जीनत अमान की आंखों में आए आंसू, गोवा में ऑलिव रिडले कछुओं का अद्भुत अनुभव
सारांश
Key Takeaways
- जीनत अमान का गोवा में कछुओं के साथ अनुभव अत्यधिक भावुक था।
- पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
- सिर्फ 1,000 में से एक कछुआ ही बड़ा हो पाता है।
- गोवा का जल प्रदूषण से प्रभावित हो चुका है।
- मुख्यमंत्री से पर्यावरण के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की गई।
मुंबई, 23 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अभिनेत्री जीनत अमान अपने खास अनुभवों को अक्सर सोशल मीडिया पर साझा करके अपने प्रशंसकों के साथ जुड़ी रहती हैं। हाल ही में उनके एक पोस्ट में उन्होंने गोवा के ऑलिव रिडले कछुओं के बारे में चर्चा की।
जीनत ने गोवा में ऑलिव रिडले कछुओं के अंडों से बाहर निकलने के अद्भुत दृश्य को देख कर भावुकता का अनुभव किया। इंस्टाग्राम पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए उन्होंने लिखा कि यह उनके जीवन के उन क्षणों में से एक था, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी। सूर्यास्त के समय समुद्र तट पर हल्की ठंडी हवा और रेत के बीच, उन्होंने नवजात कछुओं को अपने जीवन की पहली बार समुद्र की ओर बढ़ते देखा, जिससे उनकी आंखों में आंसू आ गए।
जीनत ने बताया कि कुछ हफ्ते पहले सैकड़ों मादा कछुए समुद्र से निकलकर अपने अंडे देने के लिए घोंसले बनाने आई थीं। अब, चांदनी रात में, वे अंडे फूट गए हैं और गोवा वन विभाग के सदस्यों ने इन छोटे कछुओं की मदद की। उन्होंने रेत को हटाकर बच्चों को बाहर निकाला और उन्हें समुद्र की ओर जाने में सहायता की।
अभिनेत्री ने यह भी बताया कि इनमें से केवल 1,000 में से एक ही बड़ा हो पाता है, और उन्हें प्रदूषण, मछली पकड़ने वाली नावों और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
जीनत अमान ने मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत से अपील की कि वे गोवा में पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाएं, अन्यथा यह 'स्वर्ग' हमेशा के लिए खो जाएगा।
उन्होंने इस घटना को धरती की सहनशक्ति और सदियों पुरानी समझ से जोड़ा। जीनत ने कहा कि जब इंसानियत को इतनी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, तब कछुओं के जन्म पर भावुक होना अजीब लग सकता है, लेकिन प्रकृति से जुड़ाव और उसके प्रति दया ही मानवता को बचाए रख सकती है।
उन्होंने गोवा के पर्यावरण को लेकर गहरी चिंता जताई और लिखा कि आज गोवा का जल, नदियों और समुद्र में इतना प्रदूषित हो चुका है कि तैरना और मछली पकड़ना भी सुरक्षित नहीं रह गया है।