18 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत-अमेरिका EOD अभ्यास 2026 कोच्चि में संपन्न, आठवें संस्करण में नौसेनाओं का ऑपरेशनल तालमेल मजबूत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत-अमेरिका EOD अभ्यास 2026 कोच्चि में संपन्न, आठवें संस्करण में नौसेनाओं का ऑपरेशनल तालमेल मजबूत

सारांश

कोच्चि में भारत-अमेरिका EOD अभ्यास का आठवाँ संस्करण संपन्न — IED निष्क्रियकरण से लेकर मानव रहित पनडुब्बी प्रणालियों तक, पाँच दिनों में दोनों नौसेनाओं ने ऑपरेशनल तालमेल को नई धार दी। यह उस बड़े रक्षा समीकरण का हिस्सा है जिसमें भारत ने RIMPAC 2026 में पहली बार डिप्टी कमांडर की ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

मुख्य बातें

भारत-अमेरिका EOD अभ्यास 2026 का आठवाँ संस्करण 14 अगस्त 2026 को कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान में संपन्न हुआ।
पाँच दिवसीय अभ्यास में IED निष्क्रियकरण, बारूदी सुरंग नष्ट करने की तकनीक और मानव रहित पनडुब्बी प्रणालियों के उपयोग पर संयुक्त प्रशिक्षण हुआ।
क्रॉस-ट्रेनिंग में मलबा खोज, विशेष उपकरण और स्लिथरिंग ऑपरेशन शामिल रहे।
भारतीय नौसेना ने RIMPAC 2026 ( 1–31 जुलाई , हवाई) में पहली बार डिप्टी कमांडर टास्क फोर्स की भूमिका निभाई।
P-8I LRMR एयरक्राफ्ट ने RIMPAC के समुद्री फेज में थिएटर-लेवल एंटी-सबमरीन वॉरफेयर में हिस्सा लिया।

भारतीय नौसेना और अमेरिकी नौसेना के बीच एक्सप्लोसिव ऑर्डनेंस डिस्पोजल (EOD) अभ्यास 2026 का आठवाँ संस्करण 14 अगस्त 2026 को कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। पाँच दिवसीय इस द्विपक्षीय अभ्यास में दोनों देशों की नौसेना टीमों के बीच गहन पेशेवर संवाद, सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान और लाइव प्रदर्शन शामिल रहे। रक्षा मंत्रालय ने सोमवार, 17 अगस्त को इस अभ्यास के सफल समापन की आधिकारिक जानकारी दी।

अभ्यास में क्या-क्या शामिल रहा

विषय विशेषज्ञ आदान-प्रदान के अंतर्गत इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) से उत्पन्न वास्तविक समय के खतरों, खतरों को निष्क्रिय करने की प्रक्रियाओं, बारूदी सुरंगों को नष्ट करने की तकनीकों और मानव रहित पनडुब्बी प्रणालियों के सामरिक उपयोग को विस्तार से कवर किया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह अभ्यास EOD अभियानों के बहुआयामी पहलुओं पर ज्ञान साझा करने का महत्त्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

क्रॉस-ट्रेनिंग चरण में गोताखोरी के विविध क्षेत्रों में संयुक्त अभ्यास किए गए — जिनमें मलबे का पता लगाना और उसे निकालना, विशेष उपकरणों का व्यावहारिक इस्तेमाल और स्लिथरिंग ऑपरेशन प्रमुख रहे।

दोनों नौसेनाओं की प्रतिबद्धता का प्रतीक

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास से गोताखोर टीमों की पेशेवर दक्षता और कौशल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, साथ ही आपसी समझ और अंतर-संचालन क्षमता (Interoperability) भी बेहतर हुई। मंत्रालय के अनुसार, 'इस अभ्यास का सफल समापन विशेष समुद्री अभियानों में परिचालन तालमेल और सहयोग को मजबूत करने के लिए दोनों नौसेनाओं की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।'

RIMPAC 2026 में भारत की ऐतिहासिक भूमिका

गौरतलब है कि पिछले महीने भारतीय नौसेना ने हवाई में आयोजित रिम ऑफ द पैसिफिक (RIMPAC) 2026 मैरीटाइम वॉरफेयर एक्सरसाइज के दौरान थिएटर-लेवल एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए डिप्टी कमांडर टास्क फोर्स की भूमिका निभाई — जो इस अभ्यास के इतिहास में भारत की पहली ऐसी भागीदारी थी।

भारतीय नौसेना के प्रवक्ता ने एक्स पर लिखा कि जैसे ही RIMPAC 2026 का समुद्री फेज शुरू हुआ, भारतीय नौसेना के P-8I LRMR एयरक्राफ्ट और भाग लेने वाली टीम ने मिशन प्लानिंग, तकनीकी तैयारियों, ऑपरेशनल ब्रीफिंग और पेशेवर आदान-प्रदान के ज़रिए साझेदार नौसेनाओं के साथ सक्रिय एंगेजमेंट जारी रखी। RIMPAC का 30वाँ सत्र 1 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक आयोजित किया गया, जो दुनिया की सबसे बड़ी बहुराष्ट्रीय समुद्री एक्सरसाइज में से एक है।

भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी का बढ़ता दायरा

यह ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग लगातार नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। EOD अभ्यास की यह श्रृंखला दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच विशेष समुद्री अभियानों में तकनीकी और सामरिक समन्वय को संस्थागत रूप देने का प्रयास है। आठ संस्करणों की यह निरंतरता दर्शाती है कि दोनों पक्ष इसे महज औपचारिक अभ्यास नहीं, बल्कि परिचालन तत्परता का एक अनिवार्य हिस्सा मानते हैं।

आगे चलकर इस तरह के संयुक्त अभ्यासों की आवृत्ति और दायरा और बढ़ने की संभावना है, विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनज़र।

संपादकीय दृष्टिकोण

ये अभ्यास कूटनीतिक संकेत तो देते हैं, पर सामरिक गहराई सीमित रहती है।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-अमेरिका EOD अभ्यास 2026 क्या है और यह कहाँ हुआ?
यह भारतीय और अमेरिकी नौसेना के बीच विस्फोटक आयुध निपटान पर केंद्रित एक द्विपक्षीय प्रशिक्षण अभ्यास है, जिसका आठवाँ संस्करण 14 अगस्त 2026 को कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान में संपन्न हुआ। पाँच दिनों तक चले इस अभ्यास में IED निष्क्रियकरण, बारूदी सुरंग नष्ट करने और मानव रहित पनडुब्बी प्रणालियों पर संयुक्त प्रशिक्षण दिया गया।
इस EOD अभ्यास में किन विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया?
अभ्यास में IED से वास्तविक समय के खतरों की पहचान, खतरों को निष्क्रिय करने की प्रक्रियाएँ, बारूदी सुरंगों को नष्ट करने की तकनीक और मानव रहित पनडुब्बी प्रणालियों का सामरिक उपयोग शामिल रहा। क्रॉस-ट्रेनिंग चरण में मलबा खोज, विशेष उपकरण और स्लिथरिंग ऑपरेशन भी कवर किए गए।
RIMPAC 2026 में भारतीय नौसेना की भूमिका क्यों ऐतिहासिक मानी जा रही है?
RIMPAC 2026 के दौरान भारतीय नौसेना ने पहली बार थिएटर-लेवल एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए डिप्टी कमांडर टास्क फोर्स की भूमिका निभाई, जो इस अभ्यास के इतिहास में भारत की सबसे वरिष्ठ कमान भागीदारी है। RIMPAC का 30वाँ सत्र 1 से 31 जुलाई 2026 तक हवाई में आयोजित हुआ।
इस अभ्यास से भारत-अमेरिका नौसेना सहयोग पर क्या असर पड़ेगा?
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस अभ्यास से गोताखोर टीमों की पेशेवर दक्षता, आपसी समझ और अंतर-संचालन क्षमता में सुधार हुआ है। यह दोनों नौसेनाओं के बीच विशेष समुद्री अभियानों में परिचालन तालमेल को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
EOD अभ्यास की यह श्रृंखला कितने समय से चल रही है?
2026 का संस्करण इस द्विपक्षीय अभ्यास का आठवाँ संस्करण है, जो दर्शाता है कि यह श्रृंखला कई वर्षों से नियमित रूप से आयोजित होती आ रही है। इसकी निरंतरता भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की गहराती जड़ों का प्रमाण है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले