'जय हिंद, जय सिंध' के निर्देशक इंद्रजीत लंकेश बोले — काश इतिहास बदल सकता, सिंध भारत का हिस्सा होता
सारांश
मुख्य बातें
निर्देशक इंद्रजीत लंकेश अपनी आगामी विभाजन-कालीन ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म 'जय हिंद, जय सिंध: ए लव स्टोरी' के साथ एक ऐसी कहानी परदे पर लाने की तैयारी में हैं, जो दशकों से अनकही रही है — सिंधी समुदाय का वह दर्द, जो 1947 के विभाजन के बाद से उनके सीने में दफ्न है। 12 अगस्त को मुंबई में हुई बातचीत में लंकेश ने फिल्म की भावनात्मक गहराई और सिंधी अस्मिता के प्रश्न पर खुलकर अपने विचार साझा किए।
फिल्म की कहानी और स्टार कास्ट
लंकेश ने बताया कि यह फिल्म एक युवा जोड़े की प्रेम कहानी है, जो विभाजन की पृष्ठभूमि में सेट है और एक साथ तीन पीढ़ियों की यात्रा को दर्शाती है। उन्होंने कहा, "यह एक मेनस्ट्रीम फिल्म है जिसमें महेश मांजरेकर, जयाप्रदा, इंदिरा तिवारी, राहुल देव और विक्रम कोचर जैसे अनुभवी कलाकार हैं। चार युवा और प्रतिभाशाली अभिनेताओं के साथ यह एक बड़ी स्टार कास्ट है।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही फिल्म की आत्मा प्रेम है, परंतु इसका मूल उद्देश्य सिंधी समुदाय के उस अनुभव को स्वर देना है जिसे मुख्यधारा का सिनेमा अब तक नज़रअंदाज़ करता रहा है।
विभाजन का दर्द — एक दर्दनाक इतिहास
लंकेश ने कहा, "इस फिल्म के ज़रिए हम एक ऐसा दर्दनाक इतिहास दिखाएँगे, जहाँ बहुत से लोगों ने अपनी ज़मीन, परिवार, बच्चे, माँ-बाप और लगभग सब कुछ खो दिया। जब विभाजन हुआ, तो पाकिस्तान से भारत आने वालों में सिंधी भी थे। मुझे सच में उनके लिए बहुत दुख होता है।"
उन्होंने जोड़ा कि फिल्म उन सवालों को उठाती है जो सिंधी समुदाय आज भी खोज रहा है — क्योंकि उनके पुरखों की धरती सिंध अब पाकिस्तान का हिस्सा है। "बँटवारे से पहले वे भारतीय थे, और आज भी हैं। वे हमारे भाई-बहन हैं, लेकिन उनके दादा-दादी की यादें, ज़मीन, घर — सब कुछ अभी भी पाकिस्तान में है।"
सिंधी संस्कृति और विरासत
निर्देशक ने सिंधी सभ्यता की समृद्धि पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सूफी संगीत की जड़ें सिंधी परंपरा में हैं और यह संस्कृति भारत की विरासत का अभिन्न अंग है। "मुझे उनके कल्चर से गहरा प्रेम है और बहुत दर्द के साथ कहता हूँ कि यह पाकिस्तान का हिस्सा बन गया।"
निर्देशक की भावनात्मक अपील
बातचीत के सबसे मार्मिक पल में लंकेश ने कहा, "अगर मैं इतिहास के पन्ने बदल सकता, तो चाहता कि सिंध को भारत वापस लाया जाए — क्योंकि मेरा मानना है कि यह भारत का है और सिंधी भारत का एक ज़रूरी हिस्सा हैं।" यह भावना फिल्म की आत्मा में भी उतरी है, जो विभाजन को महज़ एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि एक जीवित ज़ख्म के रूप में प्रस्तुत करती है।
'जय हिंद, जय सिंध: ए लव स्टोरी' की रिलीज़ तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन यह फिल्म भारत-पाकिस्तान विभाजन के इतिहास को एक नई दृष्टि से देखने का अवसर दे सकती है।