चुनाव आयोग का एसआईआर पर बड़ा स्पष्टीकरण: पुराने मतदाता बिना किसी कानूनी डर के जमा करें फॉर्म-6
सारांश
मुख्य बातें
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 3 नवंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में जिन पुराने मतदाताओं के नाम नहीं हैं, वे बिना किसी कानूनी आशंका के अपना नाम जोड़ने हेतु फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि ऐसा करने पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत किसी भी मतदाता के विरुद्ध अभियोजन या कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।
मुख्य घटनाक्रम
आयोग ने यह स्पष्टीकरण सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे गए एक पत्र के ज़रिए दिया। पत्र में बताया गया कि पहले से पंजीकृत कई मतदाता फॉर्म-6 जमा करने में इसलिए हिचकिचा रहे हैं, क्योंकि उसमें दी जाने वाली घोषणा यह दर्शाती है कि उनका नाम पहली बार मतदाता सूची में शामिल किया जा रहा है।
आयोग ने इस भ्रम को दूर करते हुए कहा कि फॉर्म-6 में दी जाने वाली यह घोषणा 1 अगस्त 2022 से प्रभावी है और इसका उद्देश्य केवल अंतिम मतदाता सूची में नाम सम्मिलित कराना है — न कि पहले से मौजूद पंजीकरण को नकारना।
दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का आधार
यह स्पष्टीकरण दिल्ली उच्च न्यायालय के 14 अक्टूबर 2026 के उस फैसले के अनुरूप है, जो 'निलोतपल दत्ता और अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग और अन्य' मामले में दिया गया था। उस मामले में एक आवेदक ने तर्क दिया था कि पहले से पंजीकृत मतदाता के रूप में फॉर्म-6 जमा करना एक 'गलत घोषणा' के समान होगा।
उच्च न्यायालय ने इस आशंका को निराधार ठहराते हुए रिट कार्यवाही बंद कर दी और कहा कि याचिकाकर्ता चाहें तो फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं, जिस पर कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। आयोग ने इसी न्यायिक टिप्पणी को अपने निर्देश का आधार बनाया है।
किसे मिलेगी कानूनी सुरक्षा
आयोग ने निर्देश दिया है कि कोई भी चुनाव पंजीकरण अधिकारी किसी मतदाता के विरुद्ध केवल इस आधार पर धारा 31 के तहत कार्रवाई शुरू नहीं करेगा कि वह पहले की मतदाता सूची में शामिल था और उसने एसआईआर के दौरान या उसके बाद फॉर्म-6 जमा किया। यह सुरक्षा दो शर्तों के साथ मिलेगी — मतदाता किसी अन्य संसदीय या विधानसभा क्षेत्र में पहले से पंजीकृत न हो और घोषणापत्र कानून के अनुरूप हो।
व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश
मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे इस स्पष्टीकरण को स्थानीय भाषाओं और उपलब्ध मीडिया माध्यमों के ज़रिए जनहित में व्यापक रूप से प्रसारित करें। गौरतलब है कि यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब एसआईआर को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने नाम हटाए जाने और पुनः पंजीकरण प्रक्रिया पर गंभीर चिंताएँ जताई हैं।
आम मतदाताओं पर असर
यह स्पष्टीकरण उन लाखों पुराने मतदाताओं के लिए राहत लेकर आया है जिनके नाम प्रारूप सूची से छूट गए हैं और जो दोबारा पंजीकरण की प्रक्रिया को लेकर आशंकित थे। आयोग के इस कदम से उन्हें अब निःसंकोच आवेदन करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जिससे मतदाता सूची में वैध नामों की पुनर्स्थापना सुनिश्चित हो सकेगी। आने वाले दिनों में इस निर्देश के क्रियान्वयन पर सभी की नज़र रहेगी।