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'जय हिंद जय सिंध' से सिंधी समुदाय की अनकही पीड़ा पर्दे पर लाएंगे निर्देशक इंद्रजीत लंकेश

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'जय हिंद जय सिंध' से सिंधी समुदाय की अनकही पीड़ा पर्दे पर लाएंगे निर्देशक इंद्रजीत लंकेश

सारांश

दशकों से भारतीय सिनेमा में अनदेखा रहा सिंधी समुदाय का विभाजन-दर्द अब पर्दे पर आएगा। निर्देशक इंद्रजीत लंकेश की 'जय हिंद जय सिंध अ लव स्टोरी' न सिर्फ एक ऐतिहासिक घाव को आवाज़ देती है, बल्कि एकता और भाईचारे का संदेश जेन ज़ी तक पहुँचाने की कोशिश भी करती है।

मुख्य बातें

निर्देशक इंद्रजीत लंकेश की फिल्म 'जय हिंद जय सिंध अ लव स्टोरी' सिंधी समुदाय की विभाजन-पीड़ा पर केंद्रित है।
फिल्म हिंदुस्तान-पाकिस्तान विभाजन के बाद सिंधी परिवारों के विस्थापन और पहचान के संघर्ष को दर्शाती है।
लंकेश का दावा है कि फिल्म की कहानी से जेन ज़ी भी गहराई से जुड़ सकेगी।
निर्देशक ने सोशल मीडिया को युवाओं के लिए अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बताया।
लंकेश पत्रकारिता से फिल्म निर्देशन में आए हैं और भारतीय विविधता व एकता को फिल्म का केंद्रीय संदेश मानते हैं।

निर्देशक इंद्रजीत लंकेश एक ऐसी फिल्म लेकर आ रहे हैं जो दशकों से अनकही रही एक पूरी कौम की दर्दभरी दास्तान को पर्दे पर जीवंत करेगी। हिंदुस्तान-पाकिस्तान विभाजन के बाद सिंधी समुदाय ने जो पीड़ा झेली — अपनी ज़मीन, अपनी गलियाँ और अपनी पहचान से हमेशा के लिए बिछड़ने का दर्द — उसे आज तक भारतीय सिनेमा ने ठीक से नहीं दिखाया। इसी खालीपन को भरने के लिए लंकेश 'जय हिंद जय सिंध अ लव स्टोरी' लेकर आ रहे हैं।

फिल्म की पृष्ठभूमि और कहानी

इंद्रजीत लंकेश ने बताया कि फिल्म की जड़ें उस ऐतिहासिक त्रासदी में हैं जब विभाजन के बाद सिंधी परिवार बेघर हो गए और पीढ़ी-दर-पीढ़ी विस्थापन का दंश झेलते रहे। उनका कहना है कि जब कोई व्यक्ति अपनी पहचान, अपने इतिहास और अपने पूर्वजों की विरासत के लिए संघर्ष करता है, तो यह स्वाभाविक रूप से एक भावुक और संवेदनशील विषय बन जाता है — और यही इस फिल्म की आत्मा है।

लंकेश ने विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया है कि यह फिल्म केवल पुरानी पीढ़ी की नॉस्टेल्जिया तक सीमित न रहे। उनके अनुसार, जेन ज़ी भी इस कहानी से उतनी ही गहराई से जुड़ सकेगी, क्योंकि पहचान और जड़ों की तलाश हर पीढ़ी का सवाल है।

एकता और भाईचारे का संदेश

निर्देशक ने फिल्म के केंद्रीय संदेश को स्पष्ट करते हुए कहा, "भारत में हम सभी को मिल-जुलकर और प्यार से रहना चाहिए। हमें ऐसे पड़ोसियों की तरह नहीं बनना चाहिए, जो धर्म, ज़मीन या अपने स्वार्थ को लेकर आपस में लड़ते रहें। हमें कभी ऐसी स्थिति में नहीं पहुँचना चाहिए, जहाँ हम एक-दूसरे से प्यार और भाईचारा करना ही भूल जाएँ।"

उन्होंने आगे कहा, "भारत एक बहुत खूबसूरत देश है, जहाँ अलग-अलग संस्कृतियाँ, भाषाएँ, धर्म और क्षेत्र हैं। इतनी विविधताओं के बावजूद यहाँ के लोग एक साथ मिलकर रहते हैं और एक देश के रूप में जुड़े हुए हैं। यही भारत की असली पहचान है और यही संदेश हम युवा पीढ़ी और जेन ज़ी तक पहुँचाना चाहते हैं।"

सोशल मीडिया और दर्शकों की बदलती भूमिका

जब उनसे पूछा गया कि सोशल मीडिया के कारण दर्शकों का दबाव फिल्म इंडस्ट्री पर बढ़ा है या नहीं, तो लंकेश ने सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने कहा, "नहीं, मुझे ऐसा नहीं लगता। सोशल मीडिया आज की युवा पीढ़ी और जेन ज़ी के लिए एक बहुत अच्छा प्लेटफ़ॉर्म है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब मीडिया की ताकत आम लोगों और युवाओं के हाथ में भी है।"

लंकेश ने अपने पत्रकारिता के शुरुआती दिनों का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने यह बदलाव बहुत पहले महसूस किया था। उनके अनुसार, "पहले पत्रकारिता और लोगों की आवाज़ मुख्य रूप से पत्रकारों और कुछ चुनिंदा लोगों तक ही सीमित थी, लेकिन आज यह आवाज़ युवाओं, आम जनता और हर आम इंसान तक पहुँच गई है।"

अभिव्यक्ति की आज़ादी पर विचार

निर्देशक ने यह भी स्वीकार किया कि सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल से अक्सर गलत जानकारी फैलाई जाती है। बावजूद इसके, उन्होंने कहा, "एक पत्रकार और फिल्ममेकर के तौर पर मैं इस बात का स्वागत करता हूँ कि पत्रकारिता और आम लोगों की आवाज़ अब हर व्यक्ति तक पहुँच गई है। आज गाँव में बैठा कोई व्यक्ति भी अपनी आवाज़ दुनिया तक पहुँचा सकता है। यही वह असली अभिव्यक्ति की आज़ादी है, जिसकी हम हमेशा से बात करते रहे हैं।"

भारतीय सिनेमा में विभाजन की पीड़ा पर बनी फिल्मों की एक लंबी परंपरा रही है, लेकिन सिंधी समुदाय का अनुभव उसमें लगभग अनुपस्थित रहा है। 'जय हिंद जय सिंध अ लव स्टोरी' उस रिक्तता को भरने की कोशिश है — और यह देखना दिलचस्प होगा कि नई पीढ़ी इस कहानी को किस तरह अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी मुख्यधारा हिंदी सिनेमा में उनकी पीड़ा लगभग अनुपस्थित रही है — यह एक सांस्कृतिक चूक है जिसे 'जय हिंद जय सिंध' भरने की कोशिश करती है। हालाँकि, केवल घोषणाओं से नहीं, फिल्म की असली परीक्षा रिलीज़ के बाद होगी — क्या यह महज़ नॉस्टेल्जिया बनकर रह जाती है या सच में जेन ज़ी के साथ संवाद स्थापित करती है। लंकेश का पत्रकारिता पृष्ठभूमि से आना एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन विभाजन जैसे संवेदनशील विषय पर सिनेमाई गहराई और व्यावसायिक सफलता के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'जय हिंद जय सिंध अ लव स्टोरी' किस विषय पर आधारित है?
यह फिल्म हिंदुस्तान-पाकिस्तान विभाजन के बाद सिंधी समुदाय की पीड़ा, विस्थापन और पहचान के संघर्ष पर आधारित है। निर्देशक इंद्रजीत लंकेश के अनुसार, सिंधी समुदाय की यह कहानी अब तक भारतीय सिनेमा में नहीं आई थी।
इंद्रजीत लंकेश कौन हैं?
इंद्रजीत लंकेश एक फिल्म निर्देशक हैं जो अपने करियर की शुरुआत में लेखन और पत्रकारिता से जुड़े थे। वे 'जय हिंद जय सिंध अ लव स्टोरी' के ज़रिए सिंधी समुदाय की अनकही कहानी को पर्दे पर लाना चाहते हैं।
क्या यह फिल्म जेन ज़ी दर्शकों के लिए भी प्रासंगिक होगी?
निर्देशक लंकेश का मानना है कि पहचान, जड़ों और विरासत का सवाल हर पीढ़ी के लिए प्रासंगिक है। उन्होंने फिल्म को इस तरह बनाया है कि आज की युवा पीढ़ी भी इससे भावनात्मक रूप से जुड़ सके।
फिल्म का मुख्य संदेश क्या है?
फिल्म का संदेश भारतीय विविधता में एकता और भाईचारे का है। लंकेश चाहते हैं कि दर्शक — खासकर युवा — यह समझें कि धर्म, ज़मीन या स्वार्थ के लिए आपसी प्रेम और भाईचारा नहीं छोड़ना चाहिए।
सोशल मीडिया को लेकर निर्देशक का क्या नज़रिया है?
लंकेश सोशल मीडिया को युवाओं के लिए अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम मानते हैं। उनके अनुसार, मीडिया की ताकत अब आम लोगों तक पहुँच गई है और यह असली अभिव्यक्ति की आज़ादी है, हालाँकि उन्होंने गलत सूचना के खतरे को भी स्वीकार किया।
राष्ट्र प्रेस
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