महाकुंभ अमृत सम्मान-2025: नई दिल्ली में वैश्विक पुस्तक विमोचन समारोह संपन्न, बिहार राज्यपाल रहे मुख्य अतिथि
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में 1 अगस्त 2025 (शनिवार) को वैश्विक पुस्तक विमोचन-विमर्श-विभूषण समारोह एवं महाकुंभ अमृत सम्मान-2025 का भव्य आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। साहित्य, न्यायपालिका, शिक्षा, पत्रकारिता, अध्यात्म, कला एवं सामाजिक सेवा जैसे विविध क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति में यह समारोह ज्ञान, संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों के संरक्षण को समर्पित रहा।
मुख्य अतिथि एवं गणमान्य उपस्थिति
समारोह के मुख्य अतिथि बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) रहे। इस अवसर पर सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण (एनसीएलएटी) के पूर्व अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक भूषण, पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह, हिन्दुस्तान टाइम्स, लखनऊ के पूर्व रेजिडेंट एडिटर एवं वरिष्ठ पत्रकार रतन मणि लाल, वरिष्ठ फिल्म इतिहासकार एवं फिल्म निर्माता डॉ. राजीव श्रीवास्तव, बॉलीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल, जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय, बाल्टीमोर (अमेरिका) के प्रोफेसर डॉ. शुभ्रांशु रंजन, अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक गुरु अनंत अशोक महाराज (जम्मू महाराज जी) तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रयागराज के अधिवक्ता, लेखक एवं समाज चिंतक डॉ. गोविंद कुमार सक्सेना सहित अनेक गणमान्य व्यक्तित्व उपस्थित रहे।
पुस्तक विमोचन एवं बौद्धिक विमर्श
कार्यक्रम का शुभारंभ वैश्विक पुस्तक विमोचन से हुआ, जिसमें भारत एवं विदेशों के प्रतिष्ठित लेखकों, विद्वानों और शोधकर्ताओं की रचनाओं का लोकार्पण किया गया। इसके पश्चात आयोजित 'विमर्श' बौद्धिक संगोष्ठी में भारतीय संस्कृति, साहित्य, शिक्षा, सनातन दर्शन, संवैधानिक मूल्यों, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। वक्ताओं ने एकमत से ज्ञान, संवाद और सांस्कृतिक चेतना को राष्ट्र की प्रगति का मूल आधार बताया।
राज्यपाल एवं न्यायविदों के विचार
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने अपने उद्बोधन में महाकुंभ को विश्व की महानतम आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ भारत की सनातन सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत, आस्था, एकता एवं मानवता का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पुस्तकें हमारी संस्कृति, ज्ञान और परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं, जो नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने का सेतु बनती हैं।
न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने महाकुंभ के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए इसे भारत की आध्यात्मिक परंपरा का अद्वितीय प्रतीक निरूपित किया। न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने समारोह में विमोचित पवित्र ग्रंथ का सार प्रस्तुत करते हुए उसके साहित्यिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व तथा वर्तमान समाज में उसकी प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार रखे।
महाकुंभ अमृत सम्मान-2025: सम्मान समारोह
समारोह का केंद्रबिंदु महाकुंभ अमृत सम्मान-2025 रहा, जिसका आयोजन डॉ. गोविंद कुमार सक्सेना के संरक्षण में डॉ. राजीव श्रीवास्तव (स्वर संसार एवं कल्चरल सोसाइटी, नई दिल्ली) एवं श्री चंद्र शेखर (सोशल ट्रांसफॉर्मेशन फाउंडेशन, लखनऊ) द्वारा किया गया। साहित्य, शिक्षा, न्यायपालिका, पत्रकारिता, कला, स्वास्थ्य, शोध, उद्योग, अध्यात्म एवं सामाजिक सेवा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विशिष्ट व्यक्तित्वों एवं संस्थाओं को यह सम्मान प्रदान किया गया।
आगे की राह
देश-विदेश से आए लेखकों, शिक्षाविदों, अधिवक्ताओं, पत्रकारों, शोधकर्ताओं, उद्यमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने इस आयोजन को स्मरणीय बना दिया। आयोजन समिति ने विश्वास जताया कि यह समारोह साहित्य, संस्कृति, ज्ञान एवं मानवीय मूल्यों के संवर्धन और भावी पीढ़ी को प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।