क्या शॉर्ट फिल्म ‘जादूगोड़ा’ का 29 अगस्त को वर्ल्डवाइड प्रीमियर होगा?

सारांश
Key Takeaways
- फिल्म 'जादूगोड़ा' आदिवासी समुदायों के संघर्षों को उजागर करती है।
- यह फिल्म 29 अगस्त को रिलीज होगी।
- इसने कई अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं।
- फिल्म का निर्देशन सतीश मुंडा ने किया है।
- यह विकास के नाम पर मानवता की कीमत की कहानी है।
मुंबई, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भारत की यूरेनियम खदानों के आसपास निवास करने वाले आदिवासी समुदायों के संघर्षों को उजागर करने वाली फिल्म 'जादूगोड़ा' जल्द ही दर्शकों के सामने आएगी। यह शॉर्ट फिल्म ओटीटी प्लेटफार्म पर प्रदर्शित की जाएगी। इसकी रिलीज की तारीख अब तय हो गई है।
अल्ट्रा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट ग्रुप द्वारा निर्मित यह लघु फिल्म 29 अगस्त को अल्ट्रा बॉलीवुड यूट्यूब चैनल और अल्ट्रा प्ले ओटीटी पर उपलब्ध होगी। यह फिल्म पहले ही कई अंतर्राष्ट्रीय महोत्सवों में प्रशंसा प्राप्त कर चुकी है।
इस फिल्म ने टाटा द्वारा दिए जाने वाले 'सर्वश्रेष्ठ लघु कथा पुरस्कार' और 2024 के 'सर्वश्रेष्ठ युवा फिल्म निर्माता' के लिए सैमुअल लॉरेंस फाउंडेशन पुरस्कार भी जीते हैं।
'जादूगोड़ा' को कई फिल्म महोत्सवों में प्रदर्शित किया गया है और उसे वहां पर बहुत पसंद किया गया। इनमें कालीमंतन (इंडोनेशिया), किनो फेस्टिवल, पुणे शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल और साइंस फिल्म फेस्टिवल केरल जैसे प्रसिद्ध नाम शामिल हैं।
फिल्म के विषय पर चर्चा करते हुए, अल्ट्रा मीडिया एंड के सुशील कुमार अग्रवाल ने कहा, "जादूगोड़ा यह याद दिलाता है कि विकास अक्सर एक अदृश्य मानवीय कीमत पर होता है। हम हमेशा ऐसी कहानियों का समर्थन करते हैं, जो न केवल मनोरंजन करें, बल्कि सार्थक संवाद भी उत्पन्न करें। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु परीक्षण निषेध दिवस पर फिल्म का प्रदर्शन करना, वैश्विक दर्शकों तक इसके संदेश को पहुंचाने का हमारा प्रयास है, क्योंकि सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं करता, बल्कि संवादों को उत्पन्न करता है, कथाओं पर सवाल उठाता है, और उन कहानियों को आवाज देता है, जिन्हें दुनिया को सुनना चाहिए।"
इस शॉर्ट फिल्म के लेखक और निर्देशक सतीश मुंडा हैं। जादूगोड़ा, झारखंड का वह शहर है, जहां पर यूरेनियम खनन किया गया। इसके कारण हजारों आदिवासी लोग विस्थापित हो गए और इसकी विभीषिका से गुजरने को मजबूर हो गए। कहा जाता है कि आज भी यहां के लोग इसका दंश झेल रहे हैं।