कोच्चि में 'ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2' शुरू, 26 देशों के 254 प्रतिभागी भारतीय नौसेना के साथ समुद्री प्रशिक्षण में
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना के दक्षिणी नौसैनिक कमान मुख्यालय, कोच्चि में 21 जुलाई 2026 को 'ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2' का आगाज़ हुआ — यह चार दिवसीय बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत में पहली बार आयोजित किया जा रहा है। 26 देशों के 254 प्रतिभागी, 74 प्रशिक्षक और चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञ इसमें भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम का ढाँचा और उद्देश्य
यह प्रशिक्षण संयुक्त कार्यबल-154 (Combined Task Force-154) के तत्वावधान में आयोजित है, जिसका नेतृत्व वर्तमान में भारतीय नौसेना के पास है। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त समुद्री बलों (Combined Maritime Forces) के सहयोग से किया जा रहा है। थीम 'पोत प्रबंधन और विशेष प्रशिक्षण' रखी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य साझेदार देशों की समुद्री क्षमताओं, परिचालन समन्वय और पेशेवर तैयारी को सुदृढ़ करना है।
प्रशिक्षण में क्या-क्या शामिल
कार्यक्रम के पहले दिन संयुक्त राष्ट्र मादक पदार्थ एवं अपराध कार्यालय (UNODC) ने लाल सागर और पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र में उभरते समुद्री सुरक्षा खतरों पर विशेष सत्र आयोजित किया। प्रतिभागियों को नार्कोटिक्स-रोधी अभियान, समुद्री खतरों की पहचान, जहाज पर अग्निशमन, क्षति नियंत्रण, पोत संचालन, खगोलीय नौवहन, समुद्री संकट संचार प्रणाली और विपरीत परिस्थितियों में समुद्र में जीवित रहने के तरीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक सिमुलेटरों और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं का उपयोग इस दौरान किया जा रहा है। शेष तीन दिनों में प्रतिभागी पेशेवर सत्रों, सिमुलेटर-आधारित प्रशिक्षण और व्यावहारिक गतिविधियों में हिस्सा लेंगे।
उद्घाटन सत्र के प्रमुख वक्ता
संयुक्त कार्यबल-154 के कमांडर कमोडोर मिलिंद एम. मोकाशी ने उद्घाटन अवसर पर संबोधन दिया। संयुक्त समुद्री बलों के उप कमांडर कमोडोर डैन थॉमस ने उद्घाटन भाषण दिया, जबकि दक्षिणी नौसैनिक कमान के प्रशिक्षण प्रमुख रियर एडमिरल दीपक सिंघल ने मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत किया। वक्ताओं ने समकालीन समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए बहुराष्ट्रीय सहयोग और अनुभवों के आदान-प्रदान की अनिवार्यता पर बल दिया।
भारत के लिए रणनीतिक महत्व
यह आयोजन भारतीय नौसेना और संयुक्त समुद्री बलों के बीच बढ़ते सहयोग की दिशा में एक उल्लेखनीय पड़ाव माना जा रहा है। गौरतलब है कि हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री डकैती, नशीले पदार्थों की तस्करी और अन्य सुरक्षा खतरे बढ़ते जा रहे हैं — ऐसे में यह प्रशिक्षण अभ्यास क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। दक्षिणी नौसैनिक कमान द्वारा आयोजित यह पहल भारत को क्षेत्र में एक पसंदीदा सुरक्षा और प्रशिक्षण साझेदार के रूप में स्थापित करती है।
आगे क्या होगा
चार दिवसीय इस कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी देश सामूहिक समुद्री सुरक्षा को मज़बूत करने वाले विभिन्न परिदृश्यों पर काम करेंगे। भारतीय नौसेना के अनुसार, यह कार्यक्रम सहभागी देशों के बीच दीर्घकालिक पेशेवर संबंधों और क्षमता निर्माण की नींव रखेगा।