तिब्बत के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अमेरिकी सीनेट में द्विदलीय विधेयक पेश, दलाई लामा के बाद भी जारी रहेगा समर्थन
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सीनेट में 12 अगस्त 2026 को एक महत्वपूर्ण द्विदलीय विधेयक पेश किया गया, जिसका उद्देश्य तिब्बत की निर्वासित सरकार — केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) — के साथ अमेरिकी जुड़ाव को संस्थागत रूप देना और यह सुनिश्चित करना है कि 14वें दलाई लामा के बाद भी वाशिंगटन का समर्थन अटूट बना रहे। 'अश्योरिंग द फ्यूचर ऑफ तिब्बत एक्ट' नामक इस प्रस्ताव को डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन — दोनों दलों के सीनेटरों का समर्थन प्राप्त है, जो अमेरिकी तिब्बत नीति में एक नई दिशा का संकेत देता है।
विधेयक में क्या है
इस विधेयक के अंतर्गत केंद्रीय तिब्बती प्रशासन को तिब्बती लोगों का वैध प्रतिनिधि माना जाएगा। साथ ही यह पुष्टि की जाएगी कि तिब्बत-चीन विवाद का शांतिपूर्ण समाधान अमेरिका के रणनीतिक हित में है। अमेरिकी विदेश मंत्री को निर्देश दिया जाएगा कि वे तिब्बती प्रशासन के निर्वाचित प्रमुख 'सिक्योंग' और अन्य नामित प्रतिनिधियों के साथ सर्वोच्च राजनयिक स्तर पर संवाद करें।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के लिए ऑब्जर्वर का दर्जा दिलाने की वकालत करेगा और इस प्रयास में अपने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों को एकजुट करेगा। सिक्योंग को किसी सरकार के प्रमुख के समकक्ष राजनयिक सम्मान और सुरक्षा व्यवस्था दिए जाने पर भी विचार किया जाएगा।
विधेयक में 'गाडेन फोड्रंग ट्रस्ट' को दलाई लामा को मान्यता देने वाली एकमात्र वैध संस्था घोषित किया गया है — यह प्रावधान विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है ताकि भविष्य में चीन द्वारा किसी वैकल्पिक दलाई लामा को मान्यता दिलाने के किसी भी प्रयास को अमेरिकी कानून के तहत नकारा जा सके।
मुख्य प्रायोजक और उनके वक्तव्य
यह विधेयक डेमोक्रेटिक सीनेटर जेफ मर्कले और रिपब्लिकन सीनेटर जिम रिस्क ने पेश किया। सीनेटर जैकी रोसेन, टॉड यंग, टिम केन और रिक स्कॉट इसके मूल सह-प्रायोजक हैं।
सीनेटर मर्कले ने कहा, "तिब्बत के लोगों के मानवाधिकारों और बुनियादी सम्मान को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। हमारा द्विदलीय बिल एक स्पष्ट संदेश देता है कि अमेरिका इन बुनियादी आज़ादियों और भविष्य के वादे के लिए तिब्बत की लड़ाई में उसके साथ खड़ा रहेगा।" उन्होंने यह भी जोड़ा, "जब तक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत तिब्बत के अधिकारों को नज़रअंदाज़ करता रहेगा, अमेरिका तिब्बती लोगों का साथ नहीं छोड़ेगा।"
सीनेटर रिस्क ने कहा, "चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने तिब्बती संस्कृति, धर्म और भाषा को खत्म करने की कोशिश की है। बीजिंग ने तिब्बत के साथ जो किया है, वही वे उन लोगों के साथ भी करना चाहते हैं जो सीसीपी का विरोध करते हैं। यह बिल तिब्बती लोगों का समर्थन करता है और संयुक्त राष्ट्र में चीन के दुष्प्रभाव का मुकाबला करता है।"
नागरिक समाज की प्रतिक्रिया
'इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत' की अध्यक्ष तेनचो ग्यात्सो ने इस विधेयक का स्वागत करते हुए इसे जल्द से जल्द पारित करने की अपील की। उन्होंने कहा, "ऐसे समय में जब चीन तिब्बती पहचान को मिटाने की अपनी मुहिम तेज कर रहा है, यह बिल एक मज़बूत संदेश देता है कि तिब्बती लोगों और उनके लोकतांत्रिक संस्थानों के अपने भविष्य को तय करने के अधिकार के लिए अमेरिका का समर्थन अटूट है।"
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
यह सीनेट विधेयक उस हाउस बिल का साथी प्रस्ताव है जिसे 22 मई को डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि जिम मैकगवर्न और रिपब्लिकन प्रतिनिधि माइकल मैककॉल ने पेश किया था। राष्ट्रपति के पास भेजे जाने से पहले दोनों प्रस्तावों को अपने-अपने सदनों से एक ही रूप में पारित होना अनिवार्य होगा।
गौरतलब है कि अमेरिकी कांग्रेस ने पिछले एक दशक में तिब्बत से जुड़े कई द्विदलीय उपाय किए हैं — जिनमें 'रेसिप्रोकल एक्सेस टू तिब्बत एक्ट', 'तिब्बती पॉलिसी एंड सपोर्ट एक्ट' और 'रिज़ॉल्व तिब्बत एक्ट' शामिल हैं। नया विधेयक इसी क्रमिक नीतिगत दबाव की अगली कड़ी है, जो इस बार उत्तराधिकार के प्रश्न को केंद्र में रखता है। यह ऐसे समय में आया है जब दलाई लामा की आयु और तिब्बती धार्मिक नेतृत्व के भविष्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो रही है।