चुनाव आयोग का विशेष मतदाता नामांकन अभियान: छूटे हुए युवा व पहली बार वोट देने वालों को जोड़ने के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने 2 अक्टूबर 2026 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को एक विशेष मतदाता नामांकन अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची से छूटे हुए पहली बार वोट देने वाले और युवा मतदाताओं को नामांकित करना है। यह निर्देश आयोग के 29 सितंबर 2026 के पत्र और 1 अक्टूबर को सभी सीईओ के साथ हुई बैठक के बाद जारी किए गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
आयोग ने स्पष्ट किया कि समेकित मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान प्रत्येक बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और डुप्लिकेट श्रेणी के मतदाताओं की एक सूची तैयार की थी। इस सूची को पंचायत भवनों, शहरी स्थानीय निकाय कार्यालयों के नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित किया गया और बूथ लेवल एजेंटों (BLA) तथा राजनीतिक दलों के साथ साझा किया गया।
इसके बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की गई और दावों व आपत्तियों के निस्तारण के बाद इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) द्वारा अंतिम मतदाता सूची जारी की गई। आयोग ने रेखांकित किया कि अंतिम सूची में SIR-पूर्व सूची की तुलना में नाम जोड़ने व हटाने — दोनों — की जानकारी दर्ज है।
विशेष अभियान की कार्यप्रणाली
इस अभियान के तहत बीएलओ को निर्देश दिया गया है कि वे मौजूदा मतदाता सूची की तुलना SIR-पूर्व सूची से करें और उन मतदाताओं की सूची तैयार करें जिनके नाम पुरानी सूची में थे लेकिन वर्तमान सूची में नहीं हैं। बीएलओ घर-घर जाकर इन मतदाताओं की मौजूदा स्थिति की जाँच करेंगे और जो पात्र पाए जाएंगे, उनके फॉर्म 6 के माध्यम से नामांकन में सहायता करेंगे।
आयोग ने निर्धारित किया है कि प्रत्येक बीएलओ हर सप्ताह कम से कम 20-25 मतदाताओं को कवर करे ताकि यह प्रक्रिया लगभग एक महीने में पूरी हो सके। बीएलओ द्वारा तैयार सूची, भरे हुए फॉर्म 6 आवेदन और फील्ड सत्यापन रिपोर्ट संबंधित ईआरओ को सौंपी जाएगी। इसके बाद ईआरओ इन मामलों की जाँच कर 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' और 'मतदाता पंजीकरण नियम, 1960' के प्रावधानों के अनुसार उचित कार्रवाई करेंगे।
हाशिए पर रहने वालों के लिए विशेष प्रावधान
आयोग ने विशेष रूप से नाइट शेल्टर और लेबर कॉलोनी में रहने वाले, बेघर और हाशिए पर रहने वाले नागरिकों के लिए अलग शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त, बूथ लेवल कैंप आयोजित करने का भी निर्देश दिया गया है ताकि नामांकन आवेदन जमा करने की प्रक्रिया सरल और सुलभ हो।
गौरतलब है कि यह प्रावधान उन वर्गों को लक्षित करता है जो प्रशासनिक जटिलताओं के कारण ऐतिहासिक रूप से मतदाता सूचियों से बाहर रह जाते हैं।
जागरूकता और निगरानी का ढाँचा
सीईओ, जिला चुनाव अधिकारियों (DEO) और ईआरओ को निर्देश दिया गया है कि वे शिक्षण संस्थानों, स्थानीय आउटरीच कार्यक्रमों, SVEEP (Systematic Voters' Education and Electoral Participation) गतिविधियों तथा नियमित प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से जागरूकता फैलाएँ। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता नामांकन एक सतत प्रक्रिया है और जो नागरिक अभी तक नामांकित नहीं हुए हैं या जिनके नाम सूची से हटाए गए हैं, वे किसी भी समय नामांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इस विशेष अभियान की प्रगति की नियमित समीक्षा सीईओ, डीईओ और ईआरओ के स्तर पर की जाएगी। प्रक्रिया पूरी होने पर बूथ-वार सूची राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ साझा की जाएगी, जिससे उन्हें छूटे हुए पात्र मतदाताओं की पहचान करने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में चुनावी गतिविधियाँ सक्रिय हो रही हैं। आयोग का जोर इस बात पर है कि हर योग्य नागरिक को मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का अवसर मिले — विशेषकर वे युवा मतदाता जो पहली बार मतदान के योग्य हुए हैं। अभियान की समयसीमा लगभग एक महीने निर्धारित की गई है और इसके परिणाम की रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंपी जाएगी।