एक जनपद एक व्यंजन की राष्ट्रीय मंच पर दस्तक: IITF 2026 में पहली बार लगेगा ODOC स्टॉल
सारांश
मुख्य बातें
योगी सरकार की महत्वाकांक्षी पहल 'एक जनपद एक व्यंजन' (ODOC) अब उत्तर प्रदेश की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने जा रही है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 14 से 27 नवंबर 2026 तक आयोजित होने वाले 45वें इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) 2026 में पहली बार ODOC का स्टॉल लगाया जाएगा। ग्रेटर नोएडा में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) में व्यापक सराहना मिलने के बाद यह अगला बड़ा कदम है।
मुख्य घटनाक्रम
IITF जैसे देश के प्रमुख व्यापारिक आयोजन में ODOC की पहली भागीदारी को इस पहल के विस्तार की दिशा में निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। इस स्टॉल पर 'एक जनपद, एक उत्पाद' (ODOP) के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश के 75 जिलों के पारंपरिक व्यंजनों, स्थानीय स्वादों और समृद्ध पाक विरासत को एक व्यवस्थित मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। यह आयोजन देश-विदेश से आने वाले आगंतुकों, व्यापारियों, निवेशकों और संभावित खरीदारों को प्रदेश के स्थानीय व्यंजनों से रूबरू कराने का अवसर देगा।
ODOC की अवधारणा और महत्व
ODOC की बुनियादी सोच यह है कि उत्तर प्रदेश के हर जिले का अपना एक विशिष्ट व्यंजन है, जिसे अब तक सांस्कृतिक पहचान तक सीमित रखा गया था। यह पहल उन्हीं स्थानीय स्वादों को ब्रांडिंग, बाजार और आर्थिक अवसरों से जोड़ने का प्रयास है। गौरतलब है कि जहाँ ODOP के माध्यम से जिलों के विशिष्ट उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा गया, वहीं ODOC इसी आर्थिक दृष्टिकोण को पाक परंपराओं तक विस्तार दे रहा है।
लोकल से ग्लोबल: योगी सरकार की रणनीति
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'लोकल से ग्लोबल' विजन के अनुरूप है, जिसे योगी सरकार प्रदेश स्तर पर साकार करने में जुटी है। IITF में ODOP और ODOC की संयुक्त उपस्थिति से उत्तर प्रदेश के उत्पाद और स्वाद, दोनों को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया जा सकेगा। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार स्थानीय कारीगरों और खाद्य उद्यमियों को मुख्यधारा के व्यापार से जोड़ने पर विशेष बल दे रही है।
आम जनता और उद्यमियों पर असर
IITF के मंच पर ODOC की मौजूदगी से स्थानीय स्वाद से जुड़े छोटे उद्यमियों, कारोबारियों और खाद्य व्यवसायियों के लिए नए बाजार और व्यापारिक संभावनाएं विकसित होने की उम्मीद है। प्रदेश की पारंपरिक पाक विरासत को केवल सांस्कृतिक धरोहर के रूप में देखने के बजाय उसे एक ब्रांडेड, बाजार-उन्मुख पहचान देना इस योजना का दीर्घकालिक लक्ष्य है। आगे देखें तो यह पहल उत्तर प्रदेश के पाक ब्रांड को राष्ट्रीय और संभावित रूप से अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की आधारशिला बन सकती है।