क्या एसआईआर दूसरे चरण में 12 राज्यों में लगभग 100 प्रतिशत गणना फॉर्म वितरित हुए?

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क्या एसआईआर दूसरे चरण में 12 राज्यों में लगभग 100 प्रतिशत गणना फॉर्म वितरित हुए?

सारांश

देश भर में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) चल रहा है। निर्वाचन आयोग ने 12 राज्यों में ईएफ वितरण में अभूतपूर्व प्रगति की है। क्या यह प्रक्रिया लोकतंत्र को मजबूती देगी?

मुख्य बातें

12 राज्यों में लगभग 100 प्रतिशत ईएफ वितरण हुआ है।
डिजिटलीकरण की दर 63.23 प्रतिशत है।
उत्तर प्रदेश में 99.66 प्रतिशत ईएफ वितरित किए गए हैं।
गोवा और लक्षद्वीप में 100 प्रतिशत वितरण हुआ है।
चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील की है।

नई दिल्ली, 26 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के बाद, अब भारत के 12 राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का कार्य चल रहा है। इस प्रक्रिया के तहत, निर्वाचन आयोग की टीम मतदाताओं के घर-घर जाकर गणना फॉर्म (ईएफ) वितरित कर रही है।

इस संदर्भ में, भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बुधवार को एसआईआर 2025 के दूसरे चरण में महत्वपूर्ण प्रगति की जानकारी दी है।

ईसीआई ने बताया कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 99.25 प्रतिशत गणना फॉर्म (ईएफ) पहले ही वितरित किए जा चुके हैं।

भारतीय निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर ईएफ वितरण 99.25 प्रतिशत तक पहुँच गया है।

4 नवंबर से 4 दिसंबर तक चलने वाले गणना चरण के दौरान, योग्य 50.97 करोड़ मतदाताओं में से कुल 50.59 करोड़ ईएफ वितरित किए जा चुके हैं।

ईएफ का डिजिटलीकरण भी तेजी से हो रहा है। अब तक 32.23 करोड़ फॉर्म डिजिटल किए जा चुके हैं, जिससे कुल डिजिटलीकरण दर 63.23 प्रतिशत हो गई है।

गोवा और लक्षद्वीप में ईएफ का पूर्णतः 100 प्रतिशत वितरण दर्ज किया गया है। इसके बाद अंडमान और निकोबार में 99.98 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 99.86 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 99.78 प्रतिशत और गुजरात में 99.75 प्रतिशत वितरण हुआ है।

मतदाता संख्या के हिसाब से सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश ने 15.39 करोड़ से अधिक मतदाताओं को कवर करते हुए 99.66 प्रतिशत ईएफ वितरण हासिल किया है।

पुडुचेरी (96.32 प्रतिशत), केरल (97.72 प्रतिशत ईएफ वितरण के साथ), और तमिलनाडु (97.04 प्रतिशत) अन्य शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल हैं।

पश्चिम बंगाल में 7.64 करोड़ मतदाताओं या 99.78 प्रतिशत ईएफ वितरित किए जा चुके हैं।

चुनाव आयोग के एक बयान में कहा गया है कि राज्य में 78.42 प्रतिशत ईएफ का डिजिटलीकरण किया जा चुका है।

डिजिटलीकरण के मामले में, लक्षद्वीप 99.91 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है। उसके बाद गोवा 86.77 प्रतिशत और राजस्थान 82.61 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर हैं।

उत्तर प्रदेश में ईएफ का सबसे धीमा डिजिटलीकरण 41.44 प्रतिशत दर्ज किया गया है, उसके बाद केरल (46.41 प्रतिशत) का स्थान है।

चुनाव आयोग ने कहा कि मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से सत्यापन और डिजिटलीकरण में तेजी लाने के लिए अधिक बूथ स्तरीय एजेंट नियुक्त करने का आग्रह किया गया है।

चुनाव आयोग ने एक बयान में कहा कि राजस्थान के आंकड़ों में अंता विधानसभा क्षेत्र शामिल नहीं है, जहां उपचुनाव के कारण संशोधन स्थगित कर दिया गया था।

जैसे-जैसे संशोधन प्रक्रिया 4 दिसंबर की समय-सीमा की ओर बढ़ेगी, चुनाव आयोग निर्धारित बुलेटिन जारी करता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कहना उचित है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सुनिश्चित करता है कि हर नागरिक की आवाज सुनी जाए।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणना फॉर्म (ईएफ) क्या हैं?
गणना फॉर्म (ईएफ) वे फॉर्म हैं जिन्हें मतदाताओं की जानकारी इकट्ठा करने के लिए वितरित किया जाता है।
यह प्रक्रिया कब तक चलेगी?
यह गणना चरण 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक चलेगा।
डिजिटलीकरण की प्रगति क्या है?
अब तक 32.23 करोड़ फॉर्म डिजिटल किए जा चुके हैं, जिससे डिजिटलीकरण दर 63.23 प्रतिशत हो गई है।
क्या सभी राज्यों में समान प्रगति है?
नहीं, विभिन्न राज्यों में ईएफ का वितरण अलग-अलग प्रतिशत पर हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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