राजनाथ सिंह विशाखापटनम में बोले — समुद्र विकास और शक्ति का वाहक, नौसेना की ताकत पर जताया गर्व
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को विशाखापटनम में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को समुद्र को एक रणनीतिक अवसर के रूप में देखना होगा — न केवल सुरक्षा की दृष्टि से, बल्कि आर्थिक समृद्धि और राष्ट्रीय शक्ति के वाहक के रूप में भी। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना ने बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप खुद को सफलतापूर्वक ढाला है, जो एक उत्साहजनक संकेत है।
समुद्र — विकास का द्वार
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि समुद्री क्षेत्र भारत के भविष्य की धुरी है। उन्होंने कहा, 'आज हमारे पास स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर है। आज हमारे पास परमाणु पनडुब्बियाँ हैं। आज हमारे पास युद्धपोत हैं। आज हमारे पास स्कॉर्पियन श्रेणी की पनडुब्बियाँ हैं। सबसे बड़ी बात, हमारे पास वो जज्बा भी है, वो जुनून भी है और वो देशभक्ति भी है, जो किसी भी हथियार से बड़ी है।'
यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी नौसैनिक क्षमता को तेज़ी से स्वदेशी तकनीक के बल पर विस्तार दे रहा है। रक्षा मंत्री का यह संदेश स्पष्ट था — समुद्र केवल सीमा नहीं, बल्कि भारत की समृद्धि और प्रभाव का माध्यम है।
हिंद-प्रशांत में भारत का दबदबा
राजनाथ सिंह ने गर्व के साथ कहा, 'मुझे इस बात का गर्व है कि हिंद-प्रशांत महासागर में भारतीय नौसेना का डंका बजता है। मुझे इस बात का भी गर्व है कि जब-जब देश और दुनिया को जरूरत पड़ी है, हमारी नौसेना ने हमेशा अपना फर्ज निभाया है।'
उन्होंने नौसैनिकों को संबोधित करते हुए यह भी रेखांकित किया कि उनके पराक्रम के कारण ही भारतीय नौसेना आज विश्व की सर्वाधिक शक्तिशाली नौसेनाओं में शुमार की जाती है। गौरतलब है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की सक्रियता हाल के वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है, जिसमें क्वाड भागीदारी और द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
भारतीय सेनाओं का आधुनिकीकरण
रक्षा मंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत की तीनों सेनाएँ लगातार आधुनिकीकरण की ओर अग्रसर हैं। तीनों सेनाएँ नियमित रूप से विभिन्न देशों के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास में हिस्सा लेती हैं।
इसी क्रम में भारत और कजाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने वाला संयुक्त सैन्य अभ्यास 'काजिंद-2026' इस समय कजाकिस्तान के ओस्केमेन में जारी है। यह अभ्यास 28 सितंबर से 11 अक्टूबर 2026 तक चल रहा है और इसका यह नौवाँ संस्करण है।
काजिंद-2026: संयुक्त युद्धाभ्यास के मुख्य पहलू
इस अभ्यास में दोनों देशों के सैनिक युद्ध कौशल, समन्वय और संयुक्त अभियान क्षमता को सुदृढ़ कर रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न भूभागों में दिशा-निर्धारण, हथियार संचालन, सामरिक तैनाती और छोटे हथियारों से गोलीबारी का अभ्यास कराया गया। इसके अलावा संयुक्त योग सत्र और खेल गतिविधियों के माध्यम से टीम भावना और शारीरिक क्षमता को भी बल मिला।
यह अभ्यास भारत और कजाकिस्तान के बीच दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी की अभिव्यक्ति है। दोनों देशों के सैनिक एक-दूसरे के युद्धक अनुभव और रणनीतिक तौर-तरीकों को समझकर भविष्य के संयुक्त अभियानों के लिए तैयारी को परिष्कृत कर रहे हैं।
आगे की दिशा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का यह संबोधन भारत की 'समुद्री शक्ति' की दीर्घकालिक रणनीति की पुनः पुष्टि करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हिंद-प्रशांत में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत की नौसैनिक क्षमता का विस्तार और बहुपक्षीय सैन्य साझेदारियाँ आने वाले वर्षों में और अधिक केंद्रीय भूमिका निभाएँगी।