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दलाई लामा उत्तराधिकार पर अमेरिकी संशोधन: मैककॉल की चेतावनी — चीन थोपेगा 'नकली' आध्यात्मिक नेता

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दलाई लामा उत्तराधिकार पर अमेरिकी संशोधन: मैककॉल की चेतावनी — चीन थोपेगा 'नकली' आध्यात्मिक नेता

सारांश

अमेरिकी सांसद मैककॉल की सीधी चेतावनी — चीन दलाई लामा के बाद CCP-वफादार 'नकली' उत्तराधिकारी थोपने की तैयारी में है। उनका संशोधन अमेरिकी नीति को स्पष्ट करता है: यह फैसला तिब्बती धर्मगुरुओं का है, बीजिंग का नहीं। दांव धार्मिक नहीं, भू-राजनीतिक है — नेपाल, मंगोलिया और भारत तक।

मुख्य बातें

हाउस फॉरेन अफेयर्स कमिटी के चेयरमैन माइकल मैककॉल ने 11 जून 2026 को दलाई लामा उत्तराधिकार पर अमेरिकी नीति को मजबूत करने वाला संशोधन पेश किया।
संशोधन स्पष्ट करता है कि उत्तराधिकारी का चयन तिब्बती बौद्ध धर्मगुरुओं का विशेष अधिकार है — CCP की इसमें कोई भूमिका नहीं।
मैककॉल ने चेतावनी दी कि निष्क्रियता पर बीजिंग एक CCP-वफादार 'नकली दलाई लामा' को नेपाल, मंगोलिया और भारत की सीमा से सटे हिमालयी क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करेगा।
2007 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने खुद को दलाई लामा के उत्तराधिकारी के चयन का अधिकार देने वाला कानून बनाया था।
यह संशोधन 2020 के द्विदलीय तिब्बती नीति और समर्थन अधिनियम पर आधारित है।

हाउस फॉरेन अफेयर्स कमिटी के चेयरमैन माइकल मैककॉल ने 11 जून 2026 को अमेरिकी कांग्रेस में एक महत्वपूर्ण संशोधन पेश किया, जो यह स्पष्ट करता है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चयन विशुद्ध रूप से तिब्बती बौद्ध धर्मगुरुओं का आध्यात्मिक अधिकार है — बीजिंग का नहीं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका निष्क्रिय रहा, तो चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) अपने वफादार एक 'नकली दलाई लामा' को तिब्बती जनता पर थोप सकती है।

संशोधन का मूल उद्देश्य

रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ नेता मैककॉल ने कहा कि यह संशोधन 2020 में द्विदलीय समर्थन से पारित तिब्बती नीति और समर्थन अधिनियम पर आधारित है। उनके अनुसार, इसका लक्ष्य अमेरिकी विदेश नीति को इस सिद्धांत पर दृढ़ता से स्थापित करना है कि दलाई लामा का उत्तराधिकार उनके अपने कार्यालय और वरिष्ठ धर्मगुरुओं द्वारा तय होगा — इस प्रक्रिया में CCP की कोई भूमिका नहीं होगी।

चीन की तैयारी पर गंभीर आरोप

मैककॉल ने सदन में कहा, "2007 में कम्युनिस्ट पार्टी ने खुद को यह तथाकथित अधिकार दे दिया कि दलाई लामा का उत्तराधिकारी कौन होगा। जरा इस बात पर गौर करें — एक आधिकारिक तौर पर नास्तिक सरकार तिब्बती लोगों के धार्मिक मामलों में ऐसा अधिकार ले रही है।" उन्होंने चीन के हाल ही में लागू 'जातीय एकता और प्रगति को बढ़ावा देने वाले कानून' का हवाला देते हुए जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर बीजिंग के बढ़ते नियंत्रण की भी आलोचना की।

धर्मशाला यात्रा और दलाई लामा से मुलाकात

मैककॉल ने बताया कि 2024 में उन्होंने भारत के धर्मशाला में एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था, जहाँ उन्हें दलाई लामा से मिलने का अवसर मिला। उन्होंने कहा, "वे गर्मजोशी, बुद्धिमत्ता और हास्य-विनोद से भरे हुए हैं।" मैककॉल के अनुसार, उस मुलाकात में दलाई लामा ने मुस्कुराते हुए कहा था कि वे 110 वर्ष तक जीने की योजना बना रहे हैं।

रणनीतिक और सुरक्षा निहितार्थ

मैककॉल ने तर्क दिया कि यह मसला केवल धार्मिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ आस्था का मामला नहीं है; यह राष्ट्रीय सुरक्षा का भी मामला है।" उनकी दलील थी कि यदि चीन एक CCP-समर्थित उत्तराधिकारी को स्थापित करने में सफल रहा, तो वह नेपाल, मंगोलिया और भारत की सीमा से सटे पूरे हिमालयी क्षेत्र में अपना भू-राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने के लिए उसका उपयोग करेगा।

आगे की राह

मैककॉल ने स्पष्ट किया कि दलाई लामा पहले ही यह बता चुके हैं कि उनके बाद उत्तराधिकारी की पहचान कैसे होगी — यह अधिकार उनके कार्यालय और वरिष्ठ धर्मगुरुओं के पास होगा। अमेरिकी नीति को इसी प्रक्रिया की मान्यता देनी चाहिए। यह संशोधन हाउस फॉरेन अफेयर्स कमिटी में विचाराधीन है और इसे द्विदलीय समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसके निहितार्थ सीधे भारत की उत्तरी सीमाओं तक पहुँचते हैं। मुख्यधारा की कवरेज इसे धार्मिक स्वतंत्रता की बहस तक सीमित करती है, लेकिन असली सवाल भू-राजनीतिक है: एक CCP-नियंत्रित 'दलाई लामा' नेपाल और मंगोलिया में चीनी 'सॉफ्ट पावर' का सबसे प्रभावशाली हथियार बन सकता है। भारत के लिए यह सीधी चुनौती है, फिर भी नई दिल्ली की आधिकारिक प्रतिक्रिया अब तक मौन है — जो अपने आप में एक नीतिगत रुख है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माइकल मैककॉल का तिब्बत संशोधन क्या है?
यह अमेरिकी कांग्रेस में पेश एक नीतिगत संशोधन है जो स्पष्ट करता है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चयन तिब्बती बौद्ध धर्मगुरुओं का आध्यात्मिक अधिकार है और इसमें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की कोई भूमिका नहीं है। यह 2020 के तिब्बती नीति और समर्थन अधिनियम पर आधारित है।
चीन दलाई लामा के उत्तराधिकार में क्यों दखल देना चाहता है?
2007 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने खुद को तिब्बती धार्मिक नेताओं के चयन का अधिकार देने वाला कानून बनाया। मैककॉल के अनुसार, बीजिंग एक CCP-वफादार उत्तराधिकारी को स्थापित कर नेपाल, मंगोलिया और भारत की सीमा से सटे हिमालयी क्षेत्र में अपना भू-राजनीतिक प्रभाव बढ़ाना चाहता है।
दलाई लामा ने खुद अपने उत्तराधिकार के बारे में क्या कहा है?
दलाई लामा ने पहले ही स्पष्ट किया है कि उनके बाद उत्तराधिकारी की पहचान उनके कार्यालय और वरिष्ठ धर्मगुरुओं द्वारा होगी। उन्होंने यह भी कहा है कि वे चीन में नहीं, बल्कि स्वतंत्र वातावरण में पुनर्जन्म लेंगे।
इस संशोधन का भारत पर क्या असर हो सकता है?
मैककॉल ने सीधे भारत का उल्लेख करते हुए कहा कि एक CCP-नियंत्रित उत्तराधिकारी का इस्तेमाल भारत की सीमा से सटे हिमालयी क्षेत्र में चीनी प्रभाव बढ़ाने के लिए हो सकता है। भारत में धर्मशाला दलाई लामा का निर्वासित मुख्यालय है, इसलिए यह मुद्दा भारत की सुरक्षा और विदेश नीति दोनों से जुड़ा है।
यह संशोधन अमेरिकी कांग्रेस में कहाँ तक पहुँचा है?
यह संशोधन हाउस फॉरेन अफेयर्स कमिटी में विचाराधीन है। मैककॉल ने कमिटी के सदस्यों से इसका समर्थन करने की अपील की है और इसे द्विदलीय समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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