20 अक्टूबर 2026
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दशमी पर कामाख्या मंदिर में उमड़े श्रद्धालु, 51 शक्तिपीठों में सर्वोच्च धाम में दुर्गा पूजा का समापन

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दशमी पर कामाख्या मंदिर में उमड़े श्रद्धालु, 51 शक्तिपीठों में सर्वोच्च धाम में दुर्गा पूजा का समापन

सारांश

दुर्गा पूजा के अंतिम दिन गुवाहाटी के कामाख्या धाम में आस्था का सैलाब उमड़ा। 51 शक्तिपीठों में सर्वोच्च इस धाम पर दशमी पूजा में देश-विदेश से श्रद्धालु पहुँचे और देवी माँ का आशीर्वाद लेकर शांति और समृद्धि की कामना की।

मुख्य बातें

गुवाहाटी के कामाख्या मंदिर में 20 अक्टूबर 2026 को दुर्गा पूजा की दशमी पूजा संपन्न हुई।
कामाख्या धाम 51 शक्तिपीठों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है; नवरात्रि में यहाँ विशेष अनुष्ठान होते हैं।
पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर से आई सुष्मिता सरकार सहित देशभर के श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
गुवाहाटी निवासी जगमोहन सोनी ने धाम का धार्मिक महत्व बताते हुए देश में शांति और समृद्धि की कामना की।
नवरात्रि के दौरान बाहरी राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचने से मंदिर परिसर में भारी भीड़ रही।

गुवाहाटी स्थित प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर में 20 अक्टूबर 2026 को दुर्गा पूजा के अंतिम दिन दशमी पूजा का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवी का आशीर्वाद लेने पहुँचे। नवमी की रस्में पूर्ण होने के पश्चात मंदिर परिसर सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ से भर गया। यह धाम 51 शक्तिपीठों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, जिससे नवरात्रि के दौरान यहाँ का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

दशमी पूजा और उत्सव का माहौल

नवरात्रि के नौ दिनों तक विशेष अनुष्ठान, जाप और पूजा-पाठ का क्रम जारी रहने के बाद दशमी के दिन मंदिर में श्रद्धा का ज्वार चरम पर था। देश के विभिन्न कोनों से आए भक्तों ने मंदिर के पट खुलते ही दर्शन की कतार में स्थान ले लिया। मंदिर प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की थी, जिसे श्रद्धालुओं ने सराहा।

कामाख्या धाम का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कामाख्या धाम वह पवित्र स्थल है जहाँ देवी सती के शरीर का जननी अंग गिरा था, इसी कारण इसे 'जगत जननी' के नाम से भी जाना जाता है। नीलाचल पर्वत पर स्थित यह नवदुर्गा का मंदिर असम की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक है। नवरात्रि के अवसर पर यहाँ बाहरी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

श्रद्धालुओं की अनुभव-कथाएँ

पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर से आई श्रद्धालु सुष्मिता सरकार ने दर्शन के बाद कहा, 'यहाँ आने पर मन एकदम शांत और प्रसन्न हो जाता है, ऐसा अनुभव कहीं और नहीं मिलता। बहुत अच्छा लगता है। सभी को यहाँ आना चाहिए।' एक अन्य श्रद्धालु ने व्यवस्था की तारीफ करते हुए कहा, 'यहाँ आने और दर्शन करने की व्यवस्था बहुत अच्छी है। यहाँ आकर बहुत शांति मिलती है। माँ कामाख्या के दर्शन करके मन पवित्र हो गया।'

गुवाहाटी निवासी श्रद्धालु जगमोहन सोनी ने धाम का महत्व समझाते हुए कहा, 'कामाख्या धाम 51 शक्तिपीठों में सबसे महत्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि यहाँ माँ का जननी स्थान गिरा था। यह पर्वत पर स्थित नवदुर्गा का मंदिर है, इसलिए नवरात्रि में इसका महत्व बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है।' उन्होंने आगे कहा, 'मैं यही कामना करता हूँ कि हे माँ, हमारे राज्य, हमारे देश और संपूर्ण भारतवर्ष में सुख, संपत्ति, शांति और समृद्धि बनाए रखें। किसी तरह की अराजकता न फैले और सभी लोग मिलजुल कर रहें।'

आम जनता पर असर

दुर्गा पूजा के अवसर पर असम और पड़ोसी राज्यों से बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं के आगमन से गुवाहाटी में यातायात और आवास पर भी दबाव देखा गया। स्थानीय व्यापारियों और पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए यह पर्व आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा। मंदिर प्रशासन के अनुसार इस वर्ष नवरात्रि के दौरान दर्शनार्थियों की संख्या उल्लेखनीय रही।

आगे क्या

दशमी के पश्चात दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन पारंपरिक धूमधाम के साथ संपन्न होगा और भक्त अगले वर्ष की नवरात्रि की प्रतीक्षा में रहेंगे। कामाख्या धाम में वर्ष भर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन नवरात्रि का यह उत्सव धाम को विशेष ऊर्जा और उमंग से भर देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसे में असम से बंगाल तक के श्रद्धालुओं का एक ही मंच पर एकत्रित होना सांस्कृतिक एकजुटता का प्रतीक बनता है। कामाख्या धाम का बढ़ता तीर्थाटन स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण है, जिस पर नीति-निर्माताओं का ध्यान जाना चाहिए।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कामाख्या मंदिर 51 शक्तिपीठों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कामाख्या मंदिर वह स्थान है जहाँ देवी सती के शरीर का जननी अंग गिरा था, इसीलिए इसे 'जगत जननी' कहा जाता है। 51 शक्तिपीठों में यह सर्वोच्च स्थान रखता है और नवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष धार्मिक महत्व होता है।
दुर्गा पूजा दशमी पर कामाख्या मंदिर में क्या हुआ?
20 अक्टूबर 2026 को नवमी की रस्में पूरी होने के बाद कामाख्या मंदिर में दशमी पूजा का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश के विभिन्न हिस्सों से पहुँचे और देवी कामाख्या का आशीर्वाद लिया।
नवरात्रि के दौरान कामाख्या धाम में कैसे अनुष्ठान होते हैं?
नवरात्रि के नौ दिनों तक कामाख्या धाम में विशेष अनुष्ठान, जाप और पूजा-पाठ का आयोजन होता है। इस दौरान असम के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं, जिससे मंदिर परिसर में भारी भीड़ रहती है।
कामाख्या मंदिर कहाँ स्थित है और इसे कैसे पहुँचें?
कामाख्या मंदिर असम की राजधानी गुवाहाटी में नीलाचल पर्वत पर स्थित है। गुवाहाटी रेलवे स्टेशन और लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से मंदिर आसानी से पहुँचा जा सकता है।
क्या कामाख्या मंदिर में दर्शन व्यवस्था सुचारु है?
दशमी पर आए श्रद्धालुओं ने मंदिर की दर्शन व्यवस्था को सराहा। एक श्रद्धालु के अनुसार, 'यहाँ आने और दर्शन करने की व्यवस्था बहुत अच्छी है।' नवरात्रि के दौरान भीड़ प्रबंधन के लिए मंदिर प्रशासन विशेष इंतजाम करता है।
राष्ट्र प्रेस
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