फैजुल्लागंज बाढ़: 50 हजार लोग प्रभावित, प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने किया राहत कार्यों का निरीक्षण
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ के फैजुल्लागंज क्षेत्र में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से करीब 50 हजार लोग और 6,500 घर बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इस संकट से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने राहत अभियान तेज़ कर दिया है और 16 अक्टूबर 2026 को प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा जनपद के प्रभारी मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की।
मुख्य घटनाक्रम
प्रभारी मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने शुक्रवार को सबसे पहले नगर निगम के कंट्रोल रूम पहुँचकर प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी, शिकायत निस्तारण और राहत कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक प्रभावित परिवार तक राहत सामग्री, स्वच्छ पेयजल और जरूरी सुविधाएँ समय पर पहुँचाई जाएँ।
नगर आयुक्त गौरव कुमार ने निरीक्षण के दौरान बताया कि गोमती का बढ़ा हुआ जलस्तर लगभग आठ किलोमीटर के दायरे को प्रभावित कर रहा है। नगर निगम और प्रशासन की टीमें लगातार मैदान में हैं और अस्थायी आश्रय स्थल, पेयजल आपूर्ति, खाद्य सामग्री वितरण, सफाई तथा स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
सरकार की प्रतिक्रिया
मंत्री खन्ना ने स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए नागरिकों को फिलहाल समर्सिबल पंप का इस्तेमाल न करने की सलाह देने और नियमित रूप से पानी के टैंकर भेजने के निर्देश दिए, ताकि दूषित जल से होने वाली बीमारियाँ रोकी जा सकें। उन्होंने जलभराव से प्रभावित घरों के सेप्टिक टैंकों की सफाई सक्शन मशीनों से कराने, नालियाँ साफ करने, कीटनाशक छिड़काव, फॉगिंग, एंटी लार्वा अभियान और आवश्यकता पड़ने पर ड्रोन से छिड़काव कराने के भी आदेश दिए।
महापौर सुषमा खर्कवाल ने नगर आयुक्त को निर्देश दिए कि नगर निगम के सभी उपलब्ध जल टैंकर और मोबाइल टॉयलेट प्रभावित इलाकों में तैनात किए जाएँ। उन्होंने जलनिकासी के साथ-साथ घरों, गलियों और सार्वजनिक स्थलों की सफाई तथा सैनिटाइजेशन पर विशेष ध्यान देने को कहा।
आम जनता पर असर
प्रभारी मंत्री ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों से पानी पूरी तरह निकलने में करीब एक सप्ताह लगने का अनुमान है। इसके बाद भी अगले 10 से 12 दिनों तक सफाई, कीटनाशक छिड़काव और सैनिटाइजेशन अभियान चलाना आवश्यक होगा, ताकि संक्रमण के खतरे को कम किया जा सके। प्रभावित बस्तियों में आवागमन के लिए चलने योग्य रास्ते तैयार करने और भविष्य में जलभराव रोकने के लिए इंटरलॉकिंग सड़कों सहित बुनियादी सुविधाओं की योजना बनाने के निर्देश भी दिए गए।
गौरतलब है कि लखनऊ जैसे बड़े शहरी केंद्र में इस पैमाने की बाढ़ प्रशासनिक चुनौतियों को उजागर करती है। 50 हजार प्रभावित नागरिकों की दैनिक ज़रूरतें — पेयजल, भोजन, स्वच्छता — बड़े पैमाने पर समन्वय की माँग करती हैं।
वरिष्ठ नेताओं का दखल
प्रभारी मंत्री खन्ना ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दे चुके हैं। इसके अतिरिक्त, रक्षा मंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह भी प्रभावित क्षेत्रों में पहुँचकर लोगों का हाल जान चुके हैं और राहत कार्यों का जायजा ले चुके हैं।
स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के सहयोग की मंत्री खन्ना ने सराहना की और स्पष्ट किया कि स्थिति सामान्य होने तक राहत एवं पुनर्वास कार्य अनवरत जारी रहेंगे।
क्या होगा आगे
प्रभारी मंत्री ने भविष्य में इस तरह की आपदा से बचने के लिए स्थायी समाधान तलाशने पर भी जोर दिया। उन्होंने गोमती नदी के किनारे बंधा बनाने सहित आवश्यक सुरक्षात्मक उपायों की संभावनाओं का आकलन करने और संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश अधिकारियों को दिए। यह दीर्घकालिक पहल लखनऊ के निचले इलाकों में बाढ़-पुनरावृत्ति की पुरानी समस्या से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।