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गोमती बाढ़: लखनऊ के फैजुल्लागंज में संघ-सेवा भारती के 65 कार्यकर्ता छह दिन से राहत में जुटे

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गोमती बाढ़: लखनऊ के फैजुल्लागंज में संघ-सेवा भारती के 65 कार्यकर्ता छह दिन से राहत में जुटे

सारांश

गोमती नदी की बाढ़ ने लखनऊ के फैजुल्लागंज में करीब 40 हज़ार परिवारों को प्रभावित किया है। RSS और सेवा भारती के 65 कार्यकर्ता छह दिनों से नावों के ज़रिए भोजन, पानी और ज़रूरी सामान पहुँचा रहे हैं — 10 हज़ार भोजन पैकेट और 30 हज़ार पानी की बोतलें वितरित हो चुकी हैं।

मुख्य बातें

गोमती नदी के बढ़े जलस्तर से लखनऊ के फैजुल्लागंज की बस्तियाँ बाढ़ की चपेट में हैं।
RSS और सेवा भारती के कार्यकर्ता 17 अक्टूबर तक छह दिनों से राहत अभियान चला रहे हैं।
अब तक 10 हज़ार भोजन पैकेट और 30 हज़ार पानी की बोतलें वितरित की जा चुकी हैं।
करीब 40 हज़ार परिवार प्रभावित; लगभग 25 हज़ार परिवार पलायन कर चुके हैं।
प्रतिदिन 65 कार्यकर्ता दो पालियों में नावों के ज़रिए राहत सामग्री पहुँचा रहे हैं।
क्षेत्र प्रचारक अनिल सहित वरिष्ठ पदाधिकारियों ने राहत कार्य का निरीक्षण किया।

गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से लखनऊ के फैजुल्लागंज क्षेत्र की दर्जनों बस्तियाँ बाढ़ की चपेट में हैं, और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) तथा सेवा भारती के कार्यकर्ता 17 अक्टूबर तक लगातार छह दिनों से राहत अभियान चला रहे हैं। जलभराव के कारण जिन बस्तियों तक सड़क मार्ग से पहुँचना संभव नहीं है, वहाँ नावों के ज़रिए भोजन, पेयजल और दैनिक उपयोग की सामग्री पहुँचाई जा रही है।

राहत अभियान का दायरा

संगठन की विज्ञप्ति के अनुसार, अब तक लगभग 10 हज़ार भोजन पैकेट और 30 हज़ार पानी की बोतलें वितरित की जा चुकी हैं। सुबह और शाम — दो पालियों में — भोजन और पेयजल बाँटा जा रहा है। इसके अतिरिक्त प्रभावित परिवारों को नमकीन, बिस्किट, लाई, चना, मच्छरबत्ती और माचिस जैसी आवश्यक वस्तुएँ भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

राहत कार्य में प्रतिदिन करीब 65 कार्यकर्ता दो पालियों में काम कर रहे हैं। स्वयंसेवक नावों के सहारे जलमग्न बस्तियों तक पहुँचकर जरूरतमंद परिवारों को सामग्री वितरित कर रहे हैं।

प्रभावित बस्तियाँ और परिवारों की स्थिति

फैजुल्लागंज क्षेत्र के दाऊद नगर, मामा कॉलोनी, यादव चौराहा और आसपास की बस्तियाँ सर्वाधिक प्रभावित बताई जा रही हैं। विज्ञप्ति के अनुसार, क्षेत्र के करीब 40 हज़ार परिवार बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इनमें से लगभग 25 हज़ार परिवार पलायन कर चुके हैं, जबकि शेष करीब 15 हज़ार परिवारों तक नियमित राहत पहुँचाने का प्रयास जारी है। संगठन का दावा है कि अब तक प्रभावित क्षेत्र के लगभग 80 प्रतिशत हिस्सों तक कार्यकर्ता पहुँच चुके हैं।

वरिष्ठ पदाधिकारियों ने लिया जायज़ा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक अनिल ने राहत अभियान का निरीक्षण किया। उनके साथ प्रांत सेवा प्रमुख देवेंद्र, सेवा भारती के कोषाध्यक्ष मंशाबक्श सिंह और लखनऊ के विभाग प्रचारक अनिल कुमार भी उपस्थित रहे। इन पदाधिकारियों ने राहत कार्य में लगे स्वयंसेवकों से चर्चा की और प्रभावित परिवारों के बीच पहुँचकर वितरण की स्थिति का जायज़ा लिया।

आगे क्या

गौरतलब है कि गोमती नदी में बाढ़ की स्थिति हर वर्ष लखनऊ के निचले इलाकों को प्रभावित करती है, लेकिन इस बार जलस्तर असामान्य रूप से ऊँचा बना हुआ है। संघ और सेवा भारती के कार्यकर्ताओं का प्रयास है कि जब तक जलस्तर सामान्य नहीं हो जाता, तब तक प्रभावित परिवारों को भोजन, पेयजल और दैनिक आवश्यक सामग्री निर्बाध रूप से मिलती रहे। राहत अभियान के जारी रहने की जानकारी दी गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी स्थायी समाधान — नदी के किनारे अतिक्रमण हटाना, जल निकासी व्यवस्था सुधारना — अब तक अधूरे हैं। संघ और सेवा भारती की राहत सराहनीय है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि 40 हज़ार परिवारों की इस पीड़ा में सरकारी तंत्र की भूमिका कहाँ है। स्वयंसेवी संगठनों की सक्रियता जितनी ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है कि प्रशासन इस संकट को हर साल की 'सामान्य घटना' मानकर न चले। जब तक बाढ़ की पुनरावृत्ति रोकने की दीर्घकालिक योजना नहीं बनती, राहत अभियान केवल लक्षणों का उपचार बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोमती नदी की बाढ़ से लखनऊ में कितने परिवार प्रभावित हुए हैं?
विज्ञप्ति के अनुसार, फैजुल्लागंज और आसपास के क्षेत्रों में करीब 40 हज़ार परिवार बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इनमें से लगभग 25 हज़ार परिवार पलायन कर चुके हैं और शेष 15 हज़ार परिवारों तक नियमित राहत पहुँचाई जा रही है।
RSS और सेवा भारती ने अब तक क्या राहत सामग्री वितरित की है?
संगठन के अनुसार, पिछले छह दिनों में करीब 10 हज़ार भोजन पैकेट और 30 हज़ार पानी की बोतलें वितरित की गई हैं। इसके अलावा नमकीन, बिस्किट, लाई, चना, मच्छरबत्ती और माचिस जैसी दैनिक ज़रूरत की वस्तुएँ भी दी जा रही हैं।
फैजुल्लागंज में राहत कार्य कैसे चलाया जा रहा है?
जलभराव के कारण सड़क मार्ग से अगम्य बस्तियों तक नावों के ज़रिए राहत सामग्री पहुँचाई जा रही है। प्रतिदिन 65 कार्यकर्ता सुबह और शाम की दो पालियों में काम कर रहे हैं।
किन बस्तियों में सबसे अधिक बाढ़ का असर है?
फैजुल्लागंज क्षेत्र के दाऊद नगर, मामा कॉलोनी और यादव चौराहा सर्वाधिक प्रभावित बस्तियों में शामिल हैं। संगठन के अनुसार प्रभावित क्षेत्र के करीब 80 प्रतिशत हिस्सों तक कार्यकर्ता पहुँच चुके हैं।
राहत अभियान का निरीक्षण किसने किया?
RSS के पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक अनिल ने राहत अभियान का जायज़ा लिया। उनके साथ प्रांत सेवा प्रमुख देवेंद्र, सेवा भारती के कोषाध्यक्ष मंशाबक्श सिंह और लखनऊ के विभाग प्रचारक अनिल कुमार भी मौजूद रहे।
राष्ट्र प्रेस
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