यूएन महासभा में जयशंकर की चेतावनी: ऑनलाइन स्कैम, आतंकवाद और तस्करी पर वैश्विक एकजुटता ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 27 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में कहा कि आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए एक लगातार बना हुआ खतरा है और सरकारी समर्थन से होने वाले सीमा पार आतंकवाद को 'वैश्विक व्यवस्था पर सीधा हमला' माना जाना चाहिए। भारत सहित कंबोडिया, कोलंबिया, डोमिनिकन रिपब्लिक, सेशेल्स और फिलीपींस ने एक साझे मंच से माँग की कि ऑनलाइन स्कैम सेंटर, मानव तस्करी और संगठित अपराध नेटवर्क से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सुदृढ़ किया जाए।
भारत का रुख: जीरो टॉलरेंस और एआई के दुरुपयोग पर चेतावनी
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति में कोई ढील बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दुरुपयोग को लेकर भी सचेत किया — उनका कहना था कि इससे पहले से मौजूद पक्षपात और गहरा हो सकता है और देशों तथा समुदायों के बीच आपसी सम्मान कमज़ोर पड़ सकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में एआई-आधारित साइबर धोखाधड़ी और डीपफेक के ज़रिए वित्तीय अपराध तेज़ी से बढ़ रहे हैं। जयशंकर ने नई तकनीक के दुरुपयोग को कट्टरपंथी नेटवर्क और राज्य-समर्थित आतंकवाद जैसी पुरानी सुरक्षा चुनौतियों से जोड़कर एक समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
कंबोडिया: ऑनलाइन स्कैम राष्ट्रीय प्राथमिकता
कंबोडिया के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री प्राक सोखोन ने कहा कि ऑनलाइन धोखाधड़ी से लड़ना उनके देश की 'सबसे बड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में से एक' है। उन्होंने माना कि एआई और डिजिटल तकनीक विकास को गति दे सकती है, लेकिन दुरुपयोग की स्थिति में ये असुरक्षा, असमानता और सीमा पार अपराधों को भी बढ़ावा दे सकती है।
सोखोन ने कहा, 'कोई भी देश अकेले इसमें कामयाब नहीं हो सकता।' कंबोडिया ने हाल ही में ऑनलाइन स्कैम पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें संयुक्त राष्ट्र ड्रग्स और क्राइम ऑफिस (UNODC) तथा इंटरपोल का सहयोग था। उन्होंने राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर मिलकर कार्रवाई की माँग की।
कोलंबिया और डोमिनिकन रिपब्लिक की अपील
कोलंबिया ने देशों से आतंकवाद की एक साझी कानूनी परिभाषा पर सहमत होने की अपील की। गौरतलब है कि ऐसी सर्वसम्मत परिभाषा के अभाव में आतंकियों पर मुकदमा चलाना, उनकी फंडिंग रोकना और आतंकवाद को अन्य हिंसा से अलग पहचानना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कठिन हो जाता है। कोलंबिया ने खुफिया जानकारी साझा करने और न्यायिक सहयोग बढ़ाने की भी माँग रखी।
डोमिनिकन रिपब्लिक के राष्ट्रपति लुइस अबिनाडर ने पड़ोसी देश हैती में आपराधिक संगठनों की बढ़ती गतिविधियों — इलाकों पर कब्ज़ा, हथियारों और मानव तस्करी तथा बच्चों की भर्ती — को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुमोदित सुरक्षा बल की पूर्ण तैनाती की माँग की, यह कहते हुए कि फिलहाल आवश्यक संख्या का केवल एक छोटा हिस्सा ही तैनात किया गया है।
सेशेल्स और फिलीपींस: छोटे देशों की विशेष चुनौतियाँ
सेशेल्स के राष्ट्रपति मैथ्यू हर्मिनी ने कहा कि सीमा पार संगठित अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध मछली पकड़ने जैसी गतिविधियाँ उनकी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को नुकसान पहुँचा रही हैं। उन्होंने तर्क दिया कि विशाल समुद्री क्षेत्र की निगरानी के लिए जिम्मेदार छोटे देशों से अमीर देशों जैसे सुरक्षा मानकों की अपेक्षा तब तक उचित नहीं है, जब तक उन्हें आवश्यक उपकरण और संसाधन न दिए जाएँ।
फिलीपींस की विदेश मंत्री थेरेसा लाजारो ने मानव तस्करी और प्रवासी कामगारों के शोषण की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रवासी का कानूनी दर्जा चाहे जो भी हो, उसे मानवाधिकारों की सुरक्षा मिलनी चाहिए और खतरनाक प्रवासी मार्गों पर बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की तत्काल ज़रूरत है।
क्या होगा आगे
UNGA में उठाई गई इन माँगों के आधार पर UNODC और इंटरपोल के साथ बहुपक्षीय सहयोग को और मज़बूत किए जाने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आतंकवाद की एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त परिभाषा नहीं बनती और तकनीकी निगरानी में संसाधन-असमानता दूर नहीं होती, तब तक ये नेटवर्क कानून की खामियों का फायदा उठाते रहेंगे।