तिब्बत में चीनी अत्याचारों की जाँच के लिए अमेरिकी कांग्रेस में द्विदलीय विधेयक पेश
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में दोनों प्रमुख दलों के सांसदों ने मंगलवार को एक नया विधेयक पेश किया, जिसके तहत अमेरिकी विदेश विभाग को यह औपचारिक निर्धारण करना होगा कि क्या चीन ने तिब्बत में नरसंहार या मानवता के विरुद्ध अपराध किए हैं। ‘तिब्बत एट्रोसिटीज डिटरमिनेशन एक्ट’ नामक यह विधेयक न्यू जर्सी के रिपब्लिकन प्रतिनिधि क्रिस स्मिथ और न्यूयॉर्क के डेमोक्रेट सांसद टॉम सुओजी ने संयुक्त रूप से पेश किया।
विधेयक में क्या प्रावधान हैं
अगर यह विधेयक कानून बनता है, तो अमेरिकी विदेश मंत्री को एक वर्ष के भीतर कांग्रेस को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस रिपोर्ट में तिब्बत में चीनी अधिकारियों की गतिविधियों का व्यापक आकलन करना होगा — जिसमें कथित मनमानी हत्याएँ, गंभीर शारीरिक या मानसिक क्षति, अमानवीय जीवन-स्थितियाँ, जबरन विस्थापन, सामूहिक हिरासत, जबरन नसबंदी एवं गर्भपात, और तिब्बती बच्चों को उनके परिवारों से अलग करने जैसे आरोप शामिल हैं।
यह विधेयक सीनेट में पहले से पेश एक समानांतर विधेयक का हाउस संस्करण है, जिसे रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट और डेमोक्रेट सीनेटर जेफ मर्कले ने रखा था।
संस्कृति और धर्म पर भी निगरानी
प्रस्तावित कानून के तहत यह भी जाँचा जाएगा कि क्या चीन तिब्बती बौद्ध धर्म को अपने अनुरूप ढालने और तिब्बती भाषा एवं संस्कृति को दबाने का प्रयास कर रहा है। रिपोर्ट में सरकारी आँकड़ों के साथ-साथ स्वतंत्र स्रोतों की जानकारी भी शामिल की जाएगी। साथ ही प्रतिबंध, वीज़ा रोक और कूटनीतिक कार्रवाई जैसे संभावित अमेरिकी कदमों की सिफ़ारिशें भी दी जाएँगी।
विधेयक में विशेष रूप से सरकारी बोर्डिंग स्कूलों में तिब्बती बच्चों को कथित तौर पर जबरन भेजे जाने के मामलों की जाँच का प्रावधान है, जहाँ आलोचकों के अनुसार उनकी सांस्कृतिक पहचान बदलने की कोशिश की जाती है।
सांसदों की प्रतिक्रिया
क्रिस स्मिथ ने कहा कि चीन लंबे समय से तिब्बत में गंभीर अत्याचार करता आ रहा है और इसे और अधिक नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, इन कथित अपराधों को स्पष्ट रूप से दर्ज करना ज़रूरी है ताकि ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जा सके।
टॉम सुओजी ने कहा कि चीन की कार्रवाइयाँ केवल तिब्बत ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी ख़तरा हैं। उन्होंने तिब्बतियों, उइगर मुसलमानों और हांगकांग के लोकतंत्र समर्थकों के साथ हो रहे व्यवहार के विरुद्ध आवाज़ उठाने पर ज़ोर दिया।
सीनेटर रिक स्कॉट ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन कथित अत्याचारों पर चुप्पी न साधने की अपील करते हुए चीनी सरकार पर व्यवस्थित हिंसा, यातना, जबरन नसबंदी और हिरासत के गंभीर आरोप लगाए।
व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ
यह विधेयक ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-चीन संबंध व्यापार, ताइवान और मानवाधिकार जैसे कई मोर्चों पर पहले से तनावपूर्ण हैं। गौरतलब है कि अमेरिका 2021 में चीन की शिनजियांग में उइगरों के विरुद्ध कार्रवाई को पहले ही औपचारिक रूप से ‘नरसंहार’ घोषित कर चुका है — और तिब्बत पर यह नया कदम उसी ढाँचे का विस्तार माना जा रहा है। तिब्बत दशकों से चीन और पश्चिमी देशों के बीच तनाव का केंद्रीय मुद्दा रहा है।
विधेयक के दोनों सदनों से पारित होने की राह अभी लंबी है, लेकिन इसका द्विदलीय समर्थन कांग्रेस में चीन-नीति पर बनती सहमति का संकेत है।