दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: एसआईआर में नाम कटने पर फॉर्म-6 से होगा नया पंजीकरण, ईसीआई की प्रक्रिया बरकरार
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 14 अक्टूबर 2026 को दिए अपने फैसले में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की मौजूदा मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया को सही ठहराते हुए स्पष्ट किया कि विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटने वाले व्यक्ति को फॉर्म-6 के जरिए नए सिरे से पंजीकरण कराना होगा। न्यायालय ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें पते में बदलाव के लिए फॉर्म-8 के उपयोग की अनुमति माँगी गई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता निलोत्पल दत्त सहित अन्य लोग घर बदलने के कारण एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज नहीं करा पाए। उनका पुराना पता छूट जाने की वजह से उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। इन याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि ECI उनके मौजूदा मतदाता रिकॉर्ड को फॉर्म-8 के जरिए नए पते पर स्थानांतरित करे, जिससे उन्हें नए मतदाता के रूप में दोबारा पंजीकरण न कराना पड़े।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के तहत उनके मौजूदा मतदाता अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए और उन्हें फॉर्म-6 भरने पर झूठी घोषणा के आरोप का सामना करना पड़ सकता है।
न्यायालय का निर्णय
जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस अदिति चौधरी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं की दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि ECI के वकील की ओर से दिया गया सुझाव और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के निर्देश पर्याप्त हैं। अदालत ने अपने फैसले में कहा, 'दोनों पक्षों के वकीलों को सुनने के बाद, हमारी राय है कि जब ईसीआई के वकील की ओर से यह सुझाव दिया जा रहा है और वह भी इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर के निर्देशों के अनुसार, तो याचिकाकर्ता नंबर 1 की यह आशंका कि उन पर गलत घोषणा करने का आरोप लग सकता है, बेबुनियाद है।'
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता फॉर्म-6 भरते हैं, तो उन पर झूठी घोषणा का कोई आरोप नहीं लगाया जाएगा। ECI के इस आश्वासन को अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया।
फॉर्म-6 और फॉर्म-8 में अंतर
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, फॉर्म-6 नए मतदाता के रूप में पहली बार पंजीकरण कराने के लिए होता है, जबकि फॉर्म-8 का उपयोग मतदाता सूची में दर्ज पते या अन्य विवरणों में सुधार के लिए किया जाता है। ECI के वकील संजय वशिष्ठ ने अदालत को बताया कि निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 25(2) और नियम 13(1)(ए) के तहत फॉर्म-6 भरकर याचिकाकर्ता अपनी समस्या का समाधान कर सकते हैं।
वशिष्ठ ने यह भी बताया कि सुनवाई की पिछली तारीख पर भी उन्होंने याचिकाकर्ताओं से फॉर्म भरने का अनुरोध किया था और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) की ओर से सहयोग का भरोसा भी दिलाया था, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने ऐसा न करने का निर्णय लिया।
आम मतदाताओं पर असर
यह फैसला उन सभी मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित करता है जो घर बदलने के कारण एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज नहीं करा पाते। ऐसे मतदाताओं को अब नए मतदाता की तरह फॉर्म-6 भरना होगा, न कि केवल पते में बदलाव के लिए फॉर्म-8। गौरतलब है कि इस प्रकार के मामले देशभर में आम हैं, खासकर बड़े शहरों में जहाँ लोग अक्सर किराये के मकान बदलते रहते हैं।
अदालत ने अपना निर्देश देते हुए कहा, 'इन टिप्पणियों के साथ, रिट कार्यवाही समाप्त की जाती है। यदि याचिकाकर्ता चाहें, तो वे फॉर्म-6 भर सकते हैं, जिस पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।' यह फैसला मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में स्पष्टता लाने की दिशा में एक अहम कदम है।