यूएनजीए के 81वें सत्र में भारत का एजेंडा: बहुपक्षीय सुधार, आतंकवाद और ग्लोबल साउथ पर रहेगा ज़ोर
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र की वार्षिक आम बहस 23 सितंबर 2026 से न्यूयॉर्क में शुरू हो गई है, जहाँ भारत बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार, आतंकवाद से निपटने और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को अपने एजेंडे के केंद्र में रखेगा। यह बहस 26 सितंबर तक जारी रहेगी और 28 सितंबर को औपचारिक रूप से समाप्त होगी। इस साल का थीम 'भरोसा बहाल करना, बदलाव का प्रबंधन: एक संयुक्त राष्ट्र जो सभी के लिए काम करे' रखा गया है।
वैश्विक पृष्ठभूमि और सत्र की चुनौतियाँ
यह सत्र ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब दुनिया लंबे सशस्त्र संघर्षों, मानवीय आपातकालों, आर्थिक अस्थिरता और बड़ी शक्तियों के बीच गहराते मतभेदों से जूझ रही है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, विश्व नेताओं से संघर्ष, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जलवायु कार्रवाई, सतत विकास, महामारी की रोकथाम और आर्थिक लचीलेपन जैसे मुद्दों पर मंथन की उम्मीद है।
गौरतलब है कि आम बहस से इतर कई उच्च स्तरीय बैठकें भी होंगी, जिनमें परमाणु हथियारों का उन्मूलन, समुद्र के जलस्तर में वृद्धि, विकास का अधिकार और न्यायसंगत जलवायु परिवर्तन जैसे विषय शामिल हैं — ये सभी भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं से सीधे जुड़े हैं।
भारत का मुख्य एजेंडा: संस्थागत सुधार
भारत के औपचारिक बयान में यह रेखांकित किए जाने की उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को मौजूदा भू राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं का प्रतिबिंब बनना चाहिए। नई दिल्ली लंबे समय से यह तर्क देती आई है कि विकासशील देश उन संस्थाओं में अपर्याप्त प्रतिनिधित्व के साथ नहीं रह सकते जो अंतरराष्ट्रीय शांति, वित्त, विकास और प्रौद्योगिकी पर निर्णय लेती हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के विस्तार पर बहस एक बार फिर केंद्र में है। भारत इस मुद्दे पर सबसे मुखर आवाज़ों में से एक रहा है।
आतंकवाद पर भारत की कड़ी चेतावनी
आम बहस से पहले सुरक्षा परिषद की अफगानिस्तान पर हुई विशेष बैठक में भारतीय प्रतिनिधि ने आगाह किया कि 'अल कायदा के आतंकवादी तंत्र ने अफगानिस्तान की सीमाओं से परे अपनी रणनीतिक गहराई बना ली है।'
भारतीय प्रतिनिधि ने यह भी कहा, "वही सहिष्णु माहौल जिसने 9/11 के आर्किटेक्ट को पनाह दी थी, उसने बाद के वर्षों में भी अल कायदा से जुड़े संगठनों को जगह, समर्थन और दंड से मुक्ति देना जारी रखा।" उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि 11 सितंबर के हमलों को अंजाम देने वालों में से कई 'गुफाओं में छिपे भगोड़े नहीं थे', बल्कि उन्हें रिहायशी या शहरी इलाकों से पकड़ा गया था।
बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि अफगानिस्तान में अब भी 20 से अधिक आतंकवादी समूह सक्रिय हैं। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने चेताया कि महिलाओं और लड़कियों के साथ भेदभाव, कमज़ोर आर्थिक वृद्धि और गहराते मानवीय संकट के चलते अफगानिस्तान की बहाली की प्रक्रिया कमज़ोर पड़ रही है।
शांति अभियानों में सैनिक प्रदाता देशों को बड़ी भूमिका की माँग
भारत ने शांति अभियानों पर सुरक्षा परिषद की विशेष बहस में यह माँग रखी कि संयुक्त राष्ट्र मिशनों के लिए सैनिक और पुलिस बल भेजने वाले देशों को जनादेश तय करने या उसकी समीक्षा से पहले संस्थागत रूप से अपनी राय रखने का अवसर मिलना चाहिए।
भारत विश्व के सबसे बड़े शांति सेना योगदानकर्ता देशों में से एक है, इसलिए यह माँग केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि परिचालन अनुभव पर आधारित है। यह उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसके तहत भारत संयुक्त राष्ट्र तंत्र में निर्णय निर्माण को लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
आगे क्या होगा
आम बहस 28 सितंबर 2026 तक चलेगी। इस दौरान जलवायु कार्रवाई, परमाणु निरस्त्रीकरण और महामारी तैयारी पर उच्च स्तरीय समानांतर बैठकें भी आयोजित होंगी। भारत की ओर से इन सभी मंचों पर ग्लोबल साउथ की एकजुट आवाज़ उठाने की कोशिश रहेगी — और यह देखना होगा कि नई दिल्ली इस सत्र में कूटनीतिक गठजोड़ को किस हद तक आकार दे पाती है।