भारत-अमेरिका नौसेना EOD अभ्यास 10 अगस्त से कोच्चि में, समुद्री विस्फोटक खतरों से निपटने की होगी संयुक्त ट्रेनिंग
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना और अमेरिकी नौसेना का संयुक्त एक्सप्लोसिव ऑर्डनेंस डिस्पोजल (EOD) अभ्यास 10 से 14 अगस्त 2026 तक कोच्चि स्थित नौसेना दक्षिणी कमान में आयोजित किया जाएगा, जिसमें दोनों देशों के विशेषज्ञ गोताखोर और विस्फोटक निष्क्रियकरण दल समुद्री विस्फोटक खतरों की पहचान और उनसे निपटने के तरीके साझा करेंगे। यह इस द्विपक्षीय प्रशिक्षण श्रृंखला का आठवाँ संस्करण है, जो वर्ष 2005 से निरंतर जारी है।
अभ्यास का स्वरूप और उद्देश्य
पाँच दिवसीय इस अभ्यास में विशेषज्ञों के बीच तकनीकी चर्चाएँ, संयुक्त प्रशिक्षण सत्र, उपकरणों का प्रदर्शन और वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित व्यावहारिक परिदृश्य शामिल होंगे। नौसेना के अनुसार, इसका लक्ष्य केवल कौशल विकास तक सीमित नहीं है — दोनों पक्षों के बीच आपसी भरोसा, तालमेल और संयुक्त संचालन क्षमता को मज़बूत करना भी इसका अहम मकसद है।
अभ्यास के दौरान दोनों नौसेनाएँ यह समझने का प्रयास करेंगी कि किसी समुद्री क्षेत्र में संदिग्ध विस्फोटक मिलने, पानी के भीतर खतरा उत्पन्न होने या किसी जटिल स्थिति में दोनों देश मिलकर किस प्रकार त्वरित और सुरक्षित कार्रवाई कर सकते हैं।
तकनीकी आदान-प्रदान की विशेषता
इस अभ्यास की प्रमुख विशेषता यह है कि दोनों देशों के विशेषज्ञ EOD की आधुनिक तकनीकों, नई प्रौद्योगिकियों और वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही बेहतर कार्यप्रणालियों पर जानकारी साझा करेंगे। दोनों पक्ष एक-दूसरे की क्षमताओं, संचालन की अवधारणाओं और विशेषज्ञ दलों की तैनाती की रणनीति को करीब से जानेंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं और भारत व अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग लगातार गहरा हो रहा है।
द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी का संदर्भ
गौरतलब है कि भारतीय नौसेना और अमेरिकी नौसेना 2005 से संयुक्त बचाव और EOD अभ्यास आयोजित करती आ रही हैं। इस वर्ष का अभ्यास इस श्रृंखला का आठवाँ संस्करण है, जो दोनों देशों के बीच विशेष समुद्री अभियानों में बढ़ती साझेदारी को दर्शाता है। यह अभ्यास व्यापक भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग ढाँचे का हिस्सा है, जिसमें मालाबार नौसेना अभ्यास और अन्य द्विपक्षीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शामिल हैं।
आम जनता और समुद्री सुरक्षा पर असर
समुद्री मार्गों की सुरक्षा सीधे तौर पर व्यापार, मछुआरों की सुरक्षा और तटीय क्षेत्रों की रक्षा से जुड़ी है। EOD क्षमताओं को मज़बूत करने से न केवल सैन्य अभियानों में, बल्कि आपदा राहत और समुद्री दुर्घटनाओं के प्रबंधन में भी दोनों नौसेनाओं की प्रभावशीलता बढ़ेगी।
आगे की राह
14 अगस्त 2026 को अभ्यास की समाप्ति के बाद दोनों नौसेनाओं के बीच तकनीकी सहयोग और संयुक्त संचालन प्रक्रियाओं को और विकसित किए जाने की संभावना है। कोच्चि में आयोजित यह अभ्यास विशेष समुद्री अभियानों में भारत-अमेरिका की बढ़ती अंतर-संचालन क्षमता का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा।