क्या गोवा में जिला पंचायत चुनाव 20 दिसंबर को होंगे?
सारांश
Key Takeaways
- जिला पंचायत चुनाव 20 दिसंबर को होंगे।
- मतगणना 22 दिसंबर को होगी।
- 868,637 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
- उत्तरी गोवा में महिलाओं के लिए 9 सीटें आरक्षित हैं।
- दक्षिण गोवा में महिलाओं के लिए 10 सीटें आरक्षित हैं।
पणजी, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। गोवा में जिला पंचायत चुनाव 20 दिसंबर को आयोजित किए जाएंगे। यह घोषणा राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) ने शनिवार को की। उत्तर और दक्षिण गोवा की कुल 50 सीटों के लिए मतदान होगा और मतगणना 22 दिसंबर को होगी। इस घोषणा के साथ ही सभी जिला परिषद क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है।
राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, उम्मीदवार 1 से 9 दिसंबर के बीच अपने नामांकन पत्र जमा कर सकते हैं। नामांकन पत्रों की जांच 10 दिसंबर को की जाएगी।
इस चुनाव के लिए मतदाता सूची 1 जनवरी, 2025 को अद्यतन की गई विधानसभा सूची पर आधारित है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने आरक्षण प्रक्रिया को पूरा कर लिया है। इसके अनुसार, उत्तरी गोवा में महिलाओं के लिए नौ सीटें, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए सात सीटें और अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (एससी और एसटी) के लिए एक-एक सीटें निर्धारित की गई हैं।
दक्षिण गोवा में महिलाओं के लिए 10, ओबीसी के लिए छह और अनुसूचित जनजाति के लिए 5 सीटें आरक्षित की गई हैं।
कुल 1,284 मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिनमें से 658 उत्तरी गोवा में और 626 दक्षिण गोवा में होंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि मतदान मतपत्रों के माध्यम से होगा। प्रत्येक उम्मीदवार के लिए खर्च की सीमा 5 लाख रुपए निर्धारित की गई है। इस चुनाव में कुल 868,637 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र हैं।
महिला मतदाता निर्वाचन क्षेत्र में मामूली बहुमत रखती हैं। कुल 4,20,431 पुरुष मतदाता और 4,48,201 महिला मतदाता हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया कि उत्तरी गोवा में 2,13,529 पुरुष और 2,25,948 महिला मतदाता हैं, जबकि दक्षिणी गोवा में 2,06,902 पुरुष और 2,22,252 महिला मतदाता हैं।
जिला पंचायत चुनावों को 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले जनता के मूड का संकेत माना जाता है।
2022 के गोवा विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 40 सदस्यीय सदन में 20 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। कांग्रेस ने 11 सीटें जीती थीं, जबकि महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) को 2 सीटें मिली थीं। इसके अलावा, बाकी सीटें छोटी पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीतीं।
हालांकि भाजपा साधारण बहुमत से चूक गई, फिर भी उसने एमजीपी और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाने में तेजी दिखाई।
इससे भाजपा राज्य में तीसरी बार सरकार बनाने में सफल रही और प्रमोद सावंत ने फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।