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यूएनजीए 81वें सत्र में भारत की वकालत: समुद्री क्षेत्रों की स्थिरता और द्वीपीय देशों की संप्रभुता

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यूएनजीए 81वें सत्र में भारत की वकालत: समुद्री क्षेत्रों की स्थिरता और द्वीपीय देशों की संप्रभुता

सारांश

यूएनजीए के 81वें सत्र में भारत ने बढ़ते समुद्री जलस्तर के खतरे के बीच द्वीपीय देशों की संप्रभुता और समुद्री क्षेत्रों की स्थिरता के लिए मजबूत आवाज उठाई। सिबी जॉर्ज ने UNCLOS, जलवायु न्याय और दक्षिण-दक्षिण सहयोग पर भारत का स्पष्ट पक्ष रखा।

मुख्य बातें

सिबी जॉर्ज ने 25 सितंबर 2026 को यूएनजीए के 81वें सत्र में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य दिया।
भारत ने समुद्री क्षेत्रों की स्थिरता और द्वीपीय व तटीय देशों की संप्रभुता की निरंतरता की वकालत की।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सी लेवल राइज घोषणा को अपनाए जाने का स्वागत किया और UNCLOS के महत्व पर जोर दिया।
भारत अनुदान, रियायती ऋण और भारत-यूएन विकास साझेदारी कोष के जरिए छोटे द्वीपीय विकासशील देशों को सहायता दे रहा है।
सिबी जॉर्ज ने UNRWA की मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लेकर फिलिस्तीनी लोगों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र में 25 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में आयोजित उच्चस्तरीय पूर्ण बैठक में भारत ने समुद्र के बढ़ते जलस्तर से उत्पन्न खतरों के संदर्भ में समुद्री क्षेत्रों की स्थिरता और द्वीपीय एवं तटीय देशों की संप्रभुता की निरंतरता की दृढ़ता से वकालत की। विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने इस अवसर पर भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत किया।

भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य और मुख्य रुख

सिबी जॉर्ज ने 'समुद्र के बढ़ते जलस्तर से उत्पन्न अस्तित्वगत खतरों से निपटने' विषय पर आयोजित इस बैठक में संयुक्त राष्ट्र की सी लेवल राइज घोषणा को अपनाए जाने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत तटीय क्षेत्रों की मजबूती, मैंग्रोव संरक्षण और आपदा-रोधी बुनियादी ढाँचे के निर्माण पर निरंतर कार्य कर रहा है।

उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने में समानता तथा साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों एवं संबंधित क्षमताओं (CBDR-RC) के सिद्धांत की अहमियत को दोहराया। यह ऐसे समय में आया है जब छोटे द्वीपीय विकासशील देश समुद्र के बढ़ते जलस्तर के कारण अपने अस्तित्व को लेकर गहरी चिंता में हैं।

समुद्री कानून और संप्रभुता की निरंतरता

सिबी जॉर्ज ने समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCLOS) के महत्व पर विशेष बल देते हुए कहा कि समुद्री क्षेत्रों की स्थिरता और द्वीपीय व तटीय देशों की राज्य व्यवस्था की निरंतरता सुनिश्चित करना अनिवार्य है। गौरतलब है कि जलस्तर वृद्धि के कारण कुछ द्वीपीय देशों की भूमि डूबने की आशंका है, जिससे उनकी समुद्री सीमाओं और संप्रभुता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।

शांति निर्माण और समावेशी विकास पर भारत का पक्ष

इससे पहले सिबी जॉर्ज ने संयुक्त राष्ट्र शांति निर्माण आयोग की मंत्रिस्तरीय बैठक में भी भाग लिया। उन्होंने शांति निर्माण में राष्ट्रीय स्वामित्व की केंद्रीय भूमिका पर जोर देते हुए भारत के राष्ट्र निर्माण के अनुभव साझा किए।

उन्होंने सत्ता के विकेंद्रीकरण, मानव-केंद्रित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और महिलाओं तथा युवाओं की भागीदारी पर आधारित समावेशी विकास को भारत की प्राथमिकता बताया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत अनुदान, रियायती ऋण और क्षमता निर्माण के माध्यम से विकासशील देशों — विशेषकर सबसे कम विकसित देशों और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों — को व्यापक सहयोग प्रदान कर रहा है।

फिलिस्तीनी मुद्दे पर भारत की प्रतिबद्धता

सिबी जॉर्ज ने संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (UNRWA) की मंत्रिस्तरीय बैठक में भी हिस्सा लिया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह फिलिस्तीनी लोगों के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है और UNRWA के साथ भारत की साझेदारी फिलिस्तीनी जीवन में ठोस एवं स्थायी बदलाव लाने की दिशा में भारत के प्रयासों को रेखांकित करती है।

आगे की राह

भारत-यूएन विकास साझेदारी कोष के जरिए द्वीपीय और तटीय देशों को सहायता जारी रहेगी। यूएनजीए के इस सत्र में भारत की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि नई दिल्ली वैश्विक जलवायु कूटनीति और दक्षिण-दक्षिण सहयोग में अपनी भूमिका को और मजबूत करने के इरादे में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस पर भारत की स्पष्ट स्थिति उसे इन देशों के साथ संबंधों में रणनीतिक बढ़त देती है। हालाँकि, CBDR-RC सिद्धांत पर जोर देते हुए भारत विकसित देशों पर अधिक जिम्मेदारी डालने का परंपरागत रुख अपना रहा है, जो विकासशील देशों को तो रास आता है, लेकिन पश्चिमी देशों के साथ जलवायु वार्ताओं में घर्षण का कारण बन सकता है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएनजीए में भारत ने समुद्री जलस्तर वृद्धि पर क्या रुख अपनाया?
भारत ने समुद्री क्षेत्रों की स्थिरता और द्वीपीय व तटीय देशों की संप्रभुता की निरंतरता सुनिश्चित करने की वकालत की। सिबी जॉर्ज ने UNCLOS के महत्व पर जोर देते हुए संयुक्त राष्ट्र की सी लेवल राइज घोषणा का स्वागत किया।
सिबी जॉर्ज कौन हैं और उन्होंने यूएनजीए में क्या कहा?
सिबी जॉर्ज विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) हैं। उन्होंने 25 सितंबर 2026 को यूएनजीए के 81वें सत्र में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य दिया और मैंग्रोव संरक्षण, आपदा-रोधी बुनियादी ढाँचे तथा जलवायु न्याय पर भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत छोटे द्वीपीय देशों की मदद कैसे कर रहा है?
भारत अनुदान, रियायती ऋण और क्षमता निर्माण के माध्यम से छोटे द्वीपीय विकासशील देशों को सहायता दे रहा है। इसके अलावा भारत-यूएन विकास साझेदारी कोष के जरिए भी इन देशों को वित्तीय और तकनीकी सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
यूएनजीए में भारत ने फिलिस्तीन के मुद्दे पर क्या रुख अपनाया?
सिबी जॉर्ज ने UNRWA की मंत्रिस्तरीय बैठक में भाग लिया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह फिलिस्तीनी लोगों के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और UNRWA के साथ भारत की साझेदारी को दर्शाता है।
CBDR-RC सिद्धांत क्या है और भारत इस पर क्यों जोर देता है?
CBDR-RC यानी 'साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियाँ और संबंधित क्षमताएँ' एक अंतरराष्ट्रीय जलवायु सिद्धांत है जो विकसित और विकासशील देशों की अलग-अलग जिम्मेदारियाँ तय करता है। भारत इस पर जोर देता है क्योंकि इससे विकासशील देशों को जलवायु कार्रवाई में उचित लचीलापन मिलता है और ऐतिहासिक उत्सर्जन के लिए विकसित देशों की जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
राष्ट्र प्रेस
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