8 अक्टूबर 2026
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भारतीय तटरक्षक बल का 12वाँ 'सारेक्स-2026' अभ्यास: 30 देशों के पर्यवेक्षक, 15 पोत, पारादीप तट पर बड़ा समुद्री बचाव मेगा-ड्रिल

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भारतीय तटरक्षक बल का 12वाँ 'सारेक्स-2026' अभ्यास: 30 देशों के पर्यवेक्षक, 15 पोत, पारादीप तट पर बड़ा समुद्री बचाव मेगा-ड्रिल

सारांश

'सारेक्स-2026' सिर्फ एक ड्रिल नहीं था — यह भारत की समुद्री ताकत का वैश्विक प्रदर्शन था। पारादीप तट पर 30 देशों के 32 पर्यवेक्षकों के सामने 15 पोत, विमान और हेलीकॉप्टर एकजुट हुए। 228 यात्रियों की काल्पनिक आपदा में भारत ने साबित किया — हिंद महासागर में संकट का जवाब देने में वह अग्रिम पंक्ति में है।

मुख्य बातें

भारतीय तटरक्षक बल ने 8 अक्टूबर 2026 को पारादीप, ओडिशा के निकट 12वाँ राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव अभ्यास 'सारेक्स-2026' आयोजित किया।
30 देशों के 32 पर्यवेक्षकों ने अभ्यास में भाग लिया — अंतरराष्ट्रीय सहयोग का मज़बूत संकेत।
अभ्यास में तटरक्षक बल के 15 पोत , 3 डोर्नियर विमान , 3 उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर , वायुसेना के सी-130जे व एमआई-17 और नौसेना के 2 पोत तैनात किए गए।
काल्पनिक आपदा में 228 यात्रियों के साथ विमान का एमवी जुंबा पोत से टकराव और उसमें आग की स्थिति को बचाव परिदृश्य बनाया गया।
अभ्यास की समीक्षा महानिदेशक परमेश शिवमणि ने की; ROV तकनीक का पानी के भीतर उपयोग भी प्रदर्शित किया गया।
भारतीय नौसेना, वायुसेना, मत्स्य विभाग, सीमा शुल्क, समुद्री पुलिस और ओडिशा प्रशासन सहित कुल 10 एजेंसियाँ सम्मिलित रहीं।

भारतीय तटरक्षक बल ने 8 अक्टूबर 2026 को ओडिशा के पारादीप तट के निकट देश का 12वाँ राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव अभ्यास 'सारेक्स-2026' सफलतापूर्वक संपन्न किया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य समुद्र में बड़े पैमाने पर राहत-बचाव अभियानों के दौरान विभिन्न भारतीय एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के बीच समन्वय, तकनीकी क्षमता और त्वरित प्रतिक्रिया को परखना था। 30 देशों के 32 पर्यवेक्षकों की उपस्थिति ने इस अभ्यास को एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय आयाम दिया।

अभ्यास का परिदृश्य और काल्पनिक संकट

अभ्यास के दौरान पारादीप बंदरगाह के निकट एक काल्पनिक आपदा का परिदृश्य तैयार किया गया। इसके अंतर्गत 228 यात्रियों को लेकर जा रहा एक यात्री विमान समुद्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसका ढाँचा मालवाहक पोत एमवी जुंबा से टकराया, जिससे पोत क्षतिग्रस्त हुआ और उसमें आग भड़क उठी।

इस संकट की स्थिति के जवाब में घटनास्थल पर कमान केंद्र सक्रिय किया गया। आग बुझाने की कार्रवाई के साथ-साथ हेलीकॉप्टरों के ज़रिए लोगों को निकालने का अभ्यास किया गया। जीवन रक्षक नौकाएँ उतारी गईं और हवा से गिराई जा सकने वाली जीवन रक्षक नौकाओं का भी प्रदर्शन हुआ।

भाग लेने वाली एजेंसियाँ और संसाधन

इस व्यापक अभ्यास में तटरक्षक बल के साथ भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना, भारतीय नौवहन निगम, नौवहन महानिदेशालय, मत्स्य विभाग, सीमा शुल्क विभाग, समुद्री पुलिस, पारादीप पत्तन प्राधिकरण और ओडिशा प्रशासन के दल भी शामिल हुए।

संसाधनों की दृष्टि से भारतीय तटरक्षक बल के 15 पोत, तीन डोर्नियर विमान, तीन उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर और एक चेतक हेलीकॉप्टर तैनात किए गए। भारतीय वायुसेना के सी-130जे और एमआई-17 विमान तथा भारतीय नौसेना के दो पोत भी अभ्यास का हिस्सा रहे। नागरिक एवं राज्यस्तरीय संसाधनों और तट पर मौजूद सहायता इकाइयों को भी सम्मिलित किया गया।

उन्नत बचाव तकनीकों का प्रदर्शन

अभ्यास में जेसन क्रैडल, जेमिनी नौका, बचाव टोकरी और जाल-बचाव जैसी विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। विशेष रूप से समुद्र के भीतर दूर से संचालित वाहन (ROV) की क्षमता का भी प्रदर्शन हुआ, जिससे पानी के नीचे की स्थिति का आकलन करने और बचाव अभियान में आधुनिक तकनीक की भूमिका स्पष्ट की गई।

गौरतलब है कि इस प्रकार के अभ्यास अंतरराष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव सम्मेलनों के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं को रेखांकित करते हैं। 30 देशों के पर्यवेक्षकों की भागीदारी ने भारत और वैश्विक एजेंसियों के बीच बेहतर कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान किया।

महानिदेशक की समीक्षा और रणनीतिक महत्व

अभ्यास की समीक्षा भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि ने की। उन्होंने इसे 'सागर की दृष्टि' और 'महासागर की भावना' के अनुरूप भारत के समुद्री बचाव तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री गतिविधियाँ और सुरक्षा चुनौतियाँ बढ़ रही हैं। 'सारेक्स-2026' ने यह संदेश दिया कि समुद्री संकट की स्थिति में समयबद्ध और समन्वित प्रतिक्रिया अपरिहार्य है।

आगे की राह

इस अभ्यास से प्राप्त अनुभव और सीखे गए सबक भविष्य के समुद्री बचाव अभियानों की रूपरेखा तय करेंगे। भारत की क्षेत्रीय भरोसेमंद समुद्री खोज एवं बचाव साझेदार के रूप में स्थिति इस अभ्यास से और सुदृढ़ हुई है, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई ऊर्जा मिली है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नेतृत्वकर्ता की भूमिका में आने की कोशिश कर रहा है। हालाँकि, अभ्यास और वास्तविक आपदा प्रतिक्रिया के बीच की खाई को भरना अभी भी एक चुनौती है — 2021 की 'बॉय जोस' चक्रवात प्रतिक्रिया और हाल के समुद्री हादसों में समन्वय की कमियाँ सामने आई थीं। ROV और उन्नत तकनीक का समावेश सकारात्मक दिशा है, लेकिन असली कसौटी तब होगी जब ये संसाधन और यह तालमेल किसी वास्तविक संकट में उतनी ही तेज़ी से काम करें।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सारेक्स-2026 अभ्यास क्या है और यह कहाँ हुआ?
'सारेक्स-2026' भारतीय तटरक्षक बल द्वारा आयोजित 12वाँ राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव अभ्यास है, जो 8 अक्टूबर 2026 को ओडिशा के पारादीप तट के निकट संपन्न हुआ। इसका उद्देश्य समुद्री आपदाओं में बहु-एजेंसी समन्वय, तकनीकी क्षमता और त्वरित प्रतिक्रिया को परखना था।
सारेक्स-2026 में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल थीं?
अभ्यास में भारतीय तटरक्षक बल के साथ भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना, भारतीय नौवहन निगम, नौवहन महानिदेशालय, मत्स्य विभाग, सीमा शुल्क विभाग, समुद्री पुलिस, पारादीप पत्तन प्राधिकरण और ओडिशा प्रशासन ने भाग लिया। कुल 30 देशों के 32 अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक भी मौजूद रहे।
अभ्यास में कौन-से काल्पनिक संकट का परिदृश्य बनाया गया था?
अभ्यास में 228 यात्रियों को लेकर जा रहा एक विमान पारादीप बंदरगाह के पास समुद्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया और मालवाहक पोत एमवी जुंबा से टकराया, जिससे पोत में आग लग गई। इस परिदृश्य में बचाव दल ने आग बुझाने, लोगों को निकालने और समन्वित प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया।
सारेक्स-2026 में किन उन्नत तकनीकों का प्रदर्शन हुआ?
अभ्यास में समुद्र के भीतर दूर से संचालित वाहन (ROV) की क्षमता का प्रदर्शन किया गया, जिससे पानी के नीचे की स्थिति का आकलन हो सके। इसके अलावा जेसन क्रैडल, जेमिनी नौका, बचाव टोकरी, जाल-बचाव और हवा से गिराई जाने वाली जीवन रक्षक नौकाओं का भी उपयोग प्रदर्शित किया गया।
भारत के लिए इस अभ्यास का रणनीतिक महत्व क्या है?
यह अभ्यास हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका को भरोसेमंद समुद्री बचाव साझेदार के रूप में स्थापित करता है। 30 देशों की भागीदारी से अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान का अवसर मिला, जो 'सागर' विज़न के अनुरूप भारत की समुद्री कूटनीति को मज़बूत करता है।
राष्ट्र प्रेस
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