मां दूनागिरी मंदिर: कुमाऊं का दूसरा सबसे बड़ा वैष्णवी शक्तिपीठ, जानें पौराणिक महत्व
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के द्वारहाट क्षेत्र में ऊँची पहाड़ी पर विराजमान मां दूनागिरी मंदिर आस्था, अध्यात्म और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्वितीय संगम है। यह पवित्र धाम 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और कुमाऊं क्षेत्र का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण वैष्णवी शक्तिपीठ है। माँ आदिशक्ति भगवती को समर्पित यह मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
मंदिर की स्थिति और स्वरूप
मां दूनागिरी मंदिर तक पहुँचने के लिए भक्तों को लगभग 500 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन और पूर्ण आस्था से माँ के दर्शन करते हैं, उनकी हर मनोकामना पूरी होती है। मंदिर परिसर में मां दुर्गा के वैष्णवी स्वरूप — मां दूनागिरी देवी की पिंडी रूप में पूजा-अर्चना की जाती है। यह मंदिर धार्मिक महत्व के साथ-साथ अपनी अनुपम प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है।
पौराणिक कथा और ऐतिहासिक संदर्भ
इस मंदिर का संबंध रामायण और महाभारत काल से जोड़ा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब हनुमान जी लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लाने हेतु द्रोणागिरी पर्वत को उठाकर ले जा रहे थे, तब उस पर्वत का एक हिस्सा यहाँ गिरा था। इसी कारण इस स्थान को दिव्य और पवित्र माना जाता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार, पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य ने भी इस स्थान पर तपस्या की थी, जिससे इस क्षेत्र की आध्यात्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है।
अनूठी परंपरा: साबुत नारियल का प्रसाद
मां दूनागिरी मंदिर की एक विशेष और दुर्लभ परंपरा इसे अन्य देवी मंदिरों से अलग करती है। भारत के अधिकांश देवी मंदिरों में नारियल फोड़ने की प्रथा प्रचलित है, किंतु इस मंदिर में ऐसा नहीं किया जाता। यहाँ चढ़ाया गया सूखा नारियल तोड़ा नहीं जाता, बल्कि श्रद्धालुओं को साबुत वापस लौटा दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, मंदिर परिसर में निरंतर भंडारे का आयोजन होता रहता है, जिससे दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं को प्रसाद मिलता है।
मुख्यमंत्री धामी की अपील
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए मंदिर की भव्यता का वर्णन किया। उन्होंने लिखा, 'अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट इलाके में मौजूद मां दूनागिरी मंदिर आस्था, अध्यात्म और प्राकृतिक सुंदरता का एक दिव्य संगम है। मां आदिशक्ति भगवती को समर्पित यह पवित्र धाम अनगिनत भक्तों की श्रद्धा का केंद्र है।' धामी ने लोगों से अपील की कि अल्मोड़ा जिले की यात्रा पर आने पर इस दिव्य मंदिर के दर्शन अवश्य करें।
नवरात्रि और विशेष आयोजन
नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दूनागिरी मंदिर में विशेष पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस दौरान देश के कोने-कोने से श्रद्धालु माँ के दर्शन के लिए उमड़ पड़ते हैं। मंदिर की पहाड़ी से दिखने वाला प्राकृतिक दृश्य भी यात्रियों को विशेष रूप से आकर्षित करता है। यह स्थान धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न हिस्सा बनता जा रहा है।