डीयू में 'प्रथम सिंधु कुंभ' पुस्तक विमोचन: विजेंद्र गुप्ता बोले — सिंधु दर्शन यात्रा ३० वर्षों से जोड़ रही है जड़ों से
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली विश्वविद्यालय के शंकर लाल कॉन्सर्ट हॉल में 31 मई 2026 को 'प्रथम सिंधु कुंभ: आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व' पुस्तक का विमोचन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने भाग लिया। यह आयोजन सिंधु दर्शन समिति द्वारा भारतीय सभ्यता, राष्ट्रभाव और सांस्कृतिक विरासत के पुनर्जागरण के उद्देश्य से किया गया।
विजेंद्र गुप्ता का संबोधन
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि पिछले लगभग 30 वर्षों से सिंधु दर्शन यात्रा देशभर के लोगों को उनकी जड़ों, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। उन्होंने इस यात्रा को 'बहुत जरूरी' बताते हुए सभी से इससे जुड़ने की अपील की।
गुप्ता ने कहा कि सिंधु नदी के इतिहास को समझना आज के समय में अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यह हमारी सभ्यता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। उन्होंने यह भी कहा कि 'हिंद' और 'हिंदू' जैसे शब्दों की ऐतिहासिक जड़ें सिंधु से जुड़ी हैं — 'हमारी भाषाएँ भले ही अलग हैं, लेकिन हमारी आत्मा एक है।'
इंद्रेश कुमार की अपील
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश कुमार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सिंधु नदी पूरी तरह भारत से बाहर नहीं गई है। उनके अनुसार, इंडस वॉटर ट्रीटी के तहत सिंधु (Indus) का लगभग 300 किलोमीटर का हिस्सा भारत के नियंत्रण में है।
इंद्रेश कुमार ने बताया कि सिंधु भारत के भीतर लगभग 250 से 300 किलोमीटर तक बहती है और इसका एक लिखित इतिहास मौजूद है। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं सिंधु के साथ करीब 30-40 किलोमीटर तक यात्रा की, जिसके आगे नदी पाकिस्तान में प्रवेश कर जाती है।
सिंधु की सभ्यतागत पहचान
वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सिंधु को केवल एक भौगोलिक नदी के रूप में नहीं, बल्कि विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक की पहचान के रूप में देखा जाना चाहिए। इंद्रेश कुमार ने कहा कि दुनिया भारत को इसी नाम से पहचानती है, फिर भी यह पहचान समय के साथ धुंधली पड़ती जा रही है।
कार्यक्रम में सिंधु माता भजन और आरती का आयोजन भी किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और सांस्कृतिक प्रेमी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
आगामी सिंधु दर्शन कार्यक्रम
समारोह में 23 से 25 जून तक आयोजित होने वाले सिंधु दर्शन कार्यक्रम पर भी प्रकाश डाला गया। सिंधु दर्शन समिति ने देशभर के नागरिकों से इस सांस्कृतिक यात्रा में भाग लेने और अपनी सभ्यतागत जड़ों से जुड़ने की अपील की। यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक और कदम के रूप में देखा जा रहा है।