6 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

फ्लीट सपोर्ट शिप 'सूर्या' नौसेना बेड़े में शामिल, राजनाथ सिंह बोले — 'समुद्री शक्ति की नई नींव'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
फ्लीट सपोर्ट शिप 'सूर्या' नौसेना बेड़े में शामिल, राजनाथ सिंह बोले — 'समुद्री शक्ति की नई नींव'

सारांश

'सूर्या' सिर्फ एक जहाज नहीं — यह भारत की समुद्री महत्वाकांक्षा का दृश्य रूप है। एक समारोह में जलावतरण, कील और नई अवसंरचना — तीनों एक साथ। हिंद महासागर में भारत की स्थायी पकड़ अब कागज़ी नहीं, इस्पात की होगी।

मुख्य बातें

फ्लीट सपोर्ट शिप-1 'सूर्या' को 6 अक्टूबर 2026 को भारतीय नौसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) में नए उन्नत स्लिपवे और 300 टन क्षमता वाले गोलियथ क्रेन का उद्घाटन किया।
दूसरे फ्लीट सपोर्ट शिप के निर्माण के लिए कील रखी गई — एक ही समारोह में तीन उपलब्धियाँ।
HSL को 2025 में मिनीरत्न श्रेणी-1 का दर्जा मिला, जो संस्थान की आर्थिक मज़बूती का संकेत है।
भारत का लक्ष्य 2047 तक अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में जहाज और समुद्री सेवाएँ निर्यात करना है।

भारतीय नौसेना का पहला स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप-1 'सूर्या' मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक रूप से नौसेना बेड़े में शामिल किया गया। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) में आयोजित जलावतरण समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस युद्धपोत को राष्ट्र को समर्पित किया। 'सूर्या' की तैनाती से भारतीय नौसेना की दूरस्थ समुद्री अभियानों में पहुँच और दीर्घकालिक सक्रियता उल्लेखनीय रूप से बढ़ेगी।

एक समारोह, तीन ऐतिहासिक उपलब्धियाँ

इस अवसर को विशेष बनाने वाली बात यह रही कि एक ही आयोजन में तीन महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। पहला, 'सूर्या' का जलावतरण; दूसरा, हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में नए उन्नत स्लिपवे और 300 टन क्षमता वाले गोलियथ क्रेन का उद्घाटन; और तीसरा, एक और फ्लीट सपोर्ट शिप के निर्माण के लिए कील रखना।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस संयोग को भारत की बढ़ती समुद्री सामर्थ्य का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, 'यह जलावतरण हमारी उपलब्धि का प्रतीक है, कील रखना हमारे संकल्प का प्रतीक है और नया स्लिपवे हमारी बढ़ती हुई क्षमता का प्रतीक है। आज हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में हम जहाज बनाने के साथ-साथ भारत की समुद्री शक्ति के भविष्य की नींव को और मजबूत कर रहे हैं।'

नौसेना की परिचालन क्षमता पर प्रभाव

फ्लीट सपोर्ट शिप की भूमिका नौसेना के बड़े युद्धपोतों को समुद्र में ईंधन, रसद और तकनीकी सहायता प्रदान करना है, जिससे वे बंदरगाह लौटे बिना लंबे अभियानों पर टिके रह सकते हैं। 'सूर्या' की तैनाती से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निरंतर समुद्री उपस्थिति सुनिश्चित होगी।

रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता और पसंदीदा सुरक्षा साझेदार के रूप में अपनी क्षमता बार-बार सिद्ध की है — चाहे वह मानवीय सहायता हो, आपदा राहत हो, समुद्री डकैती रोधी अभियान हो या निकासी कार्यक्रम।

हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड की भूमिका

हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड आठ दशकों से अधिक समय से देश की समुद्री और रक्षा जरूरतों को पूरा करता आया है। राजनाथ सिंह ने बताया कि रक्षा मंत्रालय के अधीन आने के बाद इसकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2025 में HSL को मिनीरत्न श्रेणी-1 का दर्जा प्रदान किया गया, जो इसके संस्थागत पुनरुद्धार की स्वीकृति है।

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की समुद्री शक्ति किसी एकल संस्था का काम नहीं — इसके लिए नौसेना, HSL, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), शिक्षण संस्थान, उद्योग, एमएसएमई और नव-उद्यमों की एकीकृत भागीदारी आवश्यक है।

आत्मनिर्भरता से वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक

राजनाथ सिंह ने रेखांकित किया कि पिछले एक दशक में भारत आयातित रक्षा प्लेटफार्म पर निर्भरता से आगे बढ़कर स्वयं उन्नत प्रणालियाँ विकसित करने की दिशा में बढ़ा है। उन्होंने कहा, 'आत्मनिर्भरता हमारी मंजिल का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जबकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा हमारी अगली बड़ी छलांग है।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य केवल अपनी नौसेना के लिए जहाज बनाना नहीं, बल्कि मित्र देशों और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों को भी समुद्री सेवाएँ निर्यात करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत 2047 के संकल्प के अनुरूप यह कदम समुद्री क्षेत्र में भारत की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।

आगे क्या होगा

दूसरे फ्लीट सपोर्ट शिप की कील रखी जा चुकी है, जो यह संकेत देता है कि हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में जहाज निर्माण की श्रृंखला अब निर्बाध रूप से जारी रहेगी। नया स्लिपवे और गोलियथ क्रेन HSL की उत्पादन क्षमता को कई गुना बढ़ाने में सहायक होंगे। भारतीय नौसेना के विस्तार की इस गति से स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में हिंद महासागर में भारत की सामरिक उपस्थिति और सुदृढ़ होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि जहाज निर्माण की यह गति बनी रहती है या नहीं। HSL दशकों तक क्षमता और ऑर्डर की कमी से जूझता रहा है — मिनीरत्न दर्जा एक स्वागत योग्य संकेत है, पर पर्याप्त नहीं। भारत की नौसेना अगले दो दशकों में जो विस्तार चाहती है, उसके लिए एकाधिक यार्ड में समानांतर उत्पादन और निजी क्षेत्र की गहरी भागीदारी जरूरी होगी। वैश्विक जहाज निर्यात का लक्ष्य तब तक कागज़ी रहेगा जब तक भारतीय यार्ड लागत, समयसीमा और तकनीकी मानकों में दक्षिण कोरिया या जापान से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फ्लीट सपोर्ट शिप 'सूर्या' क्या है?
'सूर्या' भारतीय नौसेना के लिए हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित पहला स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप है, जिसे 6 अक्टूबर 2026 को नौसेना बेड़े में शामिल किया गया। यह जहाज समुद्र में तैनात बड़े युद्धपोतों को ईंधन, रसद और तकनीकी सहायता प्रदान करेगा, जिससे वे लंबे समय तक बंदरगाह लौटे बिना अभियान जारी रख सकेंगे।
'सूर्या' से भारतीय नौसेना को क्या फायदा होगा?
फ्लीट सपोर्ट शिप की उपस्थिति से नौसेना की हिंद महासागर क्षेत्र में दूरस्थ अभियान क्षमता और दीर्घकालिक समुद्री उपस्थिति मज़बूत होगी। इससे मानवीय सहायता, आपदा राहत, समुद्री डकैती रोधी और निकासी अभियानों में तत्परता बढ़ेगी।
हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड को मिनीरत्न दर्जा कब मिला?
हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड को वर्ष 2025 में मिनीरत्न श्रेणी-1 का दर्जा प्रदान किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, रक्षा मंत्रालय के अधीन आने के बाद HSL की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और यह दर्जा उन्हीं प्रयासों का प्रमाण है।
6 अक्टूबर के समारोह में और क्या हुआ?
जलावतरण के साथ ही HSL में नए उन्नत स्लिपवे और 300 टन क्षमता वाले गोलियथ क्रेन का उद्घाटन किया गया। इसके अतिरिक्त, एक दूसरे फ्लीट सपोर्ट शिप के निर्माण की शुरुआत के लिए कील भी रखी गई — एक ही अवसर पर तीन उपलब्धियाँ दर्ज हुईं।
भारत का जहाज निर्माण में दीर्घकालिक लक्ष्य क्या है?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अनुसार, भारत का लक्ष्य केवल आत्मनिर्भर बनना नहीं, बल्कि मित्र देशों और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों को भी जहाज और समुद्री सेवाएँ निर्यात करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह लक्ष्य विकसित भारत 2047 की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 15 घंटे पहले
  3. 20 घंटे पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले