10 जुलाई 2026
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हिंद महासागर में भारत प्राथमिक गारंटर: राजनाथ सिंह ने महेंद्रगिरि कमीशनिंग पूर्व संध्या पर नौसेना को किया संबोधित

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हिंद महासागर में भारत प्राथमिक गारंटर: राजनाथ सिंह ने महेंद्रगिरि कमीशनिंग पूर्व संध्या पर नौसेना को किया संबोधित

सारांश

विशाखापत्तनम में छठे स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरि की कमीशनिंग पूर्व संध्या पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत को हिंद महासागर का 'प्राथमिक गारंटर' घोषित किया — एक ऐसे समय में जब क्षेत्र में बाहरी शक्तियों की उपस्थिति लगातार बढ़ रही है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 10 जुलाई 2026 को विशाखापत्तनम में भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता का प्राथमिक गारंटर बताया।
भारत का 90% से अधिक व्यापार समुद्री मार्गों से होता है — रक्षा मंत्री ने इसे समुद्री सुरक्षा की अनिवार्यता का आधार बताया।
प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित छठा स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरि 11 जुलाई 2026 को नौसेना में कमीशन होगा।
राजनाथ सिंह ने भविष्य के युद्धों को 'नए और अप्रत्याशित रूपों' में आने की चेतावनी दी और नौसेना से उभरती तकनीकों में महारत हासिल करने का आग्रह किया।
नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और वाइस एडमिरल संजय भल्ला बाराखाना कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 10 जुलाई 2026 को विशाखापत्तनम में स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता का प्राथमिक गारंटर है। वे प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित छठे स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरि की कमीशनिंग की पूर्व संध्या पर आयोजित बाराखाना कार्यक्रम में भारतीय नौसेना के कर्मियों को संबोधित कर रहे थे।

समुद्री सुरक्षा और राष्ट्रीय हित

राजनाथ सिंह ने हिंद महासागर क्षेत्र के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत का 90 प्रतिशत से अधिक व्यापार समुद्री मार्गों के ज़रिये होता है। उन्होंने जोड़ा कि देश की ऊर्जा सुरक्षा, विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और द्वीपीय क्षेत्र — तीनों मिलकर समुद्री सुरक्षा को आर्थिक विकास और राष्ट्रीय हितों के लिए अपरिहार्य बनाते हैं।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और क्षेत्र से बाहर की शक्तियों की बढ़ती उपस्थिति ने समुद्री सतर्कता की आवश्यकता को और गहरा कर दिया है। रक्षा मंत्री के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में भारतीय नौसेना समुद्री सीमाओं की रक्षा, महत्वपूर्ण शिपिंग लेन की सुरक्षा और पूरे क्षेत्र में राष्ट्रीय हितों की पहरेदारी कर रही है।

भारत का दायित्व — 'यह क्षेत्र हमारा आंगन है'

राजनाथ सिंह ने भारत को हिंद महासागर क्षेत्र का 'सबसे बड़ा और सबसे जिम्मेदार हितधारक' बताया। उन्होंने कहा, 'यह क्षेत्र हमारा आंगन है और इसकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है।' उन्होंने शांतिपूर्ण, स्थिर और सुरक्षित समुद्री वातावरण बनाए रखने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

महेंद्रगिरि — आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

रक्षा मंत्री ने महेंद्रगिरि के शामिल होने को भारत की बढ़ती स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का एक और शानदार उदाहरण बताया। प्रोजेक्ट 17ए शृंखला का यह छठा स्टील्थ फ्रिगेट देश की आत्मनिर्भर भारत नीति के अंतर्गत निर्मित है। गौरतलब है कि इस शृंखला के पहले पाँच पोत पहले ही नौसेना में शामिल हो चुके हैं, और महेंद्रगिरि का कमीशन होना इस कार्यक्रम की परिपक्वता को दर्शाता है।

भविष्य के युद्ध की चुनौतियाँ

युद्ध के बदलते स्वरूप पर राजनाथ सिंह ने कहा कि भविष्य के संघर्ष नए और अप्रत्याशित रूपों में सामने आ सकते हैं — ऐसे संघर्ष भी जो युद्ध की औपचारिक घोषणा के बिना लड़े जाते हैं। उनके शब्दों में, 'कल का शत्रु अतीत के शत्रु जैसा नहीं होगा।' उन्होंने नौसेना कर्मियों से शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार रहने, अत्याधुनिक तकनीकों में महारत हासिल करने और अपने कौशल को निरंतर उन्नत करने का आग्रह किया।

उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार सैनिकों को विश्व के सर्वश्रेष्ठ हथियार, प्रौद्योगिकी और संसाधन उपलब्ध कराने में कोई कमी नहीं करेगी। साथ ही उन्होंने जोड़ा, 'केवल हथियार ही युद्ध नहीं जिताते; युद्ध तो उन्हें चलाने वाले लोग जिताते हैं।'

वरिष्ठ नौसेना नेतृत्व की उपस्थिति

इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला तथा भारतीय नौसेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। महेंद्रगिरि का औपचारिक कमीशन 11 जुलाई 2026 को होना निर्धारित है, जो भारत की समुद्री शक्ति के विस्तार में एक और ऐतिहासिक पड़ाव होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रोजेक्ट 17ए जैसे स्वदेशी कार्यक्रम सराहनीय हैं, लेकिन आलोचकों का कहना है कि नौसेना की वास्तविक क्षमता विस्तार की गति अभी भी महत्वाकांक्षा के अनुरूप नहीं है। असली परीक्षा यह होगी कि भारत 'गारंटर' की भूमिका को केवल भाषणों में नहीं, बल्कि जहाज़ों की संख्या और तैनाती में भी सिद्ध कर सके।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिंद महासागर को लेकर क्या कहा?
राजनाथ सिंह ने 10 जुलाई 2026 को विशाखापत्तनम में कहा कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता का प्राथमिक गारंटर है। उन्होंने इस क्षेत्र को 'भारत का आंगन' बताते हुए इसकी सुरक्षा को राष्ट्रीय जिम्मेदारी कहा।
महेंद्रगिरि फ्रिगेट क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित छठा स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट है, जिसे 11 जुलाई 2026 को भारतीय नौसेना में कमीशन किया जाना है। यह भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति की एक प्रमुख उपलब्धि है और देश की समुद्री युद्ध क्षमता को मज़बूत करता है।
भारत के लिए हिंद महासागर की सुरक्षा इतनी ज़रूरी क्यों है?
भारत का 90 प्रतिशत से अधिक व्यापार समुद्री मार्गों से होता है और देश की ऊर्जा सुरक्षा तथा विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र भी इन्हीं जलमार्गों पर निर्भर हैं। इसके अलावा, क्षेत्र में बाहरी शक्तियों की बढ़ती उपस्थिति ने समुद्री सतर्कता को और अधिक अनिवार्य बना दिया है।
बाराखाना कार्यक्रम में कौन-कौन से वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे?
कार्यक्रम में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला और भारतीय नौसेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
राजनाथ सिंह ने भविष्य के युद्धों के बारे में क्या चेतावनी दी?
रक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य के संघर्ष नए और अप्रत्याशित रूपों में सामने आ सकते हैं — यहाँ तक कि बिना युद्ध की औपचारिक घोषणा के भी। उन्होंने नौसेना कर्मियों से उभरती तकनीकों में महारत हासिल करने और शारीरिक व मानसिक रूप से हमेशा तैयार रहने का आग्रह किया।
राष्ट्र प्रेस
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