गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार, विदेश यात्रा से विशेषज्ञ बनने का किया खंडन
सारांश
Key Takeaways
- गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर सवाल उठाए।
- कोविड-19 के दौरान राहुल गांधी ने भ्रम फैलाने का प्रयास किया।
- भारत ने वैश्विक स्तर पर वैक्सीनेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- राहुल गांधी की आलोचना करने वाले गिरिराज सिंह का बयान महत्वपूर्ण है।
- राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति जारी है।
नई दिल्ली, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बार-बार देश की विदेश नीति पर सवाल उठाकर भ्रम फैलाने का प्रयास करते हैं, जो कि देश के लिए एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।
गिरिराज सिंह ने यह भी कहा कि राहुल गांधी का मानना है कि हर महीने विदेश यात्रा करने से वे विदेश नीति के विशेषज्ञ बन गए हैं। उन्होंने मजाक करते हुए कहा कि वे पर्यटकों की तरह 'मकर द्वार' जैसे स्थानों पर चाय-कॉफी का आनंद लेते हैं और फिर देश की आलोचना करते हैं।
उन्होंने यह बताया कि राहुल गांधी का यह व्यवहार नया नहीं है। कोविड-19 महामारी के समय भी राहुल गांधी ने इसी प्रकार से लोगों में भ्रम फैलाने का प्रयास किया था। उस समय उन्होंने कभी कहा कि बच्चों को वैक्सीन क्यों नहीं दी जा रही है, तो कभी अन्य मुद्दों पर सरकार पर सवाल उठाए।
गिरिराज सिंह ने कहा कि उस कठिन समय में सरकार ने न केवल देशवासियों की सेवा की, बल्कि भारत ने अपनी विदेश नीति के तहत कई देशों को वैक्सीन भी उपलब्ध कराई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी जिम्मेदारी निभाई।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का काम अब केवल भ्रम फैलाने तक सीमित रह गया है और उनके बयानों में गंभीरता की कमी दिखाई देती है। शायद राहुल गांधी को यह भी नहीं पता कि लोकसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका क्या होती है। यह स्थिति कांग्रेस पार्टी के लिए भी दुर्भाग्यपूर्ण है।
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने हाल ही में पश्चिम एशिया संकट के चलते होटल उद्योग पर एलपीजी की कमी के प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी। लोकसभा में उन्होंने कहा कि यह मुद्दा 'तकलीफ की शुरुआत' है, जो आगे और गंभीर हो सकता है।
अंत में, उन्होंने केंद्र सरकार की आलोचना की और यह सवाल उठाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह कैसे तय कर सकते हैं कि भारत को अपना तेल कहां से और किससे खरीदना चाहिए।