16 जुलाई 2026
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डीयू में 'प्रथम सिंधु कुंभ' पुस्तक विमोचन: विजेंद्र गुप्ता बोले — सिंधु दर्शन यात्रा ३० वर्षों से जोड़ रही है जड़ों से

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डीयू में 'प्रथम सिंधु कुंभ' पुस्तक विमोचन: विजेंद्र गुप्ता बोले — सिंधु दर्शन यात्रा ३० वर्षों से जोड़ रही है जड़ों से

सारांश

दिल्ली विश्वविद्यालय में 'प्रथम सिंधु कुंभ' पुस्तक के विमोचन पर विजेंद्र गुप्ता और इंद्रेश कुमार ने सिंधु को भारतीय पहचान का आधार बताया। इंद्रेश कुमार ने स्पष्ट किया कि सिंधु का लगभग ३०० किलोमीटर हिस्सा आज भी भारत में है — और यह सभ्यता की जड़ें हैं, जिन्हें बचाना ज़रूरी है।

मुख्य बातें

दिल्ली विश्वविद्यालय के शंकर लाल कॉन्सर्ट हॉल में 31 मई 2026 को 'प्रथम सिंधु कुंभ: आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व' पुस्तक का विमोचन हुआ।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सिंधु दर्शन यात्रा पिछले लगभग 30 वर्षों से लोगों को जड़ों से जोड़ रही है।
RSS के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने बताया कि सिंधु नदी का लगभग 300 किलोमीटर हिस्सा भारत के नियंत्रण में है।
कार्यक्रम में सिंधु माता भजन व आरती का आयोजन हुआ; बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आगामी सिंधु दर्शन कार्यक्रम 23 से 25 जून को आयोजित होगा।

दिल्ली विश्वविद्यालय के शंकर लाल कॉन्सर्ट हॉल में 31 मई 2026 को 'प्रथम सिंधु कुंभ: आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व' पुस्तक का विमोचन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने भाग लिया। यह आयोजन सिंधु दर्शन समिति द्वारा भारतीय सभ्यता, राष्ट्रभाव और सांस्कृतिक विरासत के पुनर्जागरण के उद्देश्य से किया गया।

विजेंद्र गुप्ता का संबोधन

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि पिछले लगभग 30 वर्षों से सिंधु दर्शन यात्रा देशभर के लोगों को उनकी जड़ों, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। उन्होंने इस यात्रा को 'बहुत जरूरी' बताते हुए सभी से इससे जुड़ने की अपील की।

गुप्ता ने कहा कि सिंधु नदी के इतिहास को समझना आज के समय में अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह हमारी सभ्यता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। उन्होंने यह भी कहा कि 'हिंद' और 'हिंदू' जैसे शब्दों की ऐतिहासिक जड़ें सिंधु से जुड़ी हैं — 'हमारी भाषाएँ भले ही अलग हैं, लेकिन हमारी आत्मा एक है।'

इंद्रेश कुमार की अपील

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सिंधु नदी पूरी तरह भारत से बाहर नहीं गई है। उनके अनुसार, इंडस वॉटर ट्रीटी के तहत सिंधु (Indus) का लगभग 300 किलोमीटर का हिस्सा भारत के नियंत्रण में है।

इंद्रेश कुमार ने बताया कि सिंधु भारत के भीतर लगभग 250 से 300 किलोमीटर तक बहती है और इसका एक लिखित इतिहास मौजूद है। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं सिंधु के साथ करीब 30-40 किलोमीटर तक यात्रा की, जिसके आगे नदी पाकिस्तान में प्रवेश कर जाती है।

सिंधु की सभ्यतागत पहचान

वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सिंधु को केवल एक भौगोलिक नदी के रूप में नहीं, बल्कि विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक की पहचान के रूप में देखा जाना चाहिए। इंद्रेश कुमार ने कहा कि दुनिया भारत को इसी नाम से पहचानती है, फिर भी यह पहचान समय के साथ धुंधली पड़ती जा रही है।

कार्यक्रम में सिंधु माता भजन और आरती का आयोजन भी किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और सांस्कृतिक प्रेमी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

आगामी सिंधु दर्शन कार्यक्रम

समारोह में 23 से 25 जून तक आयोजित होने वाले सिंधु दर्शन कार्यक्रम पर भी प्रकाश डाला गया। सिंधु दर्शन समिति ने देशभर के नागरिकों से इस सांस्कृतिक यात्रा में भाग लेने और अपनी सभ्यतागत जड़ों से जुड़ने की अपील की। यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक और कदम के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इंद्रेश कुमार का यह बयान कि सिंधु का ३०० किलोमीटर हिस्सा भारत में है — इंडस वॉटर ट्रीटी के जटिल कानूनी ढाँचे के संदर्भ में गहन परीक्षण की माँग करता है। 'हिंद' और 'हिंदू' शब्दों की व्युत्पत्ति सिंधु से जोड़ना एक प्रचलित भाषाई तर्क है, पर इतिहासकारों में इस पर मतभेद हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन सांस्कृतिक आयोजनों को केवल भावनात्मक दृष्टि से देखती है — जबकि सिंधु घाटी सभ्यता के संरक्षण पर ठोस नीतिगत बहस की ज़रूरत है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'प्रथम सिंधु कुंभ' पुस्तक क्या है?
यह 'प्रथम सिंधु कुंभ: आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व' शीर्षक की एक पुस्तक है, जिसे सिंधु दर्शन समिति ने प्रकाशित किया है। इसका विमोचन 31 मई 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय के शंकर लाल कॉन्सर्ट हॉल में हुआ।
सिंधु दर्शन यात्रा क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
सिंधु दर्शन यात्रा एक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक अभियान है जो पिछले लगभग 30 वर्षों से चल रहा है। इसका उद्देश्य देशभर के नागरिकों को सिंधु नदी से जुड़ी भारतीय सभ्यता, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।
इंद्रेश कुमार ने सिंधु नदी के बारे में क्या कहा?
इंद्रेश कुमार ने कहा कि इंडस वॉटर ट्रीटी के तहत सिंधु नदी का लगभग 300 किलोमीटर हिस्सा भारत के नियंत्रण में है। उन्होंने यह भी कहा कि सिंधु भारत के भीतर 250 से 300 किलोमीटर तक बहती है और इसका एक लिखित इतिहास मौजूद है।
आगामी सिंधु दर्शन कार्यक्रम कब और कहाँ होगा?
आगामी सिंधु दर्शन कार्यक्रम 23 से 25 जून 2026 को आयोजित होने की जानकारी इस समारोह में दी गई। सिंधु दर्शन समिति ने देशभर के नागरिकों से इसमें भाग लेने की अपील की है।
विजेंद्र गुप्ता ने सिंधु दर्शन यात्रा को क्यों महत्वपूर्ण बताया?
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह यात्रा भारतीय संस्कृति और सभ्यतागत मूल्यों के संरक्षण में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने 'हिंद' और 'हिंदू' शब्दों की जड़ें सिंधु से जोड़ते हुए इसे राष्ट्रीय पहचान का आधार बताया।
राष्ट्र प्रेस
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