क्या भ्रष्टाचार से बचने के लिए जीसीएटी के डिप्टी कमिश्नर ने इस्तीफा दिया? रविदास मेहरोत्रा
सारांश
Key Takeaways
- शंकराचार्य के ऊपर हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है।
- जीएसटी डिप्टी कमिश्नर का इस्तीफा राजनीतिक विवाद का हिस्सा है।
- भ्रष्टाचार के आरोपों से बचने की कोशिश की जा रही है।
- सरकार मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
- यूजीसी के नए नियम से शिक्षा पर नियंत्रण बढ़ेगा।
लखनऊ, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बयान से चिंतित अयोध्या के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर ने सीएम योगी के समर्थन में इस्तीफा दे दिया। समाजवादी पार्टी के नेता रविदास मेहरोत्रा ने इसे एक नाटक करार दिया है।
लखनऊ में राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में, रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि जब बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने शंकराचार्य पर हो रहे अत्याचार के विरोध में इस्तीफा दिया, तब अयोध्या के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर, जिनके खिलाफ जांच चल रही है, ने जांच से बचने हेतु सरकार के पक्ष में इस्तीफे का ऐलान किया। यह इस्तीफा नाटक है, जनता को गुमराह करने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि शंकराचार्य हिंदुओं के लिए महत्वपूर्ण हैं, और भाजपा सरकार ने उनके प्रति अन्याय किया है। वे पिछले 10 दिनों से शांतिपूर्ण धरना दे रहे हैं, ऐसे में जीएसटी डिप्टी कमिश्नर को इस्तीफे की क्या आवश्यकता थी? यह केवल भ्रष्टाचार के आरोपों से बचने का एक तरीका है।
यूजीसी के नए नियम को लेकर सपा नेता ने कहा कि भाजपा सरकार जानबूझकर लोगों का ध्यान मुख्य मुद्दों से भटकाने का प्रयास कर रही है, जो लोगों को प्रभावित कर रहे हैं। सरकार महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, अपराध, खराब स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा करने को तैयार नहीं है। यूजीसी के नए नियम से शिक्षा में सुधार नहीं होगा, बल्कि शिक्षा पर सरकार का नियंत्रण होगा। यह छात्रों और शिक्षकों की आवाज को दबाने का प्रयास है।
बता दें कि जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने कहा है कि उन्होंने सरकार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री के समर्थन में अपना इस्तीफा दिया है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने कर्मचारी अनुशासन के दायरे में रहते हुए यह कदम उठाया है।