क्या तमिलनाडु में समुंदर किनारे ओलिव रिडले कछुओं के घोंसला बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है?

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क्या तमिलनाडु में समुंदर किनारे ओलिव रिडले कछुओं के घोंसला बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है?

सारांश

तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में ऑलिव रिडले कछुओं के घोंसला बनाने की प्रक्रिया अब तेजी से बढ़ रही है। 9,000 अंडे मिल चुके हैं। क्या आने वाले समय में और भी कछुए लौटेंगे? जानिए इस प्रक्रिया के बारे में और क्या हैं इसके पीछे के कारण।

Key Takeaways

  • ऑलिव रिडले कछुओं का संरक्षण महत्वपूर्ण है।
  • घोंसला बनाने की प्रक्रिया में 9,000 अंडे मिलना एक अच्छी खबर है।
  • समुद्र की स्थिति में सुधार से कछुओं की गतिविधि में तेजी आ सकती है।
  • फरवरी का महीना घोंसला बनाने का सबसे अच्छा समय है।
  • नागपट्टिनम और मयिलादुथुराई में हैचरी की संख्या बढ़ रही है।

चेन्नई, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु के तटीय डेल्टा में, विशेषकर मयिलादुथुराई और नागपट्टिनम जिलों में, सीजन की धीमी शुरुआत के बाद ऑलिव रिडले कछुओं की घोंसला बनाने की गतिविधि अब तेजी पकड़ने लगी है। ये समुद्री कछुओं की अन्य प्रजातियों की तुलना में आकार में छोटे होते हैं। इनका वजन लगभग 35–45 किलोग्राम होता है। ये मादा कछुए अंडे देने के लिए अक्सर उसी तट पर लौटते हैं जहां इनका जन्म हुआ था।

ऑलिव रिडले कछुए को भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षण प्राप्त है।

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मयिलादुथुराई में अब तक 48 घोंसले और नागपट्टिनम में 24 घोंसले रिकॉर्ड किए गए हैं, जिससे इस सीजन में जमा किए गए अंडों की कुल संख्या 9,000 से ज्यादा हो गई है।

विशेष रूप से मयिलादुथुराई में घोंसला बनाने का मौसम सामान्य से देर से शुरू हुआ। जहां नागपट्टिनम में 13 दिसंबर 2025 को पहला घोंसला देखा गया, वहीं मयिलादुथुराई में पहला घोंसला 31 दिसंबर 2025 को ही रिकॉर्ड किया गया।

अधिकारियों ने कछुओं के देर से आने का कारण समुद्र की खराब स्थिति और पानी भरे, सख्त समुद्र तटों को बताया, जिससे मौसम के शुरुआती दौर में कछुओं के लिए किनारे पर आकर अंडे देना मुश्किल हो गया था।

अब समुद्र की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, इसलिए अधिकारियों को उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में घोंसला बनाने की गतिविधि तेज होगी।

फरवरी को पारंपरिक रूप से इस तट पर घोंसला बनाने का सबसे अच्छा समय माना जाता है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जैसे-जैसे ज्वार और मौसम की स्थिति बेहतर होगी और भी कछुए आएंगे।

मयिलादुथुराई में अब तक पहचाने गए 48 घोंसलों से 5,750 अंडे सुरक्षित किए गए हैं। नागपट्टिनम में घोंसला बनाने की गतिविधि पहले शुरू हो गई थी, लेकिन यह सामान्य रही है, और अब तक 24 घोंसलों से 3,574 अंडे जमा किए गए हैं।

हालांकि, पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश के कारण रात की पेट्रोलिंग और मॉनिटरिंग में रुकावट आई है, जिसके चलते इस दौरान घोंसलों की संख्या में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है।

वन अधिकारियों को उम्मीद है कि वीकेंड पर अमावस्या के साथ ही घोंसला बनाने की गतिविधि में बढ़ोतरी होगी। ओलिव रिडले कछुए अमावस्या और पूर्णिमा के दौरान बड़ी संख्या में किनारे पर आते हैं, जब ज्वार-भाटा के कारण पानी का स्तर बढ़ जाता है, जिससे कछुओं के लिए अपने घोंसले वाले समुद्र तटों तक पहुंचना आसान हो जाता है।

नागपट्टिनम जिले में अभी नौ हैचरी चल रही हैं, जिनमें नागपट्टिनम और वेदारण्यम वन क्षेत्रों में पांच स्थायी और चार अस्थायी सुविधाएं शामिल हैं। मयिलादुथुराई में 11 हैचरी चल रही हैं, जिनमें सिरकाजी और मयिलादुथुराई वन क्षेत्रों में तीन स्थायी और आठ अस्थायी इकाइयां शामिल हैं।

Point of View

यह समाचार तमिलनाडु में समुद्री जीवन के संरक्षण के प्रयासों को उजागर करता है। ऑलिव रिडले कछुओं का संरक्षण न केवल पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमारी समुद्री जैव विविधता को भी बनाए रखता है। हमें इन प्रयासों का समर्थन करना चाहिए।
NationPress
18/01/2026

Frequently Asked Questions

ऑलिव रिडले कछुओं के घोंसला बनाने का समय क्या है?
फरवरी का महीना आमतौर पर इस तट पर घोंसला बनाने के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है।
क्या ऑलिव रिडले कछुओं की अन्य प्रजातियों से तुलना में आकार में छोटे होते हैं?
हाँ, ये कछुए अन्य समुद्री कछुओं की तुलना में छोटे होते हैं और इनका वजन लगभग 35-45 किलोग्राम होता है।
क्या कछुए उसी तट पर लौटते हैं जहाँ उनका जन्म हुआ?
जी हाँ, मादा कछुए अंडे देने के लिए अक्सर उसी तट पर लौटते हैं जहाँ उनका जन्म हुआ था।
क्या कछुओं की घोंसला बनाने की प्रक्रिया में कोई रुकावट आई है?
हाँ, हाल में लगातार बारिश के कारण पेट्रोलिंग और मॉनिटरिंग में रुकावट आई है।
कछुओं के घोंसला बनाने की गतिविधि में वृद्धि कब होने की उम्मीद है?
अधिकारियों को उम्मीद है कि वीकेंड पर अमावस्या के साथ घोंसला बनाने की गतिविधि में बढ़ोतरी होगी।
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