ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन के 36,381 कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम, जियोफेंसिंग से होगी फील्ड निगरानी
सारांश
मुख्य बातें
ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (जीसीसी) अपने 36,381 कर्मचारियों के लिए एक व्यापक बायोमेट्रिक हाजिरी व्यवस्था लागू करने की योजना बना रहा है, जिसका उद्देश्य कार्यस्थल अनुशासन को मज़बूत करना और आठ घंटे की अनिवार्य कार्य-शिफ्ट की पालना सुनिश्चित करना है। 20 मई 2026 को सामने आई इस पहल की पृष्ठभूमि में कर्मचारियों के देर से आने और हाजिरी की निगरानी को लेकर लगातार मिल रही शिकायतें हैं, खासकर फील्ड स्तर के कर्मचारियों के संदर्भ में।
कर्मचारी संरचना और समस्या की जड़
जीसीसी के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, निगम में इस समय 12,960 स्थायी और 23,421 संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं। विभिन्न जोन से हाजिरी में अनियमितता की शिकायतें सामने आई हैं — विशेष रूप से अंबत्तूर जोन में सफाई निरीक्षकों (सैनिटरी इंस्पेक्टरों) के विरुद्ध बार-बार ऐसे आरोप दर्ज हुए हैं। कई जोन और विभागों में फैले इस विशाल कार्यबल की निगरानी मौजूदा मैनुअल व्यवस्था से संभव नहीं हो पा रही, जिससे तकनीक-आधारित समाधान की ज़रूरत महसूस की जा रही है।
प्रस्तावित व्यवस्था की रूपरेखा
प्रस्तावित ढाँचे के तहत कर्मचारियों को दिन में दो बार — शिफ्ट शुरू होने पर और समाप्त होने पर — अपनी बायोमेट्रिक हाजिरी दर्ज करानी होगी। फील्ड निरीक्षण और बाहरी ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के लिए एक मोबाइल-आधारित हाजिरी ऐप प्रस्तावित है, जो जियोफेंसिंग तकनीक से जुड़ा होगा। यह प्रणाली हाजिरी दर्ज करते समय कर्मचारी की फोटो और लोकेशन भी रिकॉर्ड करेगी, जिससे अधिकारी वास्तविक समय में फील्ड उपस्थिति की पुष्टि कर सकेंगे।
आयुक्त की प्रतिक्रिया और वर्तमान स्थिति
जीसीसी आयुक्त जी.एस. समीरन ने पुष्टि की है कि सभी श्रेणियों के कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी की व्यावहारिकता पर प्रारंभिक चर्चा हो चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है और क्रियान्वयन की आवश्यकताओं तथा परिचालन प्रगति का और मूल्यांकन करने के बाद ही विस्तृत योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। गौरतलब है कि जीसीसी के पूर्व आयुक्त जे. कुमारगुरुबरन ने बताया कि फेस-रिकग्निशन हाजिरी व्यवस्था पर पहले भी चर्चा हो चुकी है और फील्ड स्टाफ के लिए एक मोबाइल ऐप पहले ही विकसित किया जा चुका है।
कर्मचारी संघों की आपत्तियाँ
कर्मचारी संघों ने इस पहल पर संदेह जताया है। उनका कहना है कि अतीत में शुरू की गई इसी तरह की व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया था। संघों ने क्रियान्वयन में रह जाने वाली कमियों को लेकर चिंता जताई है। उल्लेखनीय है कि फिलहाल बायोमेट्रिक हाजिरी व्यवस्था केवल रिपन बिल्डिंग स्थित प्रशासनिक कर्मचारियों तक सीमित है, जबकि कई वरिष्ठ अधिकारियों को इस व्यवस्था से छूट प्राप्त है — यह विरोधाभास संघों की आपत्तियों को और बल देता है।
आगे की राह
यह पहल ऐसे समय में आई है जब शहरी स्थानीय निकाय पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए तकनीक को अपना रहे हैं। विस्तृत क्रियान्वयन योजना के अंतिम रूप लेने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जीसीसी इस बार पिछली विफलताओं से सबक लेकर कोई ठोस तंत्र खड़ा कर पाता है या नहीं।