क्या कस्टोडियन जमीन मामले में ईडी की कार्रवाई से जम्मू और उधमपुर में दस्तावेज जब्त हुए?

सारांश
Key Takeaways
- ईडी की कार्रवाई से जम्मू-कश्मीर में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश मिलता है।
- कस्टोडियन भूमि के अवैध कब्जे की समस्या को हल करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
- यह जांच कई सरकारी अधिकारियों और बिचौलियों की संलिप्तता को उजागर कर सकती है।
- भ्रष्टाचार निरोधक शाखा की प्राथमिकियों पर आधारित यह कार्रवाई महत्वपूर्ण है।
- इस मामले में आगे की जांच से और भी खुलासे हो सकते हैं।
जम्मू, २५ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जम्मू-कश्मीर में कस्टोडियन जमीन मामले में कई स्थानों पर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कार्रवाई की। यह कार्रवाई कस्टोडियन भूमि (पाकिस्तान चले गए प्रवासियों द्वारा छोड़ी गई भूमि) के अवैध कब्जे और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में की गई है।
ईडी के अनुसार, जम्मू उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने २२ अगस्त को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), २००२ के तहत जम्मू और उधमपुर के विभिन्न स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई कस्टोडियन भूमि के अवैध कब्जे और भ्रष्टाचार से संबंधित है, जिसमें लगभग ५०२.५ कनाल भूमि शामिल है।
ईडी ने जम्मू-कश्मीर पुलिस की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) द्वारा दर्ज विभिन्न प्राथमिकियों (एफआईआर) के आधार पर जांच शुरू की।
जांच में खुलासा हुआ कि कई सरकारी राजस्व अधिकारियों, निजी व्यक्तियों, भूमि हड़पने वालों और बिचौलियों के गठजोड़ ने जम्मू और आसपास के क्षेत्रों में लगभग ५०२.५ कनाल सरकारी कस्टोडियन भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया। इस भूमि का अनुमानित मूल्य लगभग २० करोड़ रुपए है।
जांच से पता चला कि २०२२ से फर्जी और पुरानी तारीखों वाले म्यूटेशन रिकॉर्ड, पावर ऑफ अटॉर्नी, बिक्री पत्र और राजस्व रिकॉर्ड में झूठी प्रविष्टियों (मनगढ़ंत जानकारी) के जरिए यह अवैध कब्जा किया गया।
ईडी ने बताया कि ऐसी धोखाधड़ी से हड़पी गई सरकारी कस्टोडियन भूमि को बाद में जाली दस्तावेजों के माध्यम से बेच दिया गया और बिक्री से प्राप्त राशि (अपराध की आय) को आरोपियों के कई खातों के माध्यम से हस्तांतरित कर व्यक्तिगत उपयोग में लाया गया।
इस तलाशी अभियान के दौरान संपत्तियों, राजस्व रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों से संबंधित कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए।
फिलहाल इस मामले में आगे की जांच जारी है।