क्या गणतंत्र दिवस परेड में लॉन्ग रेंज मिसाइल और डीआरडीओ की स्वदेशी रक्षा प्रणालियां दिखेंगी?

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क्या गणतंत्र दिवस परेड में लॉन्ग रेंज मिसाइल और डीआरडीओ की स्वदेशी रक्षा प्रणालियां दिखेंगी?

सारांश

गणतंत्र दिवस परेड 2026 में डीआरडीओ की स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन होगा। लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल सहित, यह झांकी भारतीय नौसेना की नवोन्मेषी तकनीकों को प्रदर्शित करेगी। जानें इस विशेष आयोजन की महत्वपूर्ण बातें।

मुख्य बातें

डीआरडीओ अपनी स्वदेशी प्रणालियों का प्रदर्शन करेगा।
लॉन्ग रेंज मिसाइल भारतीय नौसेना की तटीय जरूरतों के अनुसार विकसित की गई है।
यह मिसाइल दुश्मन की रडार से बाहर रहते हुए लक्ष्य को भेदने में सक्षम है।
झांकी में नेवल टेक्नोलॉजी पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
यह कार्यक्रम भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) गणतंत्र दिवस परेड और भारत पर्व 2026 में अपनी कई स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन करने जा रहा है। इनमें प्रमुख लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल शामिल है। इस बार डीआरडीओ की विशेष झांकी कॉम्बैट सबमरीन के लिए नौसैनिक प्रौद्योगिकियों पर आधारित होगी।

डीआरडीओ गणतंत्र दिवस परेड में लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल का प्रदर्शन करेगा, जो भारतीय नौसेना की तटीय बैटरी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई है। यह एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है, जो स्थिर और गतिमान दोनों प्रकार के लक्ष्यों को सटीकता से भेदने में सक्षम है। इसे विभिन्न प्रकार के पेलोड ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है।

यह मिसाइल स्वदेशी एवियोनिक्स प्रणालियों और उच्च-सटीकता वाले सेंसर पैकेज से युक्त है। यह अपनी श्रेणी की पहली स्वदेशी हाइपरसोनिक मिसाइल है। तकनीकी विशेषताओं के तहत, यह उड़ान के दौरान मल्टीपल स्किप्स करती है और अपने टर्मिनल चरण में गतिमान लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। इसकी कम ऊंचाई, उच्च गति और गतिशीलता के कारण यह दुश्मन के रडार से बाहर रहती है।

डीआरडीओ के अनुसार, इस मिसाइल में दो-चरणीय ठोस ईंधन रॉकेट मोटर प्रणाली का उपयोग किया गया है। पहला चरण निर्धारित समय के बाद अलग हो जाता है, जबकि दूसरा चरण वायुमंडल में बिना इंजन के ग्लाइड करते हुए आवश्यक युद्धाभ्यास करता है। डीआरडीओ की झांकी भारत पर्व में लाल किला परिसर में 26 से 31 जनवरी 2026 तक प्रदर्शित की जाएगी। इस वर्ष का विषय है ‘नेवल टेक्नोलॉजीस फॉर कॉम्बैट सबमरींस’।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस झांकी में भारतीय नौसेना की पारंपरिक पनडुब्बियों की युद्ध क्षमता बढ़ाने वाली स्वदेशी प्रणालियों को प्रदर्शित किया जाएगा। ये प्रणालियाँ जल के नीचे युद्ध क्षेत्र में फोर्स मल्टिप्लायर की भूमिका निभाती हैं। यह इंटीग्रेटेड कॉम्बैट सूट (आईसीएस) कहलाता है, जो पनडुब्बी युद्ध और पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए महत्वपूर्ण है।

वहीं, वायर गाइडेड हेवी वेट टॉरपीडो एक आधुनिक पनडुब्बी-प्रक्षेपित टॉरपीडो है, जिसे समकालीन पोत और पनडुब्बी खतरों से निपटने के लिए विकसित किया गया है। यह भारतीय नौसेना की सभी पनडुब्बियों के लिए प्राथमिक हथियार माना जाता है। इसके अलावा, एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) प्रणाली भी प्रदर्शित की जाएगी, जो पनडुब्बियों की दीर्घकालिक जलमग्न क्षमता को बढ़ाती है।

डीआरडीओ अन्य प्रणालियों का भी प्रदर्शन करेगा, जिनमें अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक, नाग मिसाइल प्रणाली, एडवांस्ड टोएड आर्टिलरी गन सिस्टम, ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश वायु रक्षा प्रणाली, बैटलफील्ड सर्विलांस रडार, एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल आदि शामिल हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह देश की आत्मनिर्भरता और तकनीकी प्रगति का प्रतीक भी है। यह एक ऐसा अवसर है जब हम अपनी सुरक्षा और सामरिक ताकत को सभी के सामने प्रदर्शित करते हैं।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआरडीओ की झांकी में क्या-क्या शामिल होगा?
डीआरडीओ की झांकी में लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल, कॉम्बैट सबमरीन तकनीक, और अन्य स्वदेशी प्रणालियाँ शामिल होंगी।
गणतंत्र दिवस परेड कब आयोजित होगी?
गणतंत्र दिवस परेड 26 से 31 जनवरी 2026 तक आयोजित होगी।
क्या यह मिसाइल पूरी तरह से स्वदेशी है?
हाँ, यह लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है।
डीआरडीओ का क्या महत्व है?
डीआरडीओ का उद्देश्य स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का विकास करना और भारत की सुरक्षा को मजबूत करना है।
क्या नई तकनीकें सैन्य बलों को मजबूत करेंगी?
जी हां, ये नई तकनीकें भारतीय सैन्य बलों की सामरिक क्षमताओं को बढ़ाएंगी।
राष्ट्र प्रेस
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