गोवा में एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी रही: सीईओ डॉ. संजय गोयल, 97 छूटे मतदाताओं का घर-घर सर्वे कर जोड़े नाम
सारांश
मुख्य बातें
गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) डॉ. संजय गोयल ने 25 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संपन्न की गई। उन्होंने बताया कि प्रत्येक चरण में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें आयोजित की गईं और संबंधित सूचियाँ मतदान केंद्रों पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की गईं।
एसआईआर प्रक्रिया का विवरण
डॉ. गोयल के अनुसार, एसआईआर के दौरान एएसडीडी और तार्किक विसंगतियों (लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी) से संबंधित सूचियाँ मतदान केंद्रों पर चस्पा की गई थीं, ताकि संबंधित मतदाता और अन्य हितधारक इसकी जानकारी प्राप्त कर सकें। उन्होंने यह भी बताया कि अंतिम मतदाता सूची जारी हुए सात महीने से अधिक का समय बीत चुका है और इस अवधि में प्राप्त सभी अपीलों का निपटारा भी कर दिया गया है।
97 छूटे मतदाताओं का घर-घर सर्वे
गोवा सीईओ कार्यालय के अनुसार, फरवरी 2026 में प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 97 मतदाता शामिल नहीं हो पाए थे। ये वे मतदाता थे जिन्हें निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) ने योग्य पाया था, किंतु एक तकनीकी कारण से उनके नाम अंतिम सूची में दर्ज नहीं हो सके। डॉ. गोयल ने बताया कि बाद में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने इन 97 मामलों में घर-घर जाकर जाँच की, पात्र पाए गए व्यक्तियों से फॉर्म-6 भरवाया गया और प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद उनके नाम मतदाता सूची में विधिवत जोड़े गए।
तकनीकी समस्या की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब सामने आया था कि सॉफ्टवेयर में तकनीकी खामी के कारण पहले किए जा चुके डिलीशन को वापस लेने की सुविधा उपलब्ध नहीं थी, जिससे 97 योग्य मतदाताओं के नाम अंतिम सूची से बाहर रह गए। गौरतलब है कि गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने से पूर्व इस तकनीकी समस्या के समाधान के लिए कई बार पत्राचार भी किया गया था।
अपील और फॉर्म-6 की व्यवस्था
डॉ. गोयल ने स्पष्ट किया कि योग्य मतदाताओं के लिए फॉर्म-6 भरकर मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की व्यवस्था अब भी उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत अपील करने का विकल्प भी मौजूद है।
राजनीतिक दलों की भागीदारी
सीईओ ने जोर देकर कहा कि एसआईआर के सभी प्रमुख चरणों में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया और उन्हें आवश्यक जानकारी समय पर दी गई। इससे प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई। आगे भी निर्वाचन आयोग की तय प्रक्रिया के तहत पात्र मतदाताओं को सूची में जोड़ने का कार्य जारी रहेगा।