16 अक्टूबर 2026
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लखनऊ बाढ़: मंत्री सुरेश खन्ना और मेयर सुषमा खर्कवाल ने गोमती किनारे प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया

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लखनऊ बाढ़: मंत्री सुरेश खन्ना और मेयर सुषमा खर्कवाल ने गोमती किनारे प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया

सारांश

लखनऊ में गोमती किनारे बाढ़ प्रभावित इलाकों में मंत्री सुरेश खन्ना और मेयर सुषमा खर्कवाल ने संयुक्त निरीक्षण कर राहत कार्य तेज़ करने के निर्देश दिए। करीब 1,000 नगर निगम कर्मचारी 20 दिनों से ज़मीन पर तैनात हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हवाई सर्वेक्षण कर चुके हैं।

मुख्य बातें

कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना और मेयर सुषमा खर्कवाल ने 16 अक्टूबर 2026 को गोमती नदी किनारे बाढ़ प्रभावित इलाकों का संयुक्त निरीक्षण किया।
करीब 1,000 नगर निगम कर्मचारी पिछले 20 दिनों से राहत एवं बचाव कार्यों में लगातार तैनात हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभावित इलाके का हवाई सर्वेक्षण कर पीड़ितों की मदद का भरोसा दिलाया।
बाढ़ के बाद बीमारियों की रोकथाम के लिए दवाओं का छिड़काव, कचरा निपटान और पेयजल व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रभावित इलाकों में संपर्क नंबर जारी; राहत शिविरों में भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित की गई है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के किनारे बाढ़ से प्रभावित निचले इलाकों का 16 अक्टूबर 2026 को प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना और लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल ने संयुक्त रूप से निरीक्षण किया। दोनों नेताओं ने मौजूद अधिकारियों को राहत कार्यों में तेज़ी लाने और राहत शिविरों में आवश्यक सुविधाएँ सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए।

बाढ़ की स्थिति और कारण

कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने निरीक्षण के दौरान कहा कि यह अत्यधिक वर्षा के कारण उत्पन्न एक प्राकृतिक आपदा है, जिसके चलते गोमती किनारे के निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। उन्होंने कहा, 'सरकार ने इस पूरे मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया है और पीड़ितों को हर संभव मदद पहुँचाई जा रही है।'

गौरतलब है कि गोमती नदी के किनारे बसे इलाके पहले भी भारी बारिश के दौरान जलभराव की समस्या से जूझते रहे हैं। यह स्थिति ऐसे समय में आई है जब राज्य भर में मानसून की असामान्य सक्रियता देखी जा रही है।

नगर निगम की राहत कोशिशें

मेयर सुषमा खर्कवाल ने बताया कि नगर निगम की टीम लगभग 20 दिनों से लगातार प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय है। उन्होंने कहा, 'हमारे करीब 1,000 कर्मचारी जमीन पर काम कर रहे हैं और नगर निगम की पूरी टीम यहाँ तैनात है।'

मंत्री खन्ना ने भी नगर निगम की टीम के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि मेयर, नगर आयुक्त और उनकी पूरी टीम पिछले कई दिनों से दिन-रात बाढ़ के प्रभाव को कम करने और लोगों की चुनौतियों को दूर करने में जुटी है।

स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष ध्यान

मेयर खर्कवाल ने बताया कि बाढ़ के बाद बीमारियों के फैलने का सबसे बड़ा खतरा होता है, इसलिए साफ-सफाई को प्राथमिकता दी जा रही है। दवाओं का छिड़काव, कचरे का निपटान और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में संपर्क नंबर भी जारी किए गए हैं। मेयर के अनुसार, जैसे ही कोई ज़रूरतमंद व्यक्ति सहायता के लिए कॉल करता है, उसे तुरंत राहत सामग्री और आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराई जाती हैं। राहत शिविरों में भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था की गई है।

मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप

मंत्री खन्ना ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं प्रभावित इलाके का हवाई सर्वेक्षण किया है और भरोसा दिलाया है कि सरकार इस संकट की घड़ी में प्रभावित सभी लोगों के साथ मज़बूती से खड़ी है। सरकार का लक्ष्य है कि किसी भी प्रभावित व्यक्ति को किसी तरह की परेशानी न हो।

स्वयंसेवी संस्थाओं और CSR का योगदान

मंत्री खन्ना ने राहत कार्यों में सहयोग कर रही स्वयंसेवी संस्थाओं और CSR (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) के ज़रिये मदद करने वाली कंपनियों और व्यक्तियों का विशेष रूप से धन्यवाद किया। आने वाले दिनों में जलस्तर घटने के साथ पुनर्वास की प्रक्रिया तेज़ होने की उम्मीद है, और प्रशासन प्रभावित परिवारों की दीर्घकालिक सहायता के लिए भी तैयारी कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि गोमती किनारे के निचले इलाके हर मानसून में बाढ़ की चपेट में क्यों आते हैं — और दीर्घकालिक जल निकासी व नदी प्रबंधन पर ठोस कदम कब उठाए जाएंगे। 1,000 कर्मचारियों की 20 दिन की तैनाती आपात प्रतिक्रिया की सीमा को रेखांकित करती है, जबकि स्थायी समाधान की अनुपस्थिति बार-बार इसी चक्र को दोहराती है। मुख्यमंत्री का हवाई सर्वेक्षण राजनीतिक प्रतिबद्धता दर्शाता है, पर मुआवज़े और पुनर्वास की पारदर्शी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ में बाढ़ की स्थिति क्यों बनी?
अत्यधिक वर्षा के कारण गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से किनारे के निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हुई। मंत्री सुरेश खन्ना ने इसे प्राकृतिक आपदा करार दिया है।
राहत कार्यों में कितने कर्मचारी तैनात हैं?
मेयर सुषमा खर्कवाल के अनुसार नगर निगम के करीब 1,000 कर्मचारी पिछले लगभग 20 दिनों से प्रभावित इलाकों में दिन-रात काम कर रहे हैं। मेयर, नगर आयुक्त और उनकी पूरी टीम भी लगातार मौके पर मौजूद है।
बाढ़ पीड़ितों को मदद कैसे मिल सकती है?
प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में संपर्क नंबर जारी किए हैं। जैसे ही कोई ज़रूरतमंद व्यक्ति कॉल करता है, उसे तुरंत राहत सामग्री और आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराई जाती हैं। राहत शिविरों में भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधा भी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कदम उठाए?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रभावित इलाके का स्वयं हवाई सर्वेक्षण किया है और भरोसा दिलाया है कि सरकार इस संकट की घड़ी में सभी प्रभावित लोगों के साथ मज़बूती से खड़ी है।
बाढ़ के बाद स्वास्थ्य को लेकर क्या सावधानियाँ बरती जा रही हैं?
बाढ़ के बाद बीमारियों के फैलने की आशंका को देखते हुए दवाओं का छिड़काव, कचरे का निपटान और स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है। मेयर खर्कवाल ने बताया कि साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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