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चुनाव आयोग का विशेष अभियान: एसआईआर में छूटे और नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाएंगे

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चुनाव आयोग का विशेष अभियान: एसआईआर में छूटे और नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाएंगे

सारांश

भारत निर्वाचन आयोग ने एसआईआर में छूटे और नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए तत्काल विशेष अभियान का आदेश दिया है। 20 राज्यों में एसआईआर पूरी हो चुकी है और सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2026 को इस प्रक्रिया को वैध ठहराया है। गोवा में 97 में से 81 छूटे मतदाताओं ने फॉर्म-6 भरा।

मुख्य बातें

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने एसआईआर (SIR) में छूटे और नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष पंजीकरण अभियान का निर्देश दिया।
बिहार, पश्चिम बंगाल सहित 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी; तीसरे चरण के 12 राज्यों में अंतिम सूची अभी प्रकाशित होनी है।
सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2026 के आदेश में एसआईआर प्रक्रिया को बरकरार रखा।
गोवा में 97 छूटे मतदाताओं में से 81 ने नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 भरा।
आयोग ने आंतरिक कार्य आवंटन विवाद पर हलफनामे में स्पष्ट किया कि IT विभाग की ज़िम्मेदारी उप निर्वाचन आयुक्त से वापस नहीं ली गई थी।
यह प्रेस नोट 26 सितंबर 2026 की पूर्ण आयोग बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर जारी।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 5 नवंबर 2026 को निर्देश जारी किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से छूट गए नागरिकों और नए मतदाताओं के नाम शामिल करने के लिए तत्काल विशेष पंजीकरण अभियान चलाया जाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि युवा और पहली बार मतदान करने वाले नागरिक भी संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) के पास आवेदन कर सकते हैं।

अभियान की पृष्ठभूमि और दायरा

आयोग के अनुसार, अब तक बिहार और पश्चिम बंगाल सहित 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। तीसरे चरण के शेष 12 राज्यों में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद ही मतदाताओं की कुल संख्या का अंतिम आँकड़ा सामने आएगा। आयोग ने सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO), जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और ERO को छूटे हुए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए विशेष अभियान तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

एसआईआर का इतिहास और सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी

गौरतलब है कि देशभर में एसआईआर कराने का निर्णय आयोग ने सर्वसम्मति से लिया था। बिहार से शुरू होकर पश्चिम बंगाल और अन्य 30 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर का आदेश 24 जून 2025 को सर्वसम्मति से जारी किया गया था। 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एसआईआर कार्यक्रम 27 अक्टूबर 2025 को और 19 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 14 मई 2026 को जारी किया गया। आयोग ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2026 के अपने आदेश के ज़रिये इस फैसले को बरकरार रखा है।

गोवा में छूटे मतदाताओं पर विशेष कार्रवाई

गोवा में छूटे हुए मतदाताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLO) को घर-घर जाकर ऐसे मतदाताओं से संपर्क करने और उनके फॉर्म एकत्र करने का निर्देश दिया है। कुल 97 छूटे हुए मतदाताओं में से 81 ने नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 पहले ही भर दिया है।

आंतरिक विवाद पर आयोग का स्पष्टीकरण

आयोग ने अपने हलफनामे में आंतरिक कार्य आवंटन और एक अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों पर भी स्पष्टीकरण दिया। आयोग के अनुसार, कैबिनेट सचिव को लिखा गया पत्र किसी नीतिगत मामले से नहीं, बल्कि निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था। आयोग ने बताया कि संबंधित अधिकारी द्वारा जारी कार्य पुनर्वितरण के आदेश दोनों निर्वाचन आयुक्तों के निर्देश पर लागू नहीं किए गए, और आईटी विभाग की निगरानी की जिम्मेदारी उप निर्वाचन आयुक्त से वास्तव में कभी वापस नहीं ली गई।

आगे क्या होगा

यह प्रेस नोट 26 सितंबर 2026 को हुई पूर्ण आयोग की बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार जारी किया गया है और इसे पूर्ण आयोग की मंजूरी प्राप्त है। तीसरे चरण के 12 राज्यों में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद देशभर में पंजीकृत मतदाताओं की सटीक संख्या स्पष्ट होगी, जो लोकतांत्रिक भागीदारी के व्यापक स्तर को परिभाषित करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि पहली बार में इतने मतदाता एसआईआर की प्रक्रिया में क्यों छूट गए। गोवा का उदाहरण — 97 में से 97 छूटे मतदाताओं को बाद में ढूँढना पड़ा — एक बड़ी प्रणालीगत चूक की ओर इशारा करता है। आयोग के भीतर आंतरिक विवाद और हलफनामे की ज़रूरत यह दर्शाती है कि संस्थागत एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं, जिसे सर्वोच्च न्यायालय की मंजूरी महज़ आंशिक रूप से संबोधित करती है। मतदाता सूची की विश्वसनीयता लोकतंत्र की नींव है — और इस नींव में आई दरारें बंद करने के लिए अभियान काफी नहीं, जवाबदेही ज़रूरी है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (SIR) में छूटे मतदाता अपना नाम कैसे जुड़वाएँ?
एसआईआर के दौरान या उसके बाद मतदाता सूची से छूटे नागरिक संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) के पास आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए फॉर्म-6 भरना होगा और बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर सहायता भी प्रदान करेंगे।
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) क्या है और यह क्यों कराया जा रहा है?
एसआईआर मतदाता सूची को अद्यतन और सटीक बनाने की एक विशेष प्रक्रिया है, जिसके तहत सभी मतदाताओं का पुनर्सत्यापन किया जाता है। भारत निर्वाचन आयोग ने 24 जून 2025 को सर्वसम्मति से यह प्रक्रिया सभी 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कराने का आदेश दिया था।
अब तक कितने राज्यों में एसआईआर पूरी हो चुकी है?
चुनाव आयोग के अनुसार, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। तीसरे चरण के शेष 12 राज्यों में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद देश में कुल मतदाताओं का अंतिम आँकड़ा सामने आएगा।
सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर प्रक्रिया पर क्या कहा है?
सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मई 2026 के अपने आदेश के ज़रिये एसआईआर प्रक्रिया को बरकरार रखा है। यह आदेश आयोग के उस फैसले की न्यायिक पुष्टि है, जिसे 24 जून 2025 को सर्वसम्मति से लिया गया था।
चुनाव आयोग के आंतरिक विवाद का एसआईआर से क्या संबंध है?
आयोग ने अपने हलफनामे में स्पष्ट किया कि कैबिनेट सचिव को लिखा गया पत्र किसी नीतिगत या आईटी विभाग के मामले से नहीं, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था। आयोग के अनुसार, एसआईआर कराने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था और इस पर पूरे आयोग की सहमति है।
राष्ट्र प्रेस
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