भारतीय तटरक्षक बल का मेडिकल इवैक्यूएशन ऑपरेशन: पारादीप तट के पास जहाज से बचाया 39 वर्षीय बीमार नाविक
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय तटरक्षक बल (ICG) ने 14 जून 2025 को ओडिशा के पारादीप तट के समीप एक सफल चिकित्सा निकासी अभियान को अंजाम दिया, जिसमें लाइबेरिया के ध्वज वाले व्यापारी जहाज एमवी एमएससी दीया एफ पर सवार एक 39 वर्षीय भारतीय नाविक को गंभीर हालत में सुरक्षित निकाला गया। नाविक में हृदयाघात (कार्डियक अरेस्ट) जैसे लक्षण उभरने के बाद जहाज से आपात सहायता की मांग की गई थी।
घटनाक्रम: कैसे बिगड़ी स्थिति
जहाज एमवी एमएससी दीया एफ कोलंबो की ओर जा रहा था, जब यात्रा के दौरान नाविक की तबीयत अचानक बिगड़ गई। चिकित्सकीय जाँच में कार्डियक अरेस्ट जैसे लक्षण सामने आए, जिसके बाद जहाज के कप्तान ने तत्काल तटरक्षक बल से संपर्क किया। यह ऐसे समय में आया जब समुद्र में मौसम प्रतिकूल था और परिचालन परिस्थितियाँ चुनौतीपूर्ण थीं।
तटरक्षक बल की त्वरित कार्रवाई
सूचना मिलते ही भारतीय तटरक्षक बल ने बिना देरी किए राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। प्रतिकूल मौसम और समुद्री परिस्थितियों के बावजूद तटरक्षक दल ने नाविक को एमवी एमएससी दीया एफ से सुरक्षित बाहर निकाला और उसे आवश्यक चिकित्सा सहायता तक पहुँचाया। तटरक्षक बल के अनुसार, समय पर की गई इस कार्रवाई से मरीज को ज़रूरी उपचार मिल सका।
पिछला बड़ा ऑपरेशन: ओमान तट पर 24 भारतीयों का बचाव
गौरतलब है कि इससे पहले 8 जून को भारतीय तटरक्षक बल के समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (MRCC) मुंबई ने एक बड़ा ऑपरेशन चलाया था। ओमान के मसिराह तट के पास लंगर डाले पलाऊ ध्वज वाले टैंकर एमटी मारिवेक्स पर मिसाइल हमले की सूचना मिली थी, जिसमें 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे। MRCC ने तत्काल ओमान समुद्री खोज एवं बचाव केंद्र (OMSC) से समन्वय स्थापित किया।
OMSC ओमान ने पुष्टि की कि ओमान नौसेना के हेलीकॉप्टरों द्वारा सभी 24 भारतीय चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। बचाए गए सभी लोग सुरक्षित हैं और किसी को कोई हताहत या चोट नहीं आई। जहाज अभी भी ओमान के मसिराह तट के पास लंगर डाले खड़ा है।
समुद्री सुरक्षा में तटरक्षक बल की भूमिका
ये दोनों अभियान भारतीय तटरक्षक बल की उच्च परिचालन क्षमता और समुद्र में मानव जीवन की सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं। अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भी भारतीय एजेंसियाँ विदेशी समकक्षों के साथ समन्वय बनाकर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं। आने वाले समय में ऐसे अभियानों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री उपस्थिति और जिम्मेदारी दोनों बढ़ रही हैं।