नीट-यूजी 2026 काउंसलिंग 4 अगस्त से शुरू, 8 सितंबर से शैक्षणिक सत्र: एनटीए का पूरा कार्यक्रम
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने 1 अगस्त 2026 को घोषणा की कि नीट-यूजी 2026 के अखिल भारतीय कोटा (एआईक्यू) के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया 4 अगस्त से आरंभ होगी और स्नातक पाठ्यक्रमों का शैक्षणिक सत्र 8 सितंबर 2026 से शुरू किया जाएगा। एजेंसी ने एआईक्यू और राज्य कोटा दोनों के लिए विस्तृत काउंसलिंग कार्यक्रम जारी कर दिया है।
काउंसलिंग का चरणवार कार्यक्रम
एनटीए द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, अखिल भारतीय कोटा / मानित और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए काउंसलिंग का पहला चरण 4 अगस्त से 17 अगस्त तक चलेगा। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 22 अगस्त और दस्तावेज़ सत्यापन की तिथि 23 अगस्त निर्धारित की गई है।
राज्य कोटा काउंसलिंग का पहला चरण 13 अगस्त से 22 अगस्त के बीच होगा, जबकि शामिल होने वाले उम्मीदवारों का सत्यापन 29 अगस्त को किया जाएगा। एआईक्यू काउंसलिंग का दूसरा चरण 24 अगस्त से 2 सितंबर और राज्य कोटा काउंसलिंग का दूसरा चरण 31 अगस्त से 8 सितंबर के बीच आयोजित होगा।
तीसरे दौर की काउंसलिंग और शेष रिक्तियों को भरने के बाद एआईक्यू तथा राज्य कोटा दोनों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर 2026 रखी गई है।
छुट्टियों में भी जारी रहेगी प्रवेश प्रक्रिया
एनटीए ने मेडिकल कॉलेजों को जारी परिपत्र में स्पष्ट किया है कि काउंसलिंग के लिए उपलब्ध सीमित समय को देखते हुए सभी भाग लेने वाले संस्थानों को शनिवार, रविवार और राजपत्रित छुट्टियों को भी कार्य दिवस मानना होगा। एजेंसी ने कहा कि समय सारिणी का पूर्ण पालन अनिवार्य है।
इसके अतिरिक्त, प्रवेश लेने वाले उम्मीदवारों का डेटा डीएमई / राज्य काउंसलिंग प्राधिकरणों द्वारा मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) को तीसरे दौर की सीट प्रोसेसिंग के दौरान साझा किया जाएगा।
पुनर्परीक्षा के बाद आया परिणाम
गौरतलब है कि एनटीए ने 16 जुलाई 2026 को नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा का परिणाम घोषित किया था। यह पुनर्परीक्षा उस विवाद के बाद आयोजित की गई थी, जब 3 मई 2026 को हुई मूल परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों के चलते उसे रद्द करना पड़ा था।
एनटीए पर कार्रवाई और विवाद की पृष्ठभूमि
परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर में छात्रों के व्यापक प्रदर्शन हुए थे। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने हाल ही में 47 एनटीए पदाधिकारियों को बर्खास्त कर दिया और उनके विरुद्ध कानूनी तथा आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया। यह कदम देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता को पुनः स्थापित करने की दिशा में उठाया गया है।
अब जब काउंसलिंग की तिथियाँ घोषित हो चुकी हैं, लाखों अभ्यर्थियों की निगाहें इस प्रक्रिया के सुचारू संचालन पर टिकी हैं।