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सैरेक्स-2026 का उद्घाटन: रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने समुद्री बचाव में अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का आह्वान किया

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सैरेक्स-2026 का उद्घाटन: रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने समुद्री बचाव में अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का आह्वान किया

सारांश

रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने 7 अक्टूबर को सैरेक्स-2026 का उद्घाटन करते हुए समुद्री बचाव में अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का आह्वान किया। भारत के 46 लाख वर्ग किमी के विशाल समुद्री क्षेत्र की तैयारियों की समीक्षा हुई और ISRO की उपग्रह-आधारित बचाव क्षमता को सराहा गया।

मुख्य बातें

रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने 7 अक्टूबर 2026 को बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास सैरेक्स-2026 का उद्घाटन किया।
24वीं राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव बोर्ड बैठक की अध्यक्षता तटरक्षक महानिदेशक परमेश शिवमणि ने की।
भारत के 46 लाख वर्ग किलोमीटर के समुद्री खोज एवं बचाव क्षेत्र में तैयारियों की समीक्षा की गई।
ISRO की उपग्रह आधारित खोज एवं बचाव क्षमता में प्रगति को रेखांकित किया गया।
राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव पुरस्कार-2026 उत्कृष्ट बचाव कार्य के लिए प्रदान किए गए।

रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने 7 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में बहुराष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव अभ्यास 'सैरेक्स-2026' का औपचारिक उद्घाटन किया। यह बहु-एजेंसी अभ्यास समुद्र में संकटग्रस्त लोगों की जान बचाने की संयुक्त क्षमता को परखने और अंतरराष्ट्रीय समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।

अभ्यास का उद्देश्य और महत्त्व

सैरेक्स-2026 का लक्ष्य संकट की स्थिति में विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई की दक्षता परखना है। इसके अलावा, इस अभ्यास के जरिए बचाव अभियानों की तैयारियों को और सुदृढ़ बनाना तथा क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई ऊँचाई देना भी प्रमुख उद्देश्य हैं।

संजय सेठ ने उद्घाटन के अवसर पर 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' की भावना का उल्लेख करते हुए सभी देशों और एजेंसियों से समुद्र में जीवन की रक्षा के लिए एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने भारतीय तटरक्षक बल के आदर्श वाक्य 'वयम् रक्षामः' — अर्थात 'हम रक्षा करते हैं' — को भी याद किया और इसे समुद्री सुरक्षा की साझी जिम्मेदारी का प्रतीक बताया।

24वीं राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव बोर्ड बैठक

सैरेक्स-2026 से पूर्व 7 अक्टूबर को 24वीं राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव बोर्ड की बैठक आयोजित हुई। इसकी अध्यक्षता भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक और राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव बोर्ड के अध्यक्ष परमेश शिवमणि ने की।

बैठक में भारत के करीब 46 लाख वर्ग किलोमीटर के समुद्री खोज एवं बचाव क्षेत्र में तैयारियों की गहन समीक्षा की गई। इसमें तकनीक के बेहतर उपयोग, संकट संदेशों को त्वरित गति से संभालने, जहाजों की निगरानी, वास्तविक समय में सूचना साझाकरण और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर विस्तृत चर्चा हुई।

गौरतलब है कि बैठक में पिछले बचाव अभियानों और अभ्यासों से प्राप्त सीख को भविष्य की तैयारियों में शामिल करने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि संकट के समय बचाव दल और अधिक तत्परता से कार्य कर सकें।

समुद्री सुरक्षा: साझा जिम्मेदारी

रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने स्पष्ट किया कि समुद्री सुरक्षा की जिम्मेदारी किसी एक एजेंसी तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके लिए भारतीय नौसेना, तटरक्षक बल, वायुसेना, तटीय पुलिस, बंदरगाह, नागरिक एजेंसियाँ और समुद्री परिवहन क्षेत्र को मिलकर काम करना होगा। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं और बचाव तंत्र पर दबाव भी बढ़ा है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय भागीदारों के सहयोग को समुद्री सुरक्षा की रीढ़ बताया और कहा कि यह सहयोग भविष्य में और गहरा होना चाहिए।

उपग्रह आधारित बचाव क्षमता में प्रगति

रक्षा राज्यमंत्री ने भारत की उपग्रह आधारित खोज एवं बचाव क्षमता में हुई उल्लेखनीय प्रगति को रेखांकित किया और इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) तथा इससे जुड़े सभी दलों को बधाई दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि समुद्र में जान बचाने के लिए हर सेकंड बेशकीमती होता है, इसलिए खोज एवं बचाव व्यवस्था को और तेज, सटीक और सुदृढ़ बनाना अनिवार्य है।

विकसित भारत 2047 और समुद्री सुरक्षा का संकल्प

संजय सेठ ने इस अवसर पर विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को समुद्री सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि इस सपने का अर्थ केवल आर्थिक और तकनीकी रूप से सशक्त भारत नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और मजबूत समुद्री राष्ट्र बनना भी है। बैठक के दौरान राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव पुरस्कार-2026 भी प्रदान किए गए, जिनके जरिए समुद्र में असाधारण बचाव कार्य करने वाले प्रयासों को सम्मानित किया गया। आने वाले समय में इस अभ्यास से प्राप्त अनुभव भारत की समुद्री तैयारियों को और परिपक्व बनाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि रणनीतिक क्षमता निर्माण का हिस्सा मान रहा है — और यह सोच हिंद-प्रशांत में बढ़ती भारतीय भूमिका के अनुकूल है। विकसित भारत 2047 के साथ समुद्री सुरक्षा को जोड़ना नीतिगत दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, पर असली कसौटी यह है कि बजट आवंटन, जनशक्ति और बुनियादी ढाँचा इस महत्त्वाकांक्षा के अनुरूप बढ़ता है या नहीं। 46 लाख वर्ग किलोमीटर का जिम्मा उठाने के लिए केवल अभ्यास पर्याप्त नहीं — प्रतिक्रिया समय और उपकरण की सीमाएँ अभी भी ध्यान देने योग्य हैं।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सैरेक्स-2026 क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
सैरेक्स-2026 एक बहुराष्ट्रीय और बहु-एजेंसी समुद्री खोज एवं बचाव अभ्यास है, जिसका उद्घाटन 7 अक्टूबर 2026 को रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने किया। इसका उद्देश्य संकट की स्थिति में विभिन्न एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई परखना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना और बचाव अभियानों की तैयारियाँ मजबूत करना है।
24वीं राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव बोर्ड बैठक में क्या हुआ?
7 अक्टूबर 2026 को हुई इस बैठक की अध्यक्षता तटरक्षक महानिदेशक परमेश शिवमणि ने की। बैठक में भारत के 46 लाख वर्ग किलोमीटर के समुद्री बचाव क्षेत्र की तैयारियों की समीक्षा हुई और तकनीक, निगरानी व एजेंसियों के बीच तालमेल सुधारने पर चर्चा हुई।
भारत की उपग्रह आधारित समुद्री बचाव क्षमता में क्या प्रगति हुई है?
रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ ने बताया कि ISRO और इससे जुड़े दलों के प्रयासों से भारत की उपग्रह आधारित खोज एवं बचाव क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यह क्षमता समुद्र में संकटग्रस्त लोगों की तेज और सटीक पहचान में मदद करती है।
समुद्री सुरक्षा में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल हैं?
संजय सेठ के अनुसार, समुद्री सुरक्षा की जिम्मेदारी नौसेना, तटरक्षक बल, वायुसेना, तटीय पुलिस, बंदरगाह, नागरिक एजेंसियाँ और समुद्री परिवहन क्षेत्र सहित सभी की साझा जिम्मेदारी है। अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय भागीदारों का सहयोग भी इसमें अहम भूमिका निभाता है।
राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव पुरस्कार-2026 किसे दिए गए?
7 अक्टूबर 2026 की बैठक के दौरान राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव पुरस्कार-2026 प्रदान किए गए। ये पुरस्कार समुद्र में असाधारण बचाव कार्य करने वाले प्रयासों और दलों को सम्मानित करने के लिए दिए गए, हालाँकि विजेताओं के नाम आधिकारिक रूप से उपलब्ध विवरण में नहीं बताए गए हैं।
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