालदा टाउन रेलवे स्टेशन और न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों में सवार यात्रियों को रोककर लगभग 1 किलोग्राम विदेशी सोना ज़ब्त किया, जिसकी कीमत करीब ₹1.5 करोड़ आँकी गई।

तस्करी का नेटवर्क और रूट

जब्ती से यह स्पष्ट हुआ है कि तस्कर सड़क और रेलवे नेटवर्क दोनों का उपयोग कर रहे हैं। डीआरआई के अनुसार, सीमावर्ती क्षेत्रों से सोना पहले कोलकाता तक पहुँचाया जाता है और फिर वहाँ से अन्य महानगरों की ओर भेजा जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश सीमा से सोने की तस्करी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।

गौरतलब है कि डीआरआई ने बताया है कि उसने बांग्लादेश सीमा पार सोने की तस्करी पर अपनी कार्रवाई और तेज़ कर दी है। पूर्वी क्षेत्र के इस संयुक्त अभियान में कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया गया।

आगे की जाँच

डीआरआई इस पूरे नेटवर्क की कड़ियाँ जोड़ने की कोशिश में जुटी है। एजेंसी की यह कार्रवाई संकेत देती है कि बांग्लादेश से भारत में सोने की तस्करी के रूट और तरीकों को लेकर खुफिया जानकारी में सुधार हुआ है। आगामी सप्ताहों में और गिरफ्तारियाँ और जब्तियाँ संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित तंत्र बनाता है। गौरतलब है कि डीआरआई की इस कार्रवाई की सफलता खुफिया तंत्र की बेहतरी का संकेत है, लेकिन असली सवाल यह है कि सीमा पर पहले ही इस सोने को क्यों नहीं रोका जा सका। जब तक सीमा पर निगरानी और तटीय खुफिया तंत्र को एकीकृत नहीं किया जाता, तब तक भीतरी राज्यों में इस तरह की जब्तियाँ नेटवर्क को तोड़ने के बजाय केवल उसकी एक कड़ी को काटती रहेंगी।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआरआई ने विशाखापत्तनम के पास कितना सोना जब्त किया?
डीआरआई ने 8-9 अक्टूबर 2026 की रात विशाखापत्तनम के पास एक कार से 5,832.90 ग्राम (999 शुद्धता, 24-कैरेट) सोना जब्त किया, जिसका बाज़ार मूल्य ₹8.98 करोड़ आँका गया। सोना कार की सह-यात्री सीट के नीचे बनी विशेष छिपी जगह में रखा गया था।
यह सोना कहाँ से और कहाँ ले जाया जा रहा था?
अधिकारियों के अनुसार, यह सोना भारत-बांग्लादेश सीमा के रास्ते तस्करी कर भारत लाया गया था और कोलकाता से हैदराबाद ले जाया जा रहा था। डीआरआई ने बताया कि तस्कर सीमावर्ती क्षेत्रों से सोने के परिवहन के लिए सड़क और रेलवे नेटवर्क दोनों का उपयोग करते हैं।
गिरफ्तार आरोपियों पर क्या कार्रवाई हुई?
दोनों आरोपियों को सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया। उन्हें संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जिन्होंने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
डीआरआई के पूर्वी क्षेत्र अभियान में कुल कितना सोना जब्त हुआ?
8-9 अक्टूबर के पूर्वी क्षेत्र अभियान में डीआरआई ने कुल लगभग 7.8 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना जब्त किया, जिसकी कीमत ₹11.50 करोड़ से अधिक है। इस अभियान में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया — जिनमें डंकुनी टोल प्लाजा से चार और पश्चिम बंगाल के दो रेलवे स्टेशनों से पकड़े गए व्यक्ति शामिल हैं।
बांग्लादेश सीमा से सोने की तस्करी में कौन-से रूट का उपयोग होता है?
डीआरआई के अनुसार, तस्कर सीमावर्ती क्षेत्रों से कोलकाता की ओर सोने के परिवहन के लिए सड़क और रेलवे — दोनों नेटवर्क का उपयोग करते हैं। डंकुनी टोल प्लाजा और मालदा टाउन तथा न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशनों से की गई जब्तियाँ इस बहु-माध्यम नेटवर्क की पुष्टि करती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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