क्या तमिलनाडु के नमक्कल में अंडों की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई हैं?

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क्या तमिलनाडु के नमक्कल में अंडों की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई हैं?

सारांश

तमिलनाडु के नमक्कल में अंडों की कीमतें 6.25 रुपए प्रति अंडा तक पहुँच गई हैं, जो एक नया रिकॉर्ड है। इसके पीछे मौसमी मांग और त्योहारों का प्रभाव है। जानिए इस बढ़ती कीमतों के कारण और भविष्यवाणी के बारे में।

मुख्य बातें

अंडों की कीमत 6.25 रुपए प्रति अंडा तक पहुँची।
मौसमी मांग और त्योहारों का प्रभाव है।
भविष्य में कीमतें स्थिर रहने की उम्मीद है।

चेन्नई, 15 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु के नमक्कल जिले में अंडों की कीमतों ने नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। एशिया के सबसे बड़े पोल्ट्री हब में शामिल नमक्कल में सोमवार को अंडे का फार्म-गेट दाम 6.25 रुपए प्रति अंडा तक पहुँच गया है। नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी (एनईसीसी) के अनुसार, यह अब तक का सबसे ऊँचा स्तर है। एनईसीसी के नमक्कल जोन के चेयरमैन के. सिंगराज ने संशोधित दर की पुष्टि की है।

पोल्ट्री उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, अंडों की कीमतों में यह बढ़ोतरी पिछले एक महीने से जारी क्रमिक तेजी का परिणाम है। नमक्कल में 17 नवंबर को पहली बार अंडे की कीमत 6 रुपए प्रति अंडा तक पहुँची थी, जिसे पोल्ट्री सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव माना गया। इसके बाद 21 नवंबर को दाम बढ़कर 6.10 रुपए हो गया।

अनोखी बात यह है कि 6.10 रुपए की कीमत 22 दिनों तक, यानी 12 दिसंबर तक लगातार बनी रही। इतनी ऊँची कीमत पर इतनी लंबी अवधि के लिए स्थिरता रहना नमक्कल के पोल्ट्री इतिहास में दुर्लभ है। इसके बाद 13 दिसंबर को कीमत बढ़कर 6.15 रुपए हुई और 14 दिसंबर को 6.20 रुपए तक पहुँच गई। अब 15 दिसंबर से 6.25 रुपए प्रति अंडा की नई दर लागू हो गई है, जिसने एक नया रिकॉर्ड कायम कर दिया है।

एनईसीसी के अधिकारियों ने बताया कि अंडों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के पीछे कई मौसमी और बाजार से जुड़े कारण हैं। सर्दियों के मौसम में आमतौर पर अंडों की मांग बढ़ जाती है। इसके साथ ही क्रिसमस और नए साल के त्योहारों के चलते खपत में और इजाफा हुआ है।

इसके अलावा, उत्तर भारत के बाजारों में अंडों की बेहतर आवाजाही और निर्यात मांग के स्थिर बने रहने से भी कीमतों को मजबूती मिली है। एनईसीसी अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस बार सबरीमाला तीर्थयात्रा के बावजूद अंडों की मांग पर खास असर नहीं पड़ा है।

आमतौर पर सबरीमाला यात्रा के दौरान तमिलनाडु और केरल में अंडों की खपत में गिरावट देखी जाती है, लेकिन इस साल यह पारंपरिक गिरावट देखने को नहीं मिली और मांग लगभग स्थिर रही।

वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए एनईसीसी का अनुमान है कि अंडों की कीमतों में कमी आने की संभावना कम है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक आपूर्ति या खपत में कोई बड़ा और अचानक बदलाव नहीं होता, तब तक पोंगल त्योहार, जो जनवरी के मध्य में आता है, अंडों के दाम ऊँचे बने रह सकते हैं।

पोल्ट्री उद्योग में अंडे और चिकन की दैनिक कीमतें आमतौर पर मांग, आपूर्ति और बाजार संकेतों के आधार पर तय की जाती हैं। फिलहाल मांग आपूर्ति से अधिक बनी हुई है, ऐसे में उत्पादकों को उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में मौजूदा कीमतें बरकरार रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राष्ट्रीय बाजार पर भी प्रभाव डाल सकती है। ऐसे समय में जब त्योहारों का मौसम है, लोगों को यह जानना आवश्यक है कि खाद्य पदार्थों की कीमतें कैसे प्रभावित हो रही हैं।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंडों की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
अंडों की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे मौसमी मांग, त्योहारों का प्रभाव और उत्तरी बाजारों में बेहतर आवाजाही शामिल हैं।
क्या यह कीमतें पोंगल तक बनी रहेंगी?
विशेषज्ञों के अनुसार, पोंगल तक अंडों की कीमतें ऊँची रह सकती हैं, जब तक कि आपूर्ति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता।
राष्ट्र प्रेस
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