क्या एसआईआर फेज-टू में 12 राज्यों में 99.65 प्रतिशत गणना प्रपत्र वितरित हो गए हैं?

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क्या एसआईआर फेज-टू में 12 राज्यों में 99.65 प्रतिशत गणना प्रपत्र वितरित हो गए हैं?

सारांश

भारत निर्वाचन आयोग ने एसआईआर 2025 के दूसरे चरण में 12 राज्यों में 99.65 प्रतिशत गणना प्रपत्र वितरित करने की सूचना दी है। डिजिटलीकरण दर भी 84.30 प्रतिशत तक पहुंच गई है। जानिए इस प्रक्रिया में क्या प्रगति हुई है और किस राज्य ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है।

मुख्य बातें

99.65 प्रतिशत गणना प्रपत्र वितरित किए गए हैं।
डिजिटलीकरण की दर 84.30 प्रतिशत हो गई है।
गोवा और लक्षद्वीप में 100 प्रतिशत वितरण हुआ है।
उत्तर प्रदेश में 99.78 प्रतिशत वितरण हासिल किया गया है।
मतदाता पहचान पत्रों का डिजिटलीकरण 92.15 प्रतिशत है।

नई दिल्ली, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के बाद अब देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जारी है। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने रविवार को एसआईआर 2025 के दूसरे चरण में उल्लेखनीय प्रगति की सूचना दी। ईसीआई ने बताया कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 99.65 प्रतिशत गणना प्रपत्र (ईएफ) पहले ही वितरित किए जा चुके हैं।

दैनिक बुलेटिन के अनुसार राष्ट्रव्यापी ईएफ वितरण 99.65 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

एसआईआर के दूसरे चरण के दौरान अब तक पात्र 50.97 करोड़ मतदाताओं में से कुल 50.79 करोड़ ईएफ पहले ही वितरित किए जा चुके हैं।

ईएफ का डिजिटलीकरण भी तेजी से बढ़ रहा है। अब तक 42.96 करोड़ फॉर्म डिजिटल किए जा चुके हैं, जिससे कुल डिजिटलीकरण दर 84.30 प्रतिशत हो गई है।

गोवा और लक्षद्वीप में ईएफ का पूर्णतः 100 प्रतिशत वितरण दर्ज किया गया है, इसके बाद अंडमान और निकोबार में 99.99 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 99.91 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 99.89 प्रतिशत, राजस्थान में 99.85 प्रतिशत और गुजरात में 99.83 प्रतिशत वितरण हुआ है।

मतदाताओं की संख्या के हिसाब से सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश, 15.40 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं को कवर करते हुए 99.78 प्रतिशत ईएफ वितरण हासिल कर चुका है।

केरल में 98.67 प्रतिशत, तमिलनाडु में 99.85 प्रतिशत और पुडुचेरी में 99.25 प्रतिशत वितरण सबसे कम रहा है।

पश्चिम बंगाल में 7.65 करोड़ मतदाताओं यानी 99.89 प्रतिशत मतदाता पहचान पत्र वितरित किए जा चुके हैं। चुनाव आयोग के एक बयान में कहा गया है कि राज्य में 92.15 प्रतिशत मतदाता पहचान पत्र डिजिटल कर दिए गए हैं।

डिजिटलीकरण के मामले में, लक्षद्वीप 100 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है, उसके बाद गोवा 96.64 प्रतिशत और राजस्थान 95.63 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर हैं।

उत्तर प्रदेश में ईएफ का डिजिटलीकरण सबसे धीमा 69.56 प्रतिशत दर्ज किया गया है, उसके बाद केरल (81.19 प्रतिशत) का स्थान है।

चुनाव आयोग ने कहा कि मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से सत्यापन और डिजिटलीकरण में तेजी लाने के लिए अधिक बूथ स्तरीय एजेंट नियुक्त करने का आग्रह किया गया है।

चुनाव आयोग ने एक बयान में कहा कि राजस्थान के आंकड़ों में अंता विधानसभा क्षेत्र शामिल नहीं है, जहां उपचुनाव के कारण संशोधन स्थगित कर दिया गया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कहना आवश्यक है कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा उठाए गए कदम न केवल चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाते हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करते हैं कि हर मतदाता का सही तरीके से पंजीकरण हो सके। इस सन्दर्भ में, यह प्रक्रिया देश के लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस प्रक्रिया में कितने राज्यों ने भाग लिया है?
इस प्रक्रिया में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भाग लिया है।
डिजिटलीकरण की दर क्या है?
डिजिटलीकरण की दर 84.30 प्रतिशत है।
राजस्थान में ईएफ वितरण की स्थिति क्या है?
राजस्थान में 99.85 प्रतिशत ईएफ वितरण हुआ है।
उत्तर प्रदेश में डिजिटलीकरण की दर क्या है?
उत्तर प्रदेश में डिजिटलीकरण की दर 69.56 प्रतिशत है।
राष्ट्र प्रेस
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