जयशंकर का UNGA में बड़ा बयान: भू-राजनीतिक तनाव में भी ग्लोबल साउथ की आवाज़ अहम रहेगी
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 25 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान स्पष्ट किया कि भू-राजनीतिक विखंडन, सशस्त्र संघर्ष, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक अनिश्चितता और तकनीकी उथल-पुथल के इस दौर में भी ग्लोबल साउथ की आवाज़ वैश्विक मंच पर निर्णायक बनी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया अब दो ध्रुवों या सीमित विकल्पों से परिभाषित नहीं होगी — देश अपने हितों, मूल्यों और आपसी भरोसे के आधार पर निर्णय लेते रहेंगे।
चर्चा का संदर्भ और प्रतिभागी
जयशंकर ने 'रप्चर्स एंड रैम्पार्ट्स: बिल्डिंग ब्रिजेज फॉर अ चेंजिंग वर्ल्ड' विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय परिचर्चा में हिस्सा लिया। इस सत्र में जमैका, घाना और सूरीनाम के विदेश मंत्री तथा ईस्ट-वेस्ट सेंटर की अध्यक्ष सेलेस्टे कॉनर्स भी उपस्थित रहीं। बैठक के बाद जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि सभी प्रतिभागियों में इस बात पर सहमति बनी कि संयुक्त राष्ट्र आज भी एक अपरिहार्य संस्था है, किंतु इसमें ऐसे सुधार अनिवार्य हैं जो ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं और समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करें।
IBSA बैठक और पहलगाम हमले की निंदा
जयशंकर ने दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला और ब्राज़ील के विदेश मंत्री माउरो विएरा के साथ IBSA विदेश मंत्रियों की बैठक में भी भाग लिया। तीनों देशों के संयुक्त बयान में पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई और आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की प्रतिबद्धता दोहराई गई। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव अपने चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत पहलगाम हमले के लिए वैश्विक एकजुटता जुटाने में लगा है।
UNSC सुधार और बहुपक्षवाद की माँग
तीनों IBSA देशों — भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका — ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में व्यापक सुधार की माँग करते हुए कहा कि इसे अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिक, वैध और समकालीन वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए। गौरतलब है कि UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी लंबे समय से चली आ रही है और IBSA का यह समन्वित रुख उस माँग को नई ताकत देता है।
ग्लोबल साउथ पर संघर्षों का असर
संयुक्त बयान में ग्लोबल साउथ पर सशस्त्र संघर्षों के प्रभाव — विशेष रूप से ऊर्जा व खाद्य असुरक्षा, महंगाई और वित्तीय दबावों — पर गहरी चिंता जताई गई। तीनों देशों ने संतुलित, निष्पक्ष और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार व्यवस्था का समर्थन किया, साथ ही महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाने तथा सामाजिक-आर्थिक बाधाओं को दूर करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
जलवायु, डिजिटल और AI एजेंडा
जलवायु परिवर्तन के मोर्चे पर तीनों देशों ने ग्लोबल साउथ में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना बढ़ाने, ऊर्जा दक्षता में सुधार और जैव ईंधन, बायोगैस तथा कम उत्सर्जन वाले हाइड्रोजन जैसे टिकाऊ ईंधनों के विस्तार का समर्थन किया। बैठक में डिजिटल अवसंरचना, सार्वभौमिक कनेक्टिविटी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के ज़रिए आर्थिक व सतत विकास की संभावनाओं पर भी विशेष ज़ोर दिया गया। आने वाले महीनों में इन प्रतिबद्धताओं के ठोस क्रियान्वयन पर वैश्विक नज़रें टिकी रहेंगी।