क्या बसंत पंचमी पर फर्रुखाबाद के पांचाल घाट पर भव्य शाही स्नान आयोजित हुआ?

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क्या बसंत पंचमी पर फर्रुखाबाद के पांचाल घाट पर भव्य शाही स्नान आयोजित हुआ?

सारांश

फर्रुखाबाद में बसंत पंचमी के पर्व पर माघ मेले का आयोजन हुआ। नागा साधुओं ने शाही स्नान यात्रा निकाली, जिसमें विभिन्न प्रकार के करतब और शोभायात्रा शामिल थी। यह मेला श्रद्धा और भक्ति के संगम का प्रतीक है।

Key Takeaways

  • फर्रुखाबाद में बसंत पंचमी का भव्य आयोजन हुआ।
  • नागा साधुओं ने शाही स्नान यात्रा निकाली।
  • श्रद्धालुओं ने साधुओं का स्वागत किया।
  • मेले में भक्ति और आस्था का संगम देखने को मिला।
  • साधुओं ने अद्भुत करतब दिखाए।

फर्रुखाबाद, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। फर्रुखाबाद के पांचाल घाट पर माघ मेला का आयोजन किया गया है। शुक्रवारबसंत पंचमी के इस महान पर्व पर भव्य कार्यक्रम संपन्न हुए। जूना अखाड़ा के नागा साधुओं ने महंत सत्य गिरी महाराज के नेतृत्व में शाही स्नान यात्रा निकाली।

इसका मेला व्यवस्थापकों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया। यात्रा गंगा किनारे से होते हुए छठी सीढ़ी पर पहुंची, जहां साधुओं ने शाही स्नान किया। स्नान के बाद यात्रा जूना अखाड़े में लौट आई और समापन हुआ। यात्रा के दौरान साधुओं ने अबीर-गुलाल उड़ाकर बसंत का स्वागत किया।

यात्रा में नागा साधुओं ने विभिन्न कला प्रदर्शन किए, जिन्हें देखकर श्रद्धालु प्रभावित हुए। यात्रा में सबसे आगे घोड़े थे और उनके पीछे साधु-संतों के साथ भगवान और गुरु की मूर्तियों वाली पालकियां थीं।

वैष्णव संप्रदाय के संतों ने भी पहली सीढ़ी से भव्य शोभायात्रा निकाली। भोलेपुर हनुमान मंदिर के महंत और वैष्णव संप्रदाय के अध्यक्ष मोहनदास महाराज की अगुवाई में यात्रा शुरू हुई। महंत पैदल चल रहे थे जबकि उनके पीछे बच्चे ध्वज-पताकाएं लेकर चल रहे थे।

यात्रा मेला बाजार से होते हुए प्रशासनिक कार्यालय क्षेत्र में पहुंची, जहां मेला अधिकारी ने साधुओं को माला पहनाकर सम्मानित किया। इस यात्रा में ठाकुर जी की पालकी भी शामिल थी।

अखिल भारतीय वैष्णव संप्रदाय और अखिल भारतीय श्री पंच तेरह भाई त्यागी चतुर्थ संप्रदाय के संतों ने भी अपनी-अपनी यात्राएं निकालीं। सभी यात्राएं गंगा घाट पर पहुंचीं, जहां साधु-संतों ने गंगा स्नान किया और पूजा-अर्चना की। इसके बाद शाही स्नान संपन्न हुआ।

श्रद्धालुओं ने संतों की आरती उतारी और उनका स्वागत किया। यात्रा परिक्रमा मार्ग से होते हुए छठी सीढ़ी पर स्थित जूना अखाड़ा में समाप्त हुई। यहां प्रसाद वितरण और भंडारे का आयोजन किया गया। मोहनदास महाराज के अनुसार इस बार बड़ी संख्या में साधु-संत पहुंचे हैं। मेला आस्था, भक्ति और संस्कृति का अद्भुत संगम बना हुआ है।

Point of View

बल्कि सांस्कृतिक विविधता को भी दर्शाया है। ऐसे आयोजनों से समाज में एकता और भाईचारे का संदेश फैलता है।
NationPress
12/03/2026

Frequently Asked Questions

बसंत पंचमी का महत्व क्या है?
बसंत पंचमी भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखती है, यह ज्ञान, कला और संगीत की देवी सरस्वती की पूजा का दिन है।
फर्रुखाबाद में माघ मेला कब आयोजित होता है?
फर्रुखाबाद में माघ मेला हर वर्ष माघ माह में आयोजित होता है।
शाही स्नान यात्रा का उद्देश्य क्या है?
शाही स्नान यात्रा का उद्देश्य धार्मिक आस्था का प्रदर्शन और साधुओं की महिमा को उजागर करना है।
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