30 जुलाई 2026
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क्या चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार की अपील को खारिज कर दिया?

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क्या चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार की अपील को खारिज कर दिया?

सारांश

पश्चिम बंगाल सरकार की अपील को चुनाव आयोग द्वारा खारिज किए जाने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। क्या यह मामला चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करेगा? जानिए पूरी कहानी।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल सरकार की अपील खारिज हुई।
चार चुनावी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने आयोग की आलोचना की।
मतदाता सूची में फर्जी नामों का मुद्दा गंभीर है।
चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर जोर।

कोलकाता, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने पश्चिम बंगाल सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। राज्य सरकार ने दो विधानसभा क्षेत्रों में कथित तौर पर मतदाता सूची में फर्जी या अनुपस्थित मतदाताओं के नाम अवैध रूप से शामिल करने के आरोप में चार अधिकारियों के खिलाफ निलंबन आदेश को वापस लेने की मांग की थी।

चुनाव आयोग के नई दिल्ली स्थित मुख्यालय ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय को सूचित किया कि जिला मजिस्ट्रेट आयोग के पहले के आदेश के अनुसार इन चार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे। सीईओ कार्यालय के एक अंदरूनी सूत्र ने इसकी पुष्टि की।

आरोपी अधिकारियों में दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र के चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) देबोत्तम दत्ता चौधरी और उसी निर्वाचन क्षेत्र के सहायक चुनावी पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) तथागत मंडल हैं। अन्य दो अधिकारी पूर्वी मिदनापुर जिले के मोयना विधानसभा क्षेत्र के ईआरओ बिप्लब सरकार और उसी निर्वाचन क्षेत्र के एईआरओ सुदीप्त दास शामिल हैं।

पिछले साल अगस्त में चुनाव आयोग ने चारों अधिकारियों को निलंबित करने और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा, एक संविदा पर काम करने वाले डेटा एंट्री ऑपरेटर को भी ड्यूटी से हटा दिया गया था। हालांकि, पश्चिम बंगाल सरकार ने आदेश को आंशिक रूप से लागू किया। चारों अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था, लेकिन उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस निर्देश की आलोचना की थी और उस पर भाजपा का 'बंधुआ मजदूर' होने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार अपने कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी।

इस महीने की शुरुआत में फिर से चुनाव आयोग ने दक्षिण 24 परगना और पूर्वी मिदनापुर के जिला मजिस्ट्रेटों को चार चुनावी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। हालांकि, एक प्रक्रिया से पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने शुक्रवार को सीईओ कार्यालय के जरिए चुनाव आयोग को एक आधिकारिक सूचना भेजी, जिसमें आरोपी अधिकारियों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस लेने का अनुरोध किया गया था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या निर्वाचन आयोग का निर्णय अंतिम है?
हां, निर्वाचन आयोग का निर्णय अंतिम होता है और इसमें अपील करने की कोई गुंजाइश नहीं होती।
इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी?
आयोग ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का इस पर क्या कहना है?
उन्होंने आयोग के निर्णय पर आलोचना की और इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया।
राष्ट्र प्रेस
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