फिच ने भारत की आर्थिक वृद्धि का पूर्वानुमान ७.५ प्रतिशत बढ़ाया, भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद

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फिच ने भारत की आर्थिक वृद्धि का पूर्वानुमान ७.५ प्रतिशत बढ़ाया, भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद

सारांश

फिच रेटिंग्स की हालिया रिपोर्ट में भारत की जीडीपी वृद्धि दर को ७.५ प्रतिशत पर पहुँचने का अनुमान लगाया गया है। घरेलू मांग में मजबूती के चलते यह वृद्धि दर पहले के ७.४ प्रतिशत के पूर्वानुमान से अधिक है। जानिए क्या हैं इसके पीछे के कारण और वैश्विक स्थिति का प्रभाव।

Key Takeaways

  • भारत की जीडीपी वृद्धि दर ७.५ प्रतिशत होने की उम्मीद है।
  • घरेलू मांग और उपभोक्ता खर्च में वृद्धि से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल रहा है।
  • वैश्विक व्यापार में सुस्ती के बावजूद अर्थव्यवस्था स्थिर है।
  • फिच ने भविष्य में आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान ६.७ प्रतिशत रखा है।
  • महंगाई का प्रभाव लोगों की वास्तविक आय पर पड़ सकता है।

नई दिल्ली, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। जनवरी और फरवरी में आर्थिक गतिविधियों में थोड़ी मंदी के बावजूद, घरेलू मांग के कारण मार्च २०२६ को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि दर ७.५ प्रतिशत रहने की संभावना है, जो पहले के ७.४ प्रतिशत के पूर्वानुमान से अधिक है। यह जानकारी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स की रिपोर्ट में साझा की गई है।

फिच रेटिंग्स के अनुसार, वित्त वर्ष २०२६ में उपभोक्ता खर्च में लगभग ८.६ प्रतिशत और निवेश में लगभग ६.९ प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है, जो आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करेगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी संग्रह, मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन, हवाई यात्रा और डिजिटल भुगतान जैसे उच्च-फ्रीक्वेंसी संकेतक यह दर्शाते हैं कि वैश्विक व्यापार में सुस्ती के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनी हुई है।

फिच ने उल्लेख किया है कि पिछले कुछ महीनों में वैश्विक आर्थिक माहौल के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था ने मजबूत प्रदर्शन किया है। इसका मुख्य कारण घरेलू मांग की मजबूती, सेवा क्षेत्र की गतिविधियां और इन्फ्रास्ट्रक्चर में निरंतर सरकारी निवेश हैं।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जनवरी और फरवरी के दौरान पीएमआई सर्वे के आंकड़ों में आर्थिक गतिविधियों में धीमी गति के संकेत मिले हैं। इसके बावजूद, अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और क्रेडिट ग्रोथ अभी भी दो अंकों में है।

फिच का मानना है कि वित्त वर्ष २०२६-२७ की पहली छमाही में आर्थिक वृद्धि थोड़ी धीमी हो सकती है, क्योंकि बढ़ती महंगाई के कारण लोगों की वास्तविक आय पर दबाव पड़ सकता है।

वित्त वर्ष २०२६ की तीसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर ७.८ प्रतिशत रही, जो पिछली तिमाही के ८.४ प्रतिशत से कम है। इसका कारण यह है कि भारत ने जीडीपी का आधार वर्ष बदलकर २०२२-२३ कर दिया है।

फिच ने कहा कि कम अवधि में निवेश वृद्धि थोड़ी धीमी रह सकती है, लेकिन वित्तीय परिस्थितियों में सुधार और वास्तविक ब्याज दरों में कमी के साथ, वित्त वर्ष २०२६-२७ की दूसरी छमाही में इसमें तेजी आ सकती है।

एजेंसी का अनुमान है कि वित्त वर्ष २०२६-२७ में भारत की आर्थिक वृद्धि दर ६.७ प्रतिशत और २०२७-२८ में ६.५ प्रतिशत रह सकती है।

फिच ने यह भी कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था २०२६ में लगभग २.६ प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है, जो दिसंबर में दिए गए अनुमान से थोड़ा अधिक है। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि तेल की कीमतों में हालिया वृद्धि अस्थायी है या नहीं।

रिपोर्ट में यह भी अनुमानित किया गया है कि उपभोक्ता खर्च में कमजोर वृद्धि के कारण २०२६ में अमेरिका की अर्थव्यवस्था लगभग २.२ प्रतिशत की दर से बढ़ेगी, जबकि चीन की आर्थिक वृद्धि २०२५ के ५ प्रतिशत से घटकर २०२६ में लगभग ४.३ प्रतिशत रह सकती है।

Point of View

खासकर घरेलू मांग के कारण। हालाँकि, वैश्विक आर्थिक माहौल और महंगाई के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए, आगे की चुनौतियाँ भी हो सकती हैं।
NationPress
14/03/2026

Frequently Asked Questions

फिच रेटिंग्स क्या है?
फिच रेटिंग्स एक प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसी है जो विश्व की अर्थव्यवस्थाओं और कंपनियों की वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन करती है।
भारत की जीडीपी वृद्धि दर में वृद्धि का क्या कारण है?
घरेलू मांग की मजबूती, उपभोक्ता खर्च में वृद्धि और सरकारी निवेश इसके प्रमुख कारण हैं।
क्या वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारत का प्रभाव है?
हाँ, भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था वैश्विक व्यापार और वित्तीय बाजारों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
क्या भारत की जीडीपी वृद्धि दर स्थिर रहेगी?
आर्थिक गतिविधियों में धीमी गति और महंगाई के कारण कुछ चुनौतियाँ आ सकती हैं, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टिकोण सकारात्मक है।
फिच ने भविष्य में भारत की आर्थिक वृद्धि दर के बारे में क्या कहा है?
फिच ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष २०२६-२७ में भारत की आर्थिक वृद्धि दर ६.७ प्रतिशत रह सकती है।
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